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आप भी खाते हैं चांदी का वर्क लगी मिठाई, तो जरूर पढ़ें ये खबर
समीउद्दीन नीलू/अमर उजाला, पीलीभीत
Updated Fri, 29 Apr 2016 03:49 AM IST
सार
- पशु की आंत से वर्क बनाने पर लगेगी रोक
- दो साल पहले मेनका गांधी ने लिखा था पत्र
- रायशुमारी के लिए जारी हुआ राजपत्र
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मिठाई
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विस्तार
मिठाई, सुपारी, इलायची समेत तमाम खाद्य पदार्थों का स्वाद बढ़ाने के लिए उनके ऊपर लगाया जाने वाला वर्क जल्द ही अब मशीनों से तैयार किया जाएगा। बहुत कम लोग ही जानते होंगे कि यह वर्क गाय-बैल की आंतों के सहारे तैयार किया जाता है। दो साल पहले केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी की शिकायत पर शुरू हुई कार्रवाई के संबंध में स्वास्थ्य मंत्रालय की रिपोर्ट के बाद केंद्र सरकार इसके लिए कानून बनाने जा रही है। इसके लिए 19 अप्रैल को राजपत्र भी जारी किया गया है।
मेनका गांधी ने अमर उजाला को बताया कि मिठाई, पान ही नहीं सेब जैसे फल को आकर्षक बनाने के लिए उनके ऊपर जो चांदी का वर्क लगाया जाता है वह मांसाहार की श्रेणी में आता है। उनका कहना है कि यह वर्क जिंदा बैलों का कत्ल कर उनकी आंत के सहारे तैयार किया जाता है। वर्क लगी मिठाइयों के बढ़ते क्रेज के कारण प्रति वर्ष हजारों गौवंशीय पशुओं की हत्या की जाती है।
उन्होंने बताया कि गौवंशीय पशु की आंत से बनी किताब में चांदी, एल्यूमिनियम अथवा उस जैसी धातु का बड़ा टुकड़ा डाला जाता है। फिर उसे लकड़ी के हथौड़े से पीट कर पतला करके आकार दिया जाता है। बैल की आंत पीटते रहने से फटती नहीं है। चांदी के वर्क के चक्कर में कुछ लोग एल्यूमिनियम भी बेच देते हैं। मेनका का कहना है कि इस कारोबार से जुड़े लोग प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से पशु हत्या, गाय की हत्या में भी संलिप्त कहे जा सकते हैं। कुछ साल पहले इंडियन एयरलाइंस ने यह महसूस करने पर कि वर्क मांसाहार है, अपने कैटरर को विमान में परोसी जाने वाली मिठाइयों पर वर्क न लगाने के निर्देश दिए भी थे।
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'मैंने दो साल पहले स्वास्थ्य मंत्रालय को पत्र भेज कर बैल की आंतों के सहारे तैयार कराए जाने वाले वर्क पर रोक लगाने को कहा था। स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा कराई गई जांच में भी वर्क के मांसाहार होने की पुष्टि हुई। केंद्र अब कानून के जरिये इस पर प्रतिबंध की तैयारी में है। इस आशय का 19 अप्रैल 2016 को राजपत्र भी आम राय के लिए वेबसाइट पर डाल दिया गया है।'
- मेनका संजय गांधी, केंद्रीय मंत्री
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मेनका गांधी ने अमर उजाला को बताया कि मिठाई, पान ही नहीं सेब जैसे फल को आकर्षक बनाने के लिए उनके ऊपर जो चांदी का वर्क लगाया जाता है वह मांसाहार की श्रेणी में आता है। उनका कहना है कि यह वर्क जिंदा बैलों का कत्ल कर उनकी आंत के सहारे तैयार किया जाता है। वर्क लगी मिठाइयों के बढ़ते क्रेज के कारण प्रति वर्ष हजारों गौवंशीय पशुओं की हत्या की जाती है।
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उन्होंने बताया कि गौवंशीय पशु की आंत से बनी किताब में चांदी, एल्यूमिनियम अथवा उस जैसी धातु का बड़ा टुकड़ा डाला जाता है। फिर उसे लकड़ी के हथौड़े से पीट कर पतला करके आकार दिया जाता है। बैल की आंत पीटते रहने से फटती नहीं है। चांदी के वर्क के चक्कर में कुछ लोग एल्यूमिनियम भी बेच देते हैं। मेनका का कहना है कि इस कारोबार से जुड़े लोग प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से पशु हत्या, गाय की हत्या में भी संलिप्त कहे जा सकते हैं। कुछ साल पहले इंडियन एयरलाइंस ने यह महसूस करने पर कि वर्क मांसाहार है, अपने कैटरर को विमान में परोसी जाने वाली मिठाइयों पर वर्क न लगाने के निर्देश दिए भी थे।
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'मैंने दो साल पहले स्वास्थ्य मंत्रालय को पत्र भेज कर बैल की आंतों के सहारे तैयार कराए जाने वाले वर्क पर रोक लगाने को कहा था। स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा कराई गई जांच में भी वर्क के मांसाहार होने की पुष्टि हुई। केंद्र अब कानून के जरिये इस पर प्रतिबंध की तैयारी में है। इस आशय का 19 अप्रैल 2016 को राजपत्र भी आम राय के लिए वेबसाइट पर डाल दिया गया है।'
- मेनका संजय गांधी, केंद्रीय मंत्री