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जम्मू-कश्मीर में आतंकियों की तरकीब: पंचर लगाने वाले और ट्रक चालक बन गए मैसेंजर, रसूखदारों का खुलेगा भेद!

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Tue, 13 Jul 2021 07:07 PM IST
सार

2017 से लेकर 2020 तक मोबाइल सर्विलांस के जरिए कई बड़े आतंकियों का खात्मा किया गया। उसके बाद से आतंकी संगठनों ने संदेश पहुंचाने का अपना तरीका बदल लिया। अब वे रोमिंग सिस्टम के जरिए अपनी बात, स्लीपर सेल या टारगेट तक पहुंचने वाले आतंकी के पास पहुंचाते हैं...

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NIA and other security and investigation agencies in Jammu and Kashmir revealed, puncture and truck drivers become sleeper cells of terrorists
जम्मू-कश्मीर में सैन्य बल - फोटो : अमर उजाला (फाइल)

विस्तार

जम्मू-कश्मीर में जारी एनआईए और दूसरी सुरक्षा एवं जांच एजेंसियों के ऑपरेशन में कई तरह के खुलासे हो रहे हैं। आतंकियों को मदद पहुंचाने की नई तरकीब सामने आई है। पंचर लगाने वाले और ट्रक चालक, आतंकी गतिविधियों में इनका नाम पहले भी लिया जाता रहा है, लेकिन ये लोग अब एक नई भूमिका में दिखे हैं। जम्मू-कश्मीर के विभिन्न इलाकों में आतंकियों के पास जो तकनीकी उपकरण मौजूद हैं, सुरक्षा एजेंसियां उन्हें सर्विलांस पर ले रही हैं। उनके संदेश भी पकड़े गए हैं। नतीजा, आतंकियों ने मोबाइल फोन और अन्य दूरसंचार उपकरणों का इस्तेमाल करना कम कर दिया है। अब उन्होंने राष्ट्रीय राजमार्ग एवं दूसरे मार्गों पर दस बारह किलोमीटर के दायरे में अपने एजेंट बैठा दिए हैं। टायर पंचर लगाने वालों के रूप में बैठे एजेंट उन्हें आगे पीछे के पांच-छह घंटे की सिक्योरिटी मूवमेंट बताते रहते हैं। जिस ट्रक में हथियार या गोला बारूद होता है, उसे एक कोड वर्ड मिला होता है। जैसे ही ट्रक चालक, पंचर मैकेनिक को वह कोड बताता है, उसे आगे की जानकारी दे देता है। इस कड़ी का तोड़ निकालने के लिए सुरक्षा एजेंसियों ने भी अब मानवीय इंटेलिजेंस की मदद लेनी शुरू कर दी है। बहुत जल्द कुछ ऐसे रसूखदारों का खुलासा होने की उम्मीद है, जो बड़े प्लेटफार्म पर आतंकियों को मदद पहुंचाते रहे हैं।

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सुरक्षा एजेंसियों के सर्विलांस नेटवर्क का निकाला तोड़

एनआईए और जम्मू पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, आतंकी संगठन अब दोबारा से मोबाइल तकनीक का कम इस्तेमाल करने लगे हैं। 2017 से लेकर 2020 तक मोबाइल सर्विलांस के जरिए कई बड़े आतंकियों का खात्मा किया गया। उसके बाद से आतंकी संगठनों ने संदेश पहुंचाने का अपना तरीका बदल लिया। अब वे रोमिंग सिस्टम के जरिए अपनी बात, स्लीपर सेल या टारगेट तक पहुंचने वाले आतंकी के पास पहुंचाते हैं। सड़क पर टायर पंचर लगाने के रूप में उनके एजेंट बैठे हुए हैं। वे ट्रक चालक को आगे का रास्ता बता देते हैं। यह भी बताया जाता है कि अब कितनी दूरी पर उन्हें ठहरना है। अगर बीच राह से कोई ट्रक में चढ़ता है तो वह सूचना ड्राइवर को पहले वाले पंचर मैकेनिक से मिलती है। इसका मतलब ये है कि अगर कोई व्यक्ति बीच रास्ते में लिफ्ट लेना चाहे तो ट्रक नहीं रोका जाता। अगले प्वाइंट पर मैकेनिक उसे बताता है कि फलां किलोमीटर पर एक व्यक्ति उनके साथ जाएगा। उसके पास भी कोड वर्ड होता है। आतंकी संगठनों की ये चाल, सुरक्षा एजेंसियों के सर्विलांस नेटवर्क को तोड़ने के लिए होती है।

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ट्रक ड्राइवर ने खोले राज

जम्मू कश्मीर के पुलिस अधिकारी के अनुसार, हम पुष्टि नहीं कर सकते, लेकिन यह आशंका है कि जम्मू में ड्रोन से हथियार व गोला-बारूद गिराने की जो घटना हुई है, उसका खाका स्थानीय स्तर पर ही कहीं तैयार किया गया है। ड्रोन और गोला बारूद भी ट्रक या किसी दूसरे वाहन के जरिए लाया गया है। जम्मू की सैन्य छावनी कालूचक्क पुलिस नाके पर शक के चलते एक ट्रक ड्राइवर से पूछताछ की गई। वह आतंकी निकला और उसने खुद को लश्कर-ए-तैयबा संगठन का सदस्य बताया।

उसका कहना था कि ड्रोन, हथियार व गोला-बारूद पाकिस्तान से आया था। उसे सांबा के सीमावर्ती इलाके में खड़े रहने के लिए कहा गया था। उन्होंने ट्रक चालक को पिस्तौल, मैगजीन और कुछ कारतूस सौंपे थे। ये हथियार दक्षिण कश्मीर के पुलवामा जिले में पहुंचाने थे। ट्रक चालक को कोड वर्ड देकर यह हिदायत दी गई कि जब तक हथियार न मिल जाएं, उसे वहां से हिलना नहीं है। किसी को शक न हो, इसके लिए ट्रक के डिपर ऑन कर दिए जाएं। दिखावे के लिए ट्रक की मरम्मत का काम शुरू करा दिया। मौका मिलते ही हथियार लोड कर ट्रक रवाना हो गया।

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मानवीय इंटेलिजेंस का सहारा

एनआईए के सूत्र बताते हैं कि अब मानवीय इंटेलिजेंस के जरिए आतंकियों के मददगारों का पता लगाया जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियों ने भी सड़क किनारे अपने जवान लगाए हैं। वे सादे कपड़ों में होते हैं, जिससे किसी को उन पर शक नहीं होता। जम्मू-कश्मीर पुलिस का अच्छा इंटेलिजेंस नेटवर्क है। 14 मई 2020 को सांबा के रेगाल पोस्ट पर ड्रोन से एक एके-47 राइफल, नौ एमएम पिस्तौल व दो मैगजीन गिराई गई थीं। 14 फरवरी 2021 में रामगढ़ में ड्रोन से आए हथियार व गोला-बारूद बरामद हुआ था। इन दोनों घटनाओं के बारे में पुलिस का कहना था कि इन्हें ट्रक से घाटी तक पहुंचाना था। इस तरह के हैंडलर पर शिकंजा कसा जा रहा है। ये भी पता लगाया गया है कि इन्हें ये आदेश कहां से मिलता है। ऐसे लोगों पर बहुत जल्द रेड होगी। इनमें कुछ नाम काफी बड़े हैं। उनके राजनीतिक दलों से ताल्लुकात संभव हैं।

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