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7/11 ट्रेन बम धमाके: 'कभी हार न मानें और आगे बढ़ते रहें;' लकवाग्रस्त पीड़ित का संदेश; PM मोदी की सराहना भी की

Tue, 11 Jul 2023 05:37 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: निर्मल कांत Updated Tue, 11 Jul 2023 05:37 PM IST
सार

Mumbai 7/11 Serial Train Blasts: पीड़ित चिराग चौहान ने कहा, 'न्याय में समय लगता है। मुझे किसी से कोई शिकायत नहीं है। मुझे यह भी नहीं पता कि इस मामले में आरोपी कौन हैं... असली अपराधी कौन हैं।'

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Never give up on life and keep moving, says Mumbai 7/11 serial train blasts survivor; lauds PM Modi
ट्रेन धमाकों के पीड़ित चिराग चौहान। - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

आज से ठीक सत्रह साल पहले 11 जुलाई, 2006 को मुंबई की लोकल ट्रेनों में सिलसिलेवार धमाके हुए थे। इनमें 180 से ज्यादा लोगों ने जान गंवा दी थी, जबकि कई लोग घायल हो गए थे। इस भयावह घटना के पीड़ितों में एक चिराग चौहान भी थे। वह तबसे व्हीलचेयर पर हैं। विपरीत परिस्थितियों में भी उन्होंने अपना हौंसला नहीं खोया और मिसाल कायम की। चिराग ने घटना के तीन साल बाद चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) का कोर्स पूरा किया और सफलता हासिल की। 

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चिराग चौहान (37 वर्षीय) कहते हैं, 'हमें रुकना नहीं चाहिए और एक-एक कदम आगे बढ़ते रहना चाहिए।' वह बताते हैं कि वह किसी के प्रति कोई दुर्भावना नहीं रखते हैं, लेकिन केवल यही उम्मीद और प्रार्थना करते हैं कि इस तरह के आतंकवादी हमलों में और निर्दोष लोगों की जान न जाए। चिराग ने यह भी कहा कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आभारी हैं, क्योंकि 2014 के बाद से इस तरह के आतंकी हमलों और बम विस्फोटों की घटनाओं में कमी आई है। 

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शहर की लोकल ट्रेनों की पश्चिमी लाइन पर 15 मिनट के भीतर विभिन्न स्थानों पर सात विस्फोट हुए थे, जिसमें 180 से अधिक लोग मारे गए और कई अन्य घायल हो गए। तब चिराग बीस साल के थे। घटना के समय जब वह घर लौट रहे थे, तब खार और सांताक्रूज स्टेशनों के बीच उनकी ट्रेन में बम विस्फोट हुआ। चौहान को रीढ़ की हड्डी में चोट लगी थी, जिसके कारण वह लकवाग्रस्त हो गए थे और तबसे वह व्हीलचेयर पर निर्भर हैं। 

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वह याद करते हुए कहते हैं, 'मैं उस समय टूट गया था... मेरा परिवार भी... लेकिन हमने फैसला किया कि हम अपने भविष्य को प्रभावित नहीं होने देंगे। मैंने अभी भी अपने पिछले सीजन के ट्रेन पास को संरक्षित रखा है।'  उन्होंने अपनी हालत को बिगड़ने नहीं दिया और उन्होंने 2009 में चार्टर्ड अकाउंटेंसी कोर्स पूरा किया। 2012 में उन्होंने अपना खुद की प्रैक्टिस शुरू की और वर्तमान में कानून में डिग्री कोर्स भी कर रहे हैं।

वह कहते हैं, 'मैं जो संदेश देना चाहता हूं, वह यह है कि जीवन सभी प्रकार की विपत्तियों को हटा देता है। खुशियों का रास्ता सभी के लिए विपत्तियों से प्रशस्त होता है। हम सभी जीवन में कठिन समय का सामना करते हैं, लेकिन हमें रुकना नहीं चाहिए और एक-एक कदम आगे बढ़ते रहना चाहिए, आपको एहसास नहीं होगा कि आप कितनी दूर तक पहुंच गए और जल्द ही आगे बढ़ेंगे।'

उन्होंने कहा कि वह प्रधानमंत्री मोदी के आभारी हैं क्योंकि 2014 के बाद से इस तरह के आतंकी हमलों और बम विस्फोटों की घटनाओं में कमी आई है। चिराग कहते हैं, '2014 तक भारत में विभिन्न स्थानों पर बम विस्फोट नियमित रूप से होते थे। मैं हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभारी हूं क्योंकि 2014 के बाद से आंतरिक सुरक्षा में काफी सुधार हुआ है और आतंकवादी हमलों के कारण शायद ही किसी नागरिक की जान गई है।'

वह कहते हैं, 'जीवन से कभी हार न मानें, चाहे यह कितनी भी कठिन क्यों न हो। बस सामने आई परिस्थिति में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करें और भगवान की इच्छा पर भरोसा करें। जीवन सुंदर है, जीते रहिए, मुस्कराते रहिए।' इस मामले में तेरह लोगों को गिरफ्तार किया गया था। एक विशेष अदालत ने 2015 में 12 लोगों को दोषी ठहराया था, जिनमें से पांच को मौत की सजा सुनाई गई थी और शेष सात को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। एक आरोपी को बरी कर दिया गया। 
 

बंबई उच्च न्यायालय ने मौत की सजा की पुष्टि और दोषियों द्वारा उनकी सजा को चुनौती देने वाली अपीलों पर सुनवाई शुरू नहीं की है। चौहान ने कहा, 'न्याय में समय लगता है। मुझे किसी से कोई शिकायत नहीं है। मुझे यह भी नहीं पता कि इस मामले में आरोपी कौन हैं... असली अपराधी कौन हैं।'

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