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अवैध बस्तियों ने यमुना को नाश किया, एनजीटी ने कहा- घरों से चल रही व्यावसायिक गतिविधियां खतरनाक

Thu, 12 Sep 2019 05:58 AM IST
देव कश्यप न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: देव कश्यप Updated Thu, 12 Sep 2019 05:58 AM IST
सार

  • एनजीटी ने कहा दिल्ली में तेजी से बनीं अवैध बस्तियों ने यमुना नदी को तबाह किया
  • दो करोड़ की आबादी वाले शहर में 70 लाख से ज्यादा लोग अवैध बस्तियों में
  • दिल्ली सरकार को आदेश मुफ्त योजना से सोसायटियों में पानी की बर्बादी रोके जल बोर्ड

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NGT said Illegal colonies destroyed Yamuna, Business activities going on from homes are dangerous
NGT

विस्तार

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने कहा है कि देश की राजधानी में तेजी से बनीं अवैध बस्तियों ने यमुना नदी को तबाह कर दिया है। एनजीटी ने बुधवार को कहा कि इसके कारण पर्यावरण को गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है।

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एनजीटी के अध्यक्ष जस्टिस एके गोयल की पीठ ने कहा कि यह स्थिति केवल दिल्ली तक सीमित नहीं है, बल्कि यही हाल उत्तर प्रदेश और हरियाणा का भी है। पिछले 20 वर्षों से बेरोकटोक अवैध कॉलोनियों के विस्तार का अनुभव बताता है कि इससे आबादी का बड़ा हिस्सा बेतरतीब ढंग से रह रहा है। इससे सड़कें और सीवर व्यवस्था चरमरा गई है। पीठ ने कहा कि ऐसी बस्तियों में लोग घरों से ही ऐसी गतिविधियां चला रहे हैं, जो खतरनाक होने के साथ-साथ पहले से ही प्रदूषित नदी और पर्यावरण को और प्रदूषित कर रही हैं।

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एसटीपी व सीवेज के प्रबंधन की जानकारी नहीं

एनजीटी ने कहा कि सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट, नालों और सीवेज के नदी में गिरने से रोकने के लिए पेशेवर प्रबंधन की कोई जानकारी नहीं है। पीठ ने कहा कि दो करोड़ की आबादी वाले शहर में 70 लाख से ज्यादा लोग अवैध बस्तियों में हैं, जहां सीवेज की व्यवस्था नहीं है। इससे वातावरण प्रभावित होगा। सेवानिवृत्त एनजीटी विशेषज्ञ बीएस सजवान और दिल्ली की पूर्व मुख्य सचिव शैलजा चंद्रा की सदस्यता वाली निगरानी समिति की रिपोर्ट पर एनजीटी ने यह टिप्पणी की।

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दिल्ली सरकार को आदेश सोसायटियों में पानी की बर्बादी रोके जल बोर्ड

एनजीटी ने दिल्ली जल बोर्ड को केजरीवाल सरकार की मुफ्त पानी योजना के कारण हाउसिंग सोसाइटियों में होने वाली पानी की बर्बादी रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने का निर्देश दिया है। गौरतलब है कि आम आदमी पार्टी की सरकार दिल्ली में हर परिवार को प्रतिमाह 20 हजार लीटर पानी मुफ्त देती है। एनजीटी ने पाया कि ये लोग पानी का बिल चुकाने से बचने के लिए 20 हजार लीटर मुफ्त पानी का इस्तेमाल करने के बाद और इस्तेमाल के लिए भूमिगत जल का दोहन करते हैं।

यमुना के डूब क्षेत्र से तीन माह में अतिक्रमण हटाए डीडीए

एनजीटी ने दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) को निर्देश दिया है कि वह यमुना के पूरे डूब क्षेत्र को तीन महीने के अंदर अतिक्रमण से खाली कराए और उसकी तारबंदी कर उसे जैवविविधता पार्क में तब्दील करे। ट्रिब्यूनल ने यमुना किनारे खेती पर रोक लगाने की बात फिर दोहराई है।

एनजीटी अध्यक्ष जस्टिस एके गोयल ने चेतावनी दी है कि यदि डीडीए ने आदेश का अनुपालन नहीं किया तो उसे अगले साल एक अप्रैल से प्रतिमाह पांच लाख का जुर्माना भरना पड़ेगा। यह जुर्माना अधिकारियों के वेतन से वसूला जा सकता है। जुर्माने की रकम केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में जमा कराया जाएगा ताकि वह पर्यावरण को दुरुस्त कर सके। एनजीटी के निर्देश के अनुपालन की निगरानी समिति करेगी।

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