आतंकी नेटवर्क को ध्वस्त करने में मददगार होगी आतंकी अली से मिली डायरी?
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राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने शुक्रवार को लश्कर आंतकी बहादुर अली के खिलाफ दिल्ली स्थित पटियाला हाउस कोर्ट की विशेष अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी है। बहादुर अली को जम्मू-कश्मीर से पिछले वर्ष 25 जुलाई के दिन दबोचा गया था। वह आतंकियों को घुसपैठ कराने की कोशिश कर रहा था।
एनआईए को बहादुर अली के माध्यम से बहुत ही खास जानकारियां मिली है। इन जानकारियों से देश में चल रहे एक बहुत बड़े आतंकी नेटवर्क को ध्वस्त करने में आसानी होगी।
आतंकी बहादुर अली पाकिस्तान में लाहौर के एक छोटे से गांव जिया बग्गा का रहने वाला है। उस पर गैर कानूनी गतिविधि अधिनियम 1967, विस्फोटक कानून-1884, विस्फोटक पदार्थ अधिनियम 1908, शस्त्र अधिनियम 1959 के कई वर्गों, विदेशी कानून-1946 और भारतीय वायरलेस टेलीग्राफी अधिनियम 1933 के तहत चार्जशीट तैयार की गई है।
हिजबुल आतंकी बुरहान बानी के मारे जाने के बाद बहादुर अली से उसके आतंकी आका अल्फा-3 ने संवाद स्थापित कर बताया था कि लश्कर आतंकी घाटी में उग्र प्रदशर्नों को अंजाम देने में कामयाब हो रहे हैं।
बहादुर अली को उसके आतंकी आकाओं से फरमान मिला था कि वह घाटी में उग्र प्रदर्शनों को और भड़काए और भारतीय सैनिकों पर ग्रेनेड से हमला करे।
जंगल में एक पेड़ के पास बना रखा था गोला-बारूद का भंडार
बहादुर अली पिछले वर्ष 12 जून को घुसपैठ कर भारत आया था। उसके साथ उसके दो साथी अबू साद और अबू डारडा भी थे। लेकिन बहादुर अली उन दोनों से अलग हो गया। वह स्थानीय मदद के चलते 24 जुलाई तक घाटी में रुका। वह पीओके में पनाह लिए अपने आतंकी आकाओं के इशारों पर काम कर रहा था। उसे लश्कर द्वारा भेजे जाने वाले नए आतंकियों की घुसपैठ का इंतजार था।
उसके आतंकी आका अल्फा 3 ने उसे नए आतंकियों की घुसपैठ से संबंधित नक्शा मुहैया कराया था। लेकिन इससे पहले कि वह आतंकियों के समूह की घुसपैठ करा पाता, भारतीय सुरक्षाबलों के हत्थे चढ़ गया।
आतंकी बहादुर अली से जानकारी मिली है आतंकी संगठन लश्कर तैयबा ने अच्छी तरह संगठित आतंकी नेटवर्क बनाया है, जिसके जरिए वह पाकिस्तान के विभिन्न प्रांतों से भारत के खिलाफ लड़ाई के लिए नए आतंकियों की भर्ती करता है। इन आतंकियों को नेविगेशन प्रणाली से लेस बेहद अत्याधुनिक हथियार मुहैया कराए जाते हैं।
9 अंकों के सीक्रेट कोड से रची जाती थी आतंकी साजिश
बहादुर अली की गिरफ्तारी के बाद उसने बताया कि यामाहा गांव के पास के जंगल में एक पेड़ के पास आतंकी वारदातों को अंजाम देने के लिए भारी गोल-बारूद इकट्ठा किया गया था। बहादुर अली की निशानदेही पर एनआईए ने आतंकियों के गोला-बारूद का बड़ा जखीरा जब्त कर लिया था। एनआईए को मिले ज्यादातर हथियारों का निर्माण पाकिस्तान में किया गया था।
आतंकी बहादुर अली और उसके साथियों को 9 अंकों का एक सीक्रेट कोड दिया गया था, जिसके जरिए वे बात करते थे। उसके पास से मिली डायरी में जम्मू-कश्मीर के अलावा भी भारत की कई जगहों के नाम लिखे मिले हैं। इन नामों के पीछे की वजह आतंकी वारदातों को अंजाम देने की थी। इनमें राजधानी दिल्ली का नाम भी शामिल था।
एनआईएन ने आतंकी बहादुर अली के खिलाफ अदालत में जो सबूत पेश किए हैं, उनमें 23000 रुपये भी शामिल हैं, और इन रुपयों में 3 जाली नोट भी मिले हैं।