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ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के लिए उपयुक्त भूमि की उपलब्धता पर गौर करें एलजी, सीएस : एनजीटी
Thu, 29 Oct 2020 06:30 AM IST
Kuldeep Singh
एजेंसी, नई दिल्ली
एजेंसी, नई दिल्ली
Published by: Kuldeep Singh
Updated Thu, 29 Oct 2020 06:30 AM IST
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- फोटो : फाइल फोटो
राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) ने बुधवार को दिल्ली के उपराज्यपाल (एलजी) और मुख्य सचिव (सीएस) को उत्तरी पश्चिमी दिल्ली में रानीखेड़ा में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के लिए उपयुक्त जमीन की उपलब्धता के मामले पर गौर करने का निर्देश दिया है।
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एनजीटी के चेयरपर्सन जस्टिस आदर्श कुमार गोयल की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि जमा हुए कचरे की समस्या अभी भी बनी हुई है और इसका समाधान मुख्य सचिव और उपराज्यपाल को ही निकालना है।
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पीठ ने कहा कि ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के लिए उपयुक्त भूमि की उपलब्धता के मामले का समाधान पहले एलजी और सीएस द्वारा ही निकाला जाना है और यदि प्राधिकरण इस तरह के मुद्दे पर निर्णय लेता है तो डीएसआईआईडीसी के पास इस फैसले के आधार पर एनजीटी के पास आने का विकल्प खुला हुआ है। दिल्ली राज्य औद्योगिक और बुनियादी ढांचा विकास निगम (डीएसआईआईडीसी) की याचिका पर आदेश पारित किया था।
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डीएसआईआईडीसी ने एनजीटी से अपने के पहले के आदेश पर समीक्षा की मांग की थी जिसमें कहा गया था कि अपशिष्ट प्रबंधन के लिए उपलब्ध साइटों पर वाणिज्यिक इमारतों का निर्माण नहीं किया जा सकता है।
इकाई बंद के आदेश के खिलाफ आवेदन देने का मुर्गी पालन फर्म के मालिक को एनजीटी ने दिया निर्देश
राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) ने बुधवार को मुर्गी पालन फर्म के मालिक को दो हफ्ते के अंदर हरियाणा प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के समक्ष उसकी इकाई बंद करने के खिलाफ आवेदन देने का निर्देश दिया। एनजीटी चेयरपर्सन जस्टिस आदर्श कुमार गोयल की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि प्रदूषण मुक्त पर्यावरण का अधिकार बुनियादी हक है, याचिकाकर्ता मुर्गीपालन फर्म को जारी रखने का निर्देश दिया जा सकता है बशर्ते वह यह दिखा दे कि उसने जगह समेत सभी पर्यावरणीय नियमों का पालन किया।
पीठ ने कहा कि रद्द आदेश से यह स्पष्ट नहीं होता है कि आदेश जारी किए जाने से पहले याचिकाकर्ता की बात सुनी गई या नहीं। पूर्ण सावधानी बरतते हुए, हम याचिकाकर्ता को आज से दो हफ्ते के अंदर एक आवेदन देने की अनुमति देते हैं। यदि दो हफ्ते के अंदर ऐसा आवेदन दिया जाता है तो इसके बाद एक महीने के अंदर फैसला लेना होगा।
एनजीटी प्रेम मुर्गीपालन फर्म की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। फर्म ने प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के उस आदेश के खिलाफ एनजीटी का दरवाजा खटखटाया जिसमें अपशिष्ट भंडारण सुविधा की कमी के चलते फर्म को बंद करने का आदेश दिया था। याचिकाकर्ता का कहना था कि उसे अपनी स्थिति स्पष्ट करने का अवसर नहीं दिया गया।