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NHRC: अवैध शराब से गया-औरंगाबाद में हुई मौतों पर एनएचआरसी सख्त, बिहार सरकार और पुलिस महानिदेशक को भेजा नोटिस

Wed, 25 May 2022 08:33 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Wed, 25 May 2022 08:33 PM IST
सार

आयोग ने कहा कि मीडिया की रिपोर्ट्स अगर सही हैं तो यह मानव अधिकारों का उल्लंघन है। आयोग ने राज्य के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को नोटिस जारी करके इस मामले में विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।

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NHRC issued notice to Bihar government and state police chief in connection with hooch tragedy in Aurangabad and Gaya
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विस्तार

जहरीली शराब पीने से बिहार के औरंगाबाद और गया जिलों में जहरीली शराब पीने से हुई मौतों के मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने स्वत: संज्ञान लेते हुए बिहार सरकार और राज्य के पुलिस प्रमुख को नोटिस जारी किया है। अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बिहार सरकार और पुलिस महानिदेशक को चार सप्ताह में पूरी रिपोर्ट दाखिल करने को कहा गया है।

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राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने लिया संज्ञान
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने अपने एक बयान में कहा कि उसने मीडिया में आई खबरों पर स्वत: संज्ञान लिया है कि बिहार के औरंगाबाद और गया जिलों में जहरीली शराब पीने से कम से कम छह लोगों की मौत हो गई और 12 बीमार हो गए। गौरतलब है कि कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में मरने वालों की संख्या 10 बताई जा रही है। आयोग ने अपने बयान में यह भी कहा कि इससे पहले,  कथित तौर पर मधेपुरा में इसी तरह की एक घटना में कई लोगों की मौत हुई थी। 
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आयोग ने बिहार सरकार और बिहार पुलिस महानिदेशक को जारी किया नोटिस
आयोग ने कहा कि मीडिया की रिपोर्ट्स अगर सही हैं तो यह मानव अधिकारों का उल्लंघन है। इस मामले में आयोग ने राज्य के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को नोटिस जारी करके चार सप्ताह के भीतर इस मामले में विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।  इसमें दोषियों के खिलाफ कार्रवाई और भविष्य में इस तरह की दर्दनाक घटनाओं को रोकने के लिए उठाए जाने वाले कदम शामिल हैं।
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प्रतिबंध के वाबजूद जारी है काला कारोबार
आयोग ने आगे कहा है कि बिहार में 2016 में शराब के निर्माण, बिक्री और खपत पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। इसके बावजूद, राज्य के विभिन्न हिस्सों में नकली शराब के सेवन से कई लोगों की मौत हुई है। जाहिर है कि कानून लागू करने वाली एजेंसियां कानून के प्रावधानों को सफलतापूर्वक लागू करने में सक्षम नहीं हैं, जिसके परिणामस्वरूप अपराधी अवैध शराब के अवैध निर्माण और बिक्री में लिप्त हैं, जिससे पीड़ितों के परिवारों को अपूरणीय क्षति होती है।


गौरतलब है कि इस मामले के बाद पुलिस ने कई अवैध शराब फैक्टरियों को नष्ट किया है और 67 संदिग्ध लोगों को गिरफ्तार किया है। सीएम नीतीश कुमार की सरकार ने अप्रैल 2016 में शराब के सेवन और बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया था। हालांकि, अभी भी बड़े पैमाने पर राज्य में अवैध शराब का कारोबार हो रहा है।

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