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पुणेः एनजीटी ने जुबिलेंट लाइफ साइंसेज पर लगाया 5.47 करोड़ का जुर्माना
Wed, 05 Feb 2020 12:36 AM IST
संजीव कुमार झा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: संजीव कुमार झा
Updated Wed, 05 Feb 2020 12:36 AM IST
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एनजीटी
- फोटो : सोशल मीडिया
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नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने मंगलवार को पुणे में जुबिलेंट लाइफ साइंसेज की डिस्टिलरी यूनिट पर अपशिष्टों के निर्वहन और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने के लिए 5.47 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया।
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एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि निगरानी समिति ने अपनी जांच में उद्योग को नियमों का पालन करते नहीं पाया है, इसलिए मुआवजे का भुगतान करना होगा। इस पीठ में न्यायमूर्ति एसपी वांगड़ी भी शामिल हैं।
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पीठ ने कहा कि अतीत में क्षति के लिए मुआवजे के भुगतान के अलावा यूनिट को हटाने के लिए कदम उठाने की जरूरत है। तीन महीने के अंदर सभी जरूरी कदम उठाए जाएं और यदि आदेश का पालन नहीं किया जाता है, तो बंद करना एकमात्र विकल्प हो सकता है। मुआवजे को एक महीने के भीतर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पास जमा कराएं।
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ट्रिब्यूनल ने यह आदेश 20 फरवरी, 2019 को गठित निगरानी समिति द्वारा दायर की गई एक रिपोर्ट के बाद पारित किया है। समिति ने ट्रिब्यूनल को बताया कि यूनिट लगातार नियमों और पर्यावरण मानदंडों का उल्लंघन करती रही है, जिसके लिए 5,47,50,000 रुपये का मुआवजा दिया जाना जरूरी है।
रिपोर्ट के अनुसार किसानों को मुआवजे के वितरण के लिए कार्यप्रणाली पर काम करने की आवश्यकता है। ट्रिब्यूनल, महाराष्ट्र निवासी जनार्दन कुण्डलीकर राव फरांदे और अन्य की याचिका पर सुनवाई कर रहा था। वह पुणे के निंबुत-नीरा में डिस्टलरी यूनिट की गतिविधि के कारण पर्यावरण को पहुंच रहे नुकसान के लिए कार्रवाई की मांग कर रहे थे।