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एनआईए अफसर के भाई ने सुनाई आपबीती
ब्यूरो/अमर उजाला, मुरादाबाद
Updated Mon, 04 Apr 2016 04:52 AM IST
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पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे तंजील अहमद के बड़े भाई मो. रागिब अहमद ने बताया कि उनका परिवार रात करीब साढ़े बारह बजे शादी-समारोह से अपने गांव सहसपुर जा रहा था। दोनों भाइयों की कारें आगे पीछे चल रही थीं। रागिब की गाड़ी आगे चल रही थी, जबकि तंजील की कार पीछे।
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रागिब ने बताया कि मकान की चाबी तंजील के पास थी। जब उनके बेटे ने यह बताया तो उन्होंने अपनी गाड़ी की रफ्तार कम कर दी थी। रागिब जैसे ही अपने गांव के पास पहुंचे तो देखा उनके भाई की कार खड़ी है।
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कार के करीब जाते ही तंजील का बेटा शहबाज और बेटी जिमनिस करीबा चीखने लगे। बच्चे बोले, ‘ताया जी, बदमाशों ने मम्मी-पापा को गोली मार दी। प्लीज बचा लीजिए।’
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... और पत्नी को बचाने के लिए अपना सीना कर दिया आगे
तंजील खुद ही गाड़ी ड्राइव कर रहे थे। उनके बगल वाली सीट पर उनकी पत्नी बैठीं थीं। दोनों बच्चे पिछली सीट पर थे। बच्चों ने बताया कि पुलिया के पास गाड़ी धीमी होते ही अचानक चेहरा ढके दो लोग बाइक से आए।
एक बदमाश पापा के पास पहुंच गया और उसने गोली मार दी लेकिन इसके बाद उसकी गन से गोली नहीं निकली। बदमाश अपने साथी के पास पहुंचा और दूसरी गन ले आया। खतरे को भांपते हुए तंजील ने अपने बच्चों को सिर झुकाने के लिए कहा।
इसके बाद बदमाश ने ताबड़तोड़ गोलियां बरसाईं। मो. तंजील ने पत्नी को बचाने के लिए अपना सीना आगे कर दिया लेकिन बदमाश गोली बरसाता रहा। इस दौरान फरजाना को भी गोली लग गई।
गांव के विवाद भी निपटाते थे तंजील
मुरादाबाद। एनआईए में अफसर बनने के बाद भी उन्होंने अपने पैतृक गांव से ताल्लुक खत्म नहीं किए थे। वह एक-दो माह में गांव आते रहते थे। लोगों
को वह सम्मान देते थे और गांव के लोग भी उन्हें बड़े आदर भाव से बुलाते थे। वह गांव में होने वाले विवाद भी निपटाते थे।
बिजनौर की घटना हमारे के लिए बड़ी चुनौती है। हर पहलू की गहराई से जांच पड़ताल की जा रही है। लोकल पुलिस के साथ ही एटीएस, एसटीएफ, एनआईए समेत खुफिया एजेंसियां जुटी हैं। जल्द ही इस घटना का खुलासा किया जाएगा।
- बीएस मीना, आईजी जोन बरेली
एक बदमाश पापा के पास पहुंच गया और उसने गोली मार दी लेकिन इसके बाद उसकी गन से गोली नहीं निकली। बदमाश अपने साथी के पास पहुंचा और दूसरी गन ले आया। खतरे को भांपते हुए तंजील ने अपने बच्चों को सिर झुकाने के लिए कहा।
इसके बाद बदमाश ने ताबड़तोड़ गोलियां बरसाईं। मो. तंजील ने पत्नी को बचाने के लिए अपना सीना आगे कर दिया लेकिन बदमाश गोली बरसाता रहा। इस दौरान फरजाना को भी गोली लग गई।
गांव के विवाद भी निपटाते थे तंजील
मुरादाबाद। एनआईए में अफसर बनने के बाद भी उन्होंने अपने पैतृक गांव से ताल्लुक खत्म नहीं किए थे। वह एक-दो माह में गांव आते रहते थे। लोगों
को वह सम्मान देते थे और गांव के लोग भी उन्हें बड़े आदर भाव से बुलाते थे। वह गांव में होने वाले विवाद भी निपटाते थे।
बिजनौर की घटना हमारे के लिए बड़ी चुनौती है। हर पहलू की गहराई से जांच पड़ताल की जा रही है। लोकल पुलिस के साथ ही एटीएस, एसटीएफ, एनआईए समेत खुफिया एजेंसियां जुटी हैं। जल्द ही इस घटना का खुलासा किया जाएगा।
- बीएस मीना, आईजी जोन बरेली