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रात भर मॉल-दुकानें खोलने की योजना, कहीं एक सपना बन कर न रह जाए
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली
Updated Thu, 30 Jun 2016 11:31 AM IST
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रात भर मॉल और दुकानें खोलने की योजना को हरी झंडी
- फोटो : amar ujala
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केंद्र सरकार ने भले ही रात भर मॉल और दुकानें खोलने की योजना को हरी झंडी दे दी हो। पर क्या देश के सभी राज्य इस योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए तैयार हैं। ये कहना अभी मुश्किल ही होगा। देश के कई राज्य जो अभी भी बिजली की कमी से जूझ रहे हैं और अपने राज्यों के नागरिकों को सुचारू रूप से बिजली उपलब्ध नहीं करा पा रहे हैं। वो राज्य कैसे इन योजना को अपने यहां लागू कर पाएंगे।
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उदाहरण के लिए उत्तर प्रदेश में बिजली की मांग काफी ज्यादा है पर वहां अभी भी 24 घंटे बिजली की आपूर्ति सुनिश्चित नहीं हो पाई है। वहीं बिजली की कीमत प्रति यूनिट भी यहां पर दूसरे राज्यों से ज्यादा है। यहां राज्य सरकार पर दबाव है कि सबसे पहले लोगों तक बिजली की आपूर्ति को सुनिश्चित किया जाए। ऐसे में मॉल और दुकानों को रात भर बिजली की आपूर्ति से राज्य के लोगों को कही बिजली की कमी न झेलनी पड़े। इसके अलावा सुरक्षा व्यवस्था से लेकर नए कारोबारी नियमों में बदलाव तक के लिए राज्य सरकार को अलग से कानून पास करना पड़ेगा। इसको लेकर छोटे और मझोले व्यापारियों को विरोध भी स्थानीय सरकार को झेलना पड़ सकता है।
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दिल्ली में बिजली की आपूर्ति 24 घंटे
दिल्ली में बिजली की आपूर्ति 24 घंटे है और इस केंद्र शासित प्रदेश के पास बिजली सरप्लस
- फोटो : Demo pic
वहीं दिल्ली में बिजली की आपूर्ति 24 घंटे है और इस केंद्र शासित प्रदेश के पास बिजली सरप्लस भी है। जोकि वो दूसरे राज्यों को बेचना चाहता है। उत्तर प्रदेश की तुलना में दिल्ली की में प्रति यूनिट बिजली की कीमत भी कम है। दिल्ली सरकार 24 घंटे मॉल और दुकानें खोलने की इजाजत दे सकती है। पर यहां पर भी बड़ा मुद्दा व्यापारिक संगठनों का विरोध और कानूनी सुरक्षा व्यवस्था है। क्योंकि दिल्ली एक केंद्र शासित राज्य है और पुलिस पर किसका नियंत्रण होगा। इस पर राज्य और केंद्र सरकार दोनों में घमासान हो सकता है। क्योंकि केंद्र सरकार ने यह निर्णय राज्य सरकारों पर डाल दिया है कि वो 24 घंटे कारोबार करने की इजाजत लोगों को देती है कि नहीं। इसलिए इस मामले में भविष्य में आरोप-प्रत्यारोप तय हैं।
देश के अंदर अभी भी रात भर खरीदारी करने की सुविधा सिर्फ त्यौहारों के दौरान ही मिल पाती है। इसलिए 24 घंटे मॉल और दुकानें खोलने वाले कारोबारी भी इस बात की पूरी तरह जांच पड़ताल करना चाहेंगे कि क्या उनके शहर की जनता रात भर मॉल और दुकानों में खरीदारी के लिए आने को तैयार हैं।
देश के अंदर अभी भी रात भर खरीदारी करने की सुविधा सिर्फ त्यौहारों के दौरान ही मिल पाती है। इसलिए 24 घंटे मॉल और दुकानें खोलने वाले कारोबारी भी इस बात की पूरी तरह जांच पड़ताल करना चाहेंगे कि क्या उनके शहर की जनता रात भर मॉल और दुकानों में खरीदारी के लिए आने को तैयार हैं।
365 दिन 24 घंटे खुला रखने की अनुमति देने वाले एक मॉडल कानून को मंजूरी
unique hotels
- फोटो : toptenz
बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली कैबिनेट कमेटी ने दुकानों, शापिंग मॉल व अन्य प्रतिष्ठानों को साल के 365 दिन 24 घंटे खुला रखने की अनुमति देने वाले एक मॉडल कानून को मंजूरी दे दी।
इस कानून की मंजूरी के साथ ही रात की पाली में महिलाओं को मॉल व दुकानों में काम करने की इजाजत दे दी गई, लेकिन इसके साथ महिलाओं की सुरक्षा व उन्हें घर लाने व ले जाने जैसी कई सुविधाएं मुहैया कराने की शर्तें रखी गई हैं।
वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि केंद्र सरकार की तरफ से इस कानून को पारित कर दिया गया है और इसे राज्यों को भेज दिया गया है।
इसे लागू करना राज्य की सरकारों पर निर्भर करता है। सरकार का उद्देश्य अतिरिक्त रोजगार सृजित करना है क्योंकि दुकानें अधिक समय तक खुले रहने पर अधिक श्रमबल की जरूरत पड़ेगी। श्रम मंत्रालय के तरफ से रखे इस प्रस्ताव में विधायी प्रावधानों में समानता लाने के लिए डिजाइन किया गया है जिससे सभी राज्यों के लिए इसे अंगीकार करना आसान होगा और देश भर में समान कामकाजी माहौल सुनिश्चित होगा।
इस कानून के तहत प्रतिष्ठानों को अपनी सुविधा के मुताबिक खोलने व बंद करने का समय तय करने की सुविधा मिलेगी। इस कानून के दायरे में विनिर्माण इकाइयों के अलावा वे सभी प्रतिष्ठान आएंगे जिनमें 10 या अधिक कर्मचारी हैं। यह कानून इन प्रतिष्ठानों को खुलने व बंद करने का समय अपनी सुविधा के अनुसार तय करने तथा साल के 365 दिन परिचालन की अनुमति देता है।
इस कानून में पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था के साथ महिलाओं को रात की पाली में काम पर लगाने की छूट और पेयजल, कैंटीन, प्राथमिक चिकित्सा जैसी सुविधाओं के साथ कार्य स्थल का अच्छा वातावरण रखने का प्रावधन किया गया है।
इस कानून की मंजूरी के साथ ही रात की पाली में महिलाओं को मॉल व दुकानों में काम करने की इजाजत दे दी गई, लेकिन इसके साथ महिलाओं की सुरक्षा व उन्हें घर लाने व ले जाने जैसी कई सुविधाएं मुहैया कराने की शर्तें रखी गई हैं।
वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि केंद्र सरकार की तरफ से इस कानून को पारित कर दिया गया है और इसे राज्यों को भेज दिया गया है।
इसे लागू करना राज्य की सरकारों पर निर्भर करता है। सरकार का उद्देश्य अतिरिक्त रोजगार सृजित करना है क्योंकि दुकानें अधिक समय तक खुले रहने पर अधिक श्रमबल की जरूरत पड़ेगी। श्रम मंत्रालय के तरफ से रखे इस प्रस्ताव में विधायी प्रावधानों में समानता लाने के लिए डिजाइन किया गया है जिससे सभी राज्यों के लिए इसे अंगीकार करना आसान होगा और देश भर में समान कामकाजी माहौल सुनिश्चित होगा।
इस कानून के तहत प्रतिष्ठानों को अपनी सुविधा के मुताबिक खोलने व बंद करने का समय तय करने की सुविधा मिलेगी। इस कानून के दायरे में विनिर्माण इकाइयों के अलावा वे सभी प्रतिष्ठान आएंगे जिनमें 10 या अधिक कर्मचारी हैं। यह कानून इन प्रतिष्ठानों को खुलने व बंद करने का समय अपनी सुविधा के अनुसार तय करने तथा साल के 365 दिन परिचालन की अनुमति देता है।
इस कानून में पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था के साथ महिलाओं को रात की पाली में काम पर लगाने की छूट और पेयजल, कैंटीन, प्राथमिक चिकित्सा जैसी सुविधाओं के साथ कार्य स्थल का अच्छा वातावरण रखने का प्रावधन किया गया है।