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आसमानी बिजली का कहर: न भविष्यवाणी, न चेतावनी यंत्र, चमक के साथ हर साल होती है तीन हजार मौतें
सार
जयपुर के आमेर किले के वॉच टावर पर बिजली गिरने से 23 लोगों की मौत ने केंद्र सरकार को भी झकझोर दिया है। हर साल सैकड़ों लोग इस आसमानी कहर के शिकार हो जाते हैं।
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सांकेतिक चित्र
- फोटो : Agency
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विस्तार
राजस्थान के जयपुर में आसमानी बिजली गिरने से 23 लोग मारे गए हैं और 25 घायल हुए हैं। इस खबर ने सामान्य जन के अलावा केंद्र सरकार तक को हिलाकर रख दिया है। पीएम नरेंद्र मोदी ने मारे गए लोगों के आश्रितों को 'पीएमएनआरएफ' से दो लाख रुपये और घायलों को पचास हजार रुपये देने की घोषणा की है। हर साल करीब तीन हजार लोगों पर आसमानी बिजली का कहर टूटता है। इसकी न कोई भविष्यवाणी होती है और न ही कोई चेतावनी यंत्र पहले से कोई सूचना देता है।
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जयपुर में रविवार को मानसून की पहली बारिश ने तबाही मचा दी। मूसलाधार बरसात के बीच आमेर किले के सामने 500 मीटर ऊंचाई वाले वॉच टावर पर आसमानी बिजली का कहर देखने को मिला। वहां मौजूद 23 लोग मारे गए।
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साल 2019 के दौरान बिहार और मध्यप्रदेश में आसमानी बिजली गिरने से 400-400 लोग मारे गए थे। देश में इस तरह की कुल मौतों का आंकड़ा 2876 रहा है। आसमानी बिजली गिरने से साल 2019 में 2101 पुरुष, 772 महिलाएं और 3 ट्रांसजेंडर मारे गए हैं।
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एनसीआरबी रिपोर्ट के मुताबिक, देश में प्राकृतिक आपदाओं यानी बिजली गिरना, हीट स्ट्रोक और बाढ़ आदि के चलते 2019 में 8145 लोग मारे गए थे। मौतों की संख्या में सबसे ज्यादा प्रतिशत 35.1, आसमानी बिजली गिरने से मारे गए लोगों का है। इसके बाद सूरज की गर्मी से 15.6 प्रतिशत लोग और बाढ़ के चलते मारे गए लोगों का प्रतिशत 11.6 रहा है।
इस तरह की प्राकृतिक आपदाओं में मौतों की आयु के आधार पर समीक्षा करें तो 30-45 साल के 25.3 फीसदी लोग और 45-60 वर्ष के बीच मारे गए लोगों का प्रतिशत 24.9 रहा है। केवल ग्रामीण इलाकों में ही नहीं, बल्कि 53 शहरों में भी प्राकृतिक आपदा के कारण 418 (5.1%) लोगों को अपनी जान खोनी पड़ी है।
पिछले पांच साल में प्राकृतिक आपदा में मौतें
साल मौतें
2015 10510
2016 8684
2017 7143
2018 6891
2019 8145
टॉप-10 राज्य: 2019 में प्राकृतिक आपदा में मौतें
बिहार 1521
ओडिशा 1466
उत्तर प्रदेश 792
मध्यप्रदेश 627
महाराष्ट्र 573
झारखंड 556
पश्चिम बंगाल 376
आंध्रप्रदेश 257
तेलंगाना 252
पंजाब 240
2019 में बिजली गिरने से मौतें
राज्य मौतें
बिहार 400
मध्यप्रदेश 400
झारखंड 334
उत्तरप्रदेश 321
ओडिशा 271
छत्तीसगढ़ 212
महाराष्ट्र 189
पश्चिम बंगाल 147
आंध्रप्रदेश 109
राजस्थान 88
मछुआरों के लिए बना सिस्टम, आम लोगों के लिए नहीं
साल 2018 में एनडीएमए द्वारा यह दावा किया गया था कि प्राकृतिक आपदाओं जैसे, बरसात, बिजली गिरना, हीट वेव और बाढ़ आदि की सूचना संबंधित इलाके के लोगों को कुछ देर पहले ही मिल जाएगी। यह भी कहा गया कि इस बाबत दूर संचार विभाग के साथ बातचीत चल रही है। वहां से मैसेज सिस्टम के जरिए लोगों को प्राकृतिक ताकतों की हरकत के बारे में सूचित किया जा सकता है। मछुआरों के लिए ऐसा सिस्टम आया है, लेकिन आम लोगों के लिए ऐसा कुछ नहीं है। नतीजा, हर साल आठ-नौ हजार लोग प्राकृतिक ताकतों के कहर से मारे जाते हैं।
गृह राज्यमंत्री ने 2020 में लोकसभा में यह कहा था
केंद्रीय गृह मंत्रालय में राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने सितंबर 2020 के दौरान लोकसभा में पूछे गए एक सवाल के जवाब में कहा था, प्राकृतिक आपदाओं के प्रभावशाली प्रबंधन के लिए केंद्र और राज्य सरकारों की संबंधित एजेंसियों के बीच समन्वय के लिए देश में राष्ट्रीय, राज्य एवं जिला स्तर पर संस्थागत तंत्र मौजूद है। केंद्र सरकार ने एक सशक्त पूर्व चेतावनी प्रणाली स्थापित की है। मौसम संबंधी भविष्यवाणी की सटीकता में काफी वृद्धि हुई है। भविष्यवाणी करने वाली एजेंसियां चेतावनी और सूचना प्रसारण प्रणालियों में सुधार करने के लिए लगातार अपने भरसक प्रयास कर रही हैं।