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आईआईटी प्रबंधन को उम्मीद नए अमेरिकी राष्ट्रपति पोस्ट डॉक्टरल की फंडिग में करेंगे इजाफा
Mon, 09 Nov 2020 04:08 AM IST
Jeet Kumar
सीमा शर्मा, नई दिल्ली
सीमा शर्मा, नई दिल्ली
Published by: Jeet Kumar
Updated Mon, 09 Nov 2020 04:08 AM IST
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जो बाइडेन (फाइल फोटो)
- फोटो : Facebook
अमेरिका के नए राष्ट्रपति जो बाइडन भारत की बेटियों को उच्च शिक्षा में शोध क्षेत्र में बढ़ावा दे सकते हैं। दरअसल नए अमेरिकी राष्ट्रपति विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में रिसर्च पर खासा फोकस रखते हैं।
हालांकि, वे लिंषगभेद (बेटा-बेटी में भेदभाव) के खिलाफ भी हैं। बाइडन 2013 में भारत आए थे। इस दौरान वे आईआईटी बॉम्बे भी पहुंचे। यहां नैनो-इलेक्ट्रानिक्स लैब में उनका फोकस भारतीय बेटियों के पीएचडी रिसर्च कार्यों का जायजा लेने पर सबसे अधिक रहा था।
आईआईटी दिल्ली के डायरेक्टर और आईआईटी बॉम्बे की फैकल्टी प्रो. वी रामगोपाल राव कहते हैं कि नए राष्ट्रपति विज्ञान और प्रौद्योगिकी के साथ शोध क्षेत्र में खासी रुचि रखते हैं। दरअसल 2013 में अमेरिकी उपराष्ट्रपति पद पर रहने के दौरान उन्होंने आईआईटी बॉम्बे की नैनो-इलेक्ट्रानिक्स लैब का दौरा किया था।
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उन्होंने इच्छा जताई थी कि वे पीएचडी में भारत की बेटियों के रिसर्च वर्क को देखना चाहते हैं। करीब दो घंटे तक उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में किए गए रिसर्च कार्यों का जायजा लिया था। इस दौरान उन्होंने माइक्रोस्कोप डिवाइस की खूबियों के बारे में विस्तार से जानकारी ली थी।
-डीएसटी और एनएसएफ एक साथ करेगा रिसर्च:
आईआईटी प्रबंधन का मानना है कि भारत का डीएसटी (डिपार्टमेंट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी) और अमेरिका का एनएसएफ (नेशनल साइंस फाउंडेशन) मिलकर काम कर सकते हैं। यदि भारत-अमेरिका रिसर्च क्षेत्र में एक साथ मिलकर काम करते हैं तो इसका फायदा भी सबसे अधिक भारतीय छात्रों को ही होगा।
इसके अलावा आईआईटी प्रबंधन को उम्मीद है कि नए अमेरिकी राष्ट्रपति भारतीय छात्रों के हुनर को देखते हुए वीजा नियमों में ढील देने के साथ पोस्ट डॉक्टरल में फंडिंग बढ़ाएंगे। इसके अलावा विज्ञान और प्रौद्योगिकी में बेटियों को भी शोध क्षेत्र में आगे बढने का मौका मिलेगा। इसी के तहत उच्च शिक्षा में बेटियों को आगे बढ़ाने पर योजना लागू हो सकती है।
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हालांकि, वे लिंषगभेद (बेटा-बेटी में भेदभाव) के खिलाफ भी हैं। बाइडन 2013 में भारत आए थे। इस दौरान वे आईआईटी बॉम्बे भी पहुंचे। यहां नैनो-इलेक्ट्रानिक्स लैब में उनका फोकस भारतीय बेटियों के पीएचडी रिसर्च कार्यों का जायजा लेने पर सबसे अधिक रहा था।
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आईआईटी दिल्ली के डायरेक्टर और आईआईटी बॉम्बे की फैकल्टी प्रो. वी रामगोपाल राव कहते हैं कि नए राष्ट्रपति विज्ञान और प्रौद्योगिकी के साथ शोध क्षेत्र में खासी रुचि रखते हैं। दरअसल 2013 में अमेरिकी उपराष्ट्रपति पद पर रहने के दौरान उन्होंने आईआईटी बॉम्बे की नैनो-इलेक्ट्रानिक्स लैब का दौरा किया था।
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उन्होंने इच्छा जताई थी कि वे पीएचडी में भारत की बेटियों के रिसर्च वर्क को देखना चाहते हैं। करीब दो घंटे तक उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में किए गए रिसर्च कार्यों का जायजा लिया था। इस दौरान उन्होंने माइक्रोस्कोप डिवाइस की खूबियों के बारे में विस्तार से जानकारी ली थी।
-डीएसटी और एनएसएफ एक साथ करेगा रिसर्च:
आईआईटी प्रबंधन का मानना है कि भारत का डीएसटी (डिपार्टमेंट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी) और अमेरिका का एनएसएफ (नेशनल साइंस फाउंडेशन) मिलकर काम कर सकते हैं। यदि भारत-अमेरिका रिसर्च क्षेत्र में एक साथ मिलकर काम करते हैं तो इसका फायदा भी सबसे अधिक भारतीय छात्रों को ही होगा।
इसके अलावा आईआईटी प्रबंधन को उम्मीद है कि नए अमेरिकी राष्ट्रपति भारतीय छात्रों के हुनर को देखते हुए वीजा नियमों में ढील देने के साथ पोस्ट डॉक्टरल में फंडिंग बढ़ाएंगे। इसके अलावा विज्ञान और प्रौद्योगिकी में बेटियों को भी शोध क्षेत्र में आगे बढने का मौका मिलेगा। इसी के तहत उच्च शिक्षा में बेटियों को आगे बढ़ाने पर योजना लागू हो सकती है।