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NEET: नीट में धांधली के दावों को लेकर डीएमके ने NTA को बताया दोषी, भाजपा पर लगाया मूकदर्शक बनने का आरोप

Sat, 15 Jun 2024 03:31 PM IST
मेघा झा न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: मेघा झा Updated Sat, 15 Jun 2024 03:31 PM IST
सार

नीट परीक्षा को लेकर लगातार राजनीतिक पार्टी भाजपा नीत एनडीए सरकार और पीएम मोदी पर निशाना साध रही हैं। अब तमिलनाडु की सत्तारूढ़ डीएमके ने शनिवार को नीट की पवित्रता खराब करने का आरोप एनटीए पर लगाया, साथ ही भाजपा पर करोड़ों की कमाई करने वाले कोचिंग सेंटरों का समर्थन करने का आरोप लगाया है।

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NEET: DMK blamed NTA for claims of rigging in NEET, accused BJP of being a mute spectator
डीएमके अध्यक्ष एमके स्टालिन - फोटो : डीएमके पार्टी वेबसाइट

विस्तार

नीट परीक्षा को लेकर लगातार राजनीतिक पार्टी भाजपा नीत एनडीए सरकार और पीएम मोदी पर निशाना साध रही हैं। अब तमिलनाडु की सत्तारूढ़ डीएमके ने शनिवार को नीट की पवित्रता खराब करने का आरोप लगाया, साथ ही करोड़ों की कमाई करने वाले कोचिंग सेंटरों का समर्थन करने का आरोप लगाया है।
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5 मई को नीट यूजी परीक्षा आयोजित हुई। आयोजन वाले दिन से ही इसपर पेपर लीक के आरोप लगने लगे। वहीं, इस बार परीक्षा में 67 ऐसे छात्र हैं, जिन्होंने 720 में से 720 अंक लाकर पहला स्थान हासिल किया है। 67 बच्चों में से 6 बच्चे ऐसे हैं जिन्होंने एक ही सेंटर पर परीक्षा दी है, जो कि हरियाणा के झज्जर में है। 1,500 से अधिक बच्चों को ग्रेस मार्क्स दिए गए। कहा गया कि छह केंद्रों पर परीक्षा में देरी के कारण हुई समय की बर्बादी की भरपाई के लिए ग्रेस मार्क्स दिए गए थे। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के बाद ये मार्क्स वापस ले लिए गए और इन छात्रों के लिए पुनःपरीक्षा कराई जाएगी।
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इस परीक्षा में कुछ बच्चों के नंबर 718 और 719 आए हैं, जो परीक्षा की मार्किंग स्कीम के लिहाज से गणितीय रूप से संभव नहीं हैं। छात्रों का आरोप है कि कई छात्रों के अंकों को मनमाने ढंग से घटाया या बढ़ाया गया है, जिसका असर उनकी रैंक पर हुआ है।
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वहीं एनटीए का कहना है कि जिन कोचिंग संस्थानों के छात्रों ने नीट यूजी 2024 परीक्षा में खराब प्रदर्शन किया है, वे ही आरोप लगाने में सबसे आगे हैं, क्योंकि परीक्षा अपेक्षाकृत आसान होने के बावजूद वे अपने छात्र समूहों के बीच अपनी छवि खो चुके हैं। एनटीए का कहना है कि अगर वास्तव में कोई समस्या थी, तो अन्य कोचिंग संस्थान चुप क्यों हैं?

इसके बाद तमिलनाडु की सत्तारुढ़ डीएमके ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी पर नीट की पवित्रता को खराब करने का आरोप लगाया। डीएमके ने एक बार फिर राष्ट्रीय परीक्षा को खत्म करने की मांग की और कहा कि इससे ही शिक्षा क्षेत्र की पवित्रता की रक्षा होगी। कुछ दिन पहले केंद्र द्वारा सुप्रीम कोर्ट को यह बताए जाने का जिक्र करते हुए कि 1,563 छात्रों के ग्रेस मार्क्स रद्द कर दिए जाएंगे, डीएमके के तमिल मुखपत्र 'मुरासोली' ने कहा कि अगर मामला सुप्रीम कोर्ट में नहीं जाता तो भाजपा सरकार ऐसा नहीं करती।

एक मीडिया रिपोर्ट में कहा गया कि नीट के आयोजन में अब तक 'गुप्त' रूप से हुई अनियमितताएं और घोटाले इस साल 'खुलेआम' सामने आए। इसे छिपाने के लिए ही 14 जून को जारी होने वाले परीक्षा परिणाम को 4 जून को जारी कर दिया गया, जब लोकसभा चुनाव के परिणाम घोषित किए गए। हालांकि, घोटाला उजागर हो गया। "हमने ग्रेस मार्क्स के बारे में सुना है, यह एक या दो अंक होंगे। लेकिन, 70 और 80 अंकों को ग्रेस मार्क्स कैसे कहा जा सकता है? एनटीए ने पूरे अंक दिए और यह राष्ट्रीय अन्याय है।" भाजपा सरकार कोचिंग सेंटरों की 'चाकरी' करती रही, जो हर महीने करोड़ों कमाते थे और इसने शिक्षा क्षेत्र में भी 'कॉरपोरेट का राज' स्थापित किया।

बता दें कि शुरूआत से ही तमिलनाडु और डीएमके सहित प्रमुख राजनीतिक दल एनईईटी का विरोध कर रहे हैं। विधानसभा ने राज्य को परीक्षा के दायरे से छूट देने के लिए एक विधेयक पारित किया और इसे राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए केंद्र को भेजा गया। उन्होंने बताया कि "हमने (राज्य ने) एनईईटी को खत्म करने या तमिलनाडु को परीक्षा से छूट देने का अनुरोध किया है।" हालांकि, भाजपा सरकार ने कट्टर विरोध को केवल राजनीतिक बताकर खारिज कर दिया।

वहीं नीट की धांधली से प्रभावित छात्रों ने 5 मई, 2024 को होने वाली राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा को रद्द करने की याचिका के साथ शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया। अनियमितताओं को रोकने के लिए कड़े कदम उठाने की मांग की। यहां तक कि "सुप्रीम कोर्ट ने खुद कहा कि नीट-यूजी की पवित्रता प्रभावित हुई है।


'पवित्रता को किसने बिगाड़ा? यह राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी थी और केंद्र की भाजपा सरकार मूकदर्शक बनी रही।" कुल मिलाकर, नीट को खत्म करना ही इस समस्या का स्थायी और उचित समाधान होगा और तभी शिक्षा क्षेत्र की पवित्रता की रक्षा होगी। वहीं एनटीए और केंद्र की ओर से एक ही वकील शीर्ष अदालत के समक्ष पेश हुए। वकील ने बताया कि एजेंसी और केंद्र सरकार के बीच किसी भी तरह के रुख में कोई अंतर नहीं है।
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