ताज पर दाग मामले मे एनजीटी ने केंद्र और यूपी से मांगा जवाब
- हरे और काले रंग के कीड़े बिगाड़ रहे थे ताज की खूबसूरती
- यमुना में प्रदूषण के कारण पनपने वालों कीड़े ताज पर लगा रहे थे धब्बा
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उत्तर प्रदेश के आगरा जिले में मशहूर विश्व प्रसिद्ध पर्यटक स्थल ताजमहल की खूबसूरती पर धब्बा लगाने वाले हरे कीड़ों ( किरोनॉमस कैलीग्राफस) ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) का भी ध्यान खींचा है। अमर उजाला की खबर को आधार बनाकर दाखिल की गई याचिका पर विचार के बाद एनजीटी ने केंद्र और यूपी के संबंधित प्राधिकरणों को नोटिस देकर जवाब मांगा है।
जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट की अनुश्रवण समिति के सदस्य डीके जोशी की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई की। बेंच ने मामले में पक्षकार पर्यावरण मंत्रालय, उत्तर प्रदेश सरकार व उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, राज्य पर्यावरण प्रभाव मूल्यांकन प्राधिकरण व अन्य से जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 25 या 26 मई को हो सकती है।
वैश्विक धरोहर पर आंच
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए याची का आरोप है कि वैश्विक धरोहर ताजमहल के नजदीक से गुजरने वाली यमुना में लगातार कूड़े-कचरे की ठोस डंपिंग हो रही है। इसके चलते बड़े पैमाने पर विशेष प्रजाति के हरे रंग वाले कीड़े पैदा हो रहे हैं । ये कीड़े न सिर्फ ताजमहल के सफेद संगमरमर को नुकसान पहुंचा रहे हैं। बल्कि इन कीड़ों के चलते ताज पर हरे और काले रंग के धब्बे भी उभर रहे हैं। यह यमुना के प्रदूषित जलस्तर को भी दर्शाता है।
इन कीड़ों के कारण ताज को पहुंचने वाले नुकसान को लेकर संत जॉन स्कूल आगरा की ओर से एक प्रारंभिक रिपोर्ट भी जारी की गई थी। इस रिपोर्ट में कहा गया था कि इन हरे रंग के कीड़ों के चलते वैश्विक धरोहर को नुकसान पहुंच रहा है। वहीं, याचिका में एनजीटी से मांग की गई है कि इस मामले की जांच के लिए एक कमेटी नियुक्त की जाए। यह कमेटी इस समस्या की पहचान करेगी।