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NIA: ‘युवाओं को भड़काकर आईएसआईएस में शामिल किया गया’, NIA की चार्जशीट में बड़ा खुलासा; चार लोगों पर गंभीर आरोप

Tue, 06 Aug 2024 11:08 PM IST
मिथिलेश नौटियाल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई Published by: मिथिलेश नौटियाल Updated Tue, 06 Aug 2024 11:08 PM IST
सार

एनआईए ने मंगलवार को चेन्नई की विशेष अदालत में चार लोगों के खिलाफ आरोपपत्र दायर किया है। चारों पर आरोप लगाया गया है कि उन्होंने युवाओं को कट्टरपंथी बनाकर आतंकी संगठन आईएसआईएस में भर्ती कराया।

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NIA charge sheets 4 men for radicalising youths recruiting them for ISIS
एनआईए - फोटो : पीटीआई

विस्तार

राष्ट्रीय जांच एसेंजी (एनआईए) ने मंगलवार को चेन्नई की विशेष अदालत में चार लोगों के खिलाफ आरोपपत्र (चार्जशीट) दायर किया है। चारों पर आरोप लगाया गया है कि उन्होंने युवाओं को कट्टरपंथी बनाकर आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड सीरिया (आईएसआईएस) में भर्ती कराया। एनआईए की तरफ से जारी बयान में कहा गया है कि चारों आरोपियों के नाम जमील बाशा, मोहम्मद हुसैन, इरशात और अब्दुर रहमान हैं। एनआईए अदालत में चारों आरोपियों पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत आरोपपत्र दायर किया गया है।

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भोले-भाले युवाओं को आईएसआईएस में भर्ती कराया- NIA
एनआईए ने इस आरोपपत्र को वर्ष 2022 में कोयंबटूर में हुए कार बम विस्फोट को लेकर तैयार किया है। चेन्नई स्थित एनआईए अदालत ने इस पर स्वत: संज्ञान लिया था। बता दें कि कोयंबटूर में एक मंदिर के बाहर विस्फोट हुआ था। इसके बाद एनआईए ने अपनी जांच शुरू की थी। जांच में एनआईए ने पाया कि गिरफ्तार किए गए अधिकतर आरोपियों द्वारा भोले-भाले युवाओं को आईएसआईएस में भर्ती कराया था। देश में आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए यह काम किया जाता था।
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ऐसे बनाया जाता था छात्रों को कट्टरपंथी
एनआईए ने बयान में कहा है कि आरोपियों ने कोयंबटूर में मद्रास अरबी कॉलेज नाम के अरबी भाषा केंद्र में धार्मिक शिक्षा दी थी। इस अरबी भाषा केंद्र को बाद में कोवई अरबी कॉलेज नाम दिया गया। आगे बताया गया है कि जमील बाशा ने जिला स्तर पर अरबी भाषा केंद्र स्थापित करने के लिए अपने पूर्व छात्रों का मार्गदर्शन किया था। जमील बाशा इसका मुख्य संरंक्षक भी था। मोहम्मद हुसैन और इरशात ने कोयंबटूर में अरबी भाषा केंद्र की स्थापना की थी। इस भाषा केंद्र में युवाओं को कट्टरपंथी बनाने के काम किया जाता था। एनआईए का कहना है कि इस अरबी भाषा केंद्र में छात्रों को जमील बाशा के उपदेशों को सुनाया जाता था।    

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