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आपराधिक अपील के जल्द निपटारे को प्रभावी कदम की जरूरत: सुप्रीम कोर्ट

Wed, 07 Feb 2018 03:44 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 07 Feb 2018 03:44 AM IST
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Needing to take effective steps for early disposal of criminal appeal says Supreme Court
सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आपराधिक अपील को जल्द निपटारे के लिए प्रभावी कदम उठाने की जरूरत है। शीर्ष अदालत ने कहा कि सामान्य अपराधों का निपटारा एक तय समय सीमा के भीतर होना चाहिए। न्यायमूर्ति जे चेलमेश्वर और न्यायमूर्ति संजय किशन कौल की पीठ ने कहा कि आपराधिक मामले दशकों तक लंबित नहीं रहने चाहिए क्योंकि इस वजह से आरोपी लंबे समय तक जेल में रहते हैं। लिहाजा ऐसे मामलों के जल्द निपटारे केलिए प्रभावी कदम उठाने की दरकार है। पीठ ने कहा कि हम समझ सकते है कि इसमें कुछ व्यावहारिक परेशानी आ सकती है लेकिन इसे लेकर प्रभावी कदम उठाना ही पड़ेगा। 

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पीठ ने पाया कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सबसे पुराना लंबित आपराधिक अपील 46 वर्ष पुराना है। मालूम हो कि सुप्रीम कोर्ट ने पिछली सुनवाई में इलाहाबाद हाईकोर्ट में 1980 से लंबित पड़े आपराधिक मामलों और मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 1994 से अब तक लंबित पड़े 70 हजार मामलों पर सुप्रीम कोर्ट ने दुख व्यक्त किया है। शीर्ष अदालत ने कहा था कि इस विकट परिस्थिति बताते हुए कहा कि इस संबंध में कुछ करना ही होगा। इस मामले में वरिष्ठ वकील एमएन राव को अमाइकस क्यूरी नियुक्त किया गया है।
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मंगलवार को एमएन राव ने बताया कि वर्षों से लंबित मामलों के निपटारे के लिए तंत्र विकसित नहीं है। उन्होंने कहा कि साल दर साल एक मामले की सुनवाई होती है। एक के बाद एक जज सुनवाई करते हैं। वे निपटारा नहीं करते। यह भी परेशानी है। इस पर पीठ ने कहा कि बात यह भी है कि एक वकील के बाद एक वकील बहस करते हैं। वे भी मामलों का निटपारे में दिलचस्पी नहीं लेते। वहीं पीठ के दूसरे सदस्य न्यायमूर्ति संजय किशन कौल ने कहा कि वैसे अपराध जिनमें सात वर्ष से कम की सजा का प्रावधान है, उनका निपटारा एक तय समय सीमा के भीतर होना चाहिए। 
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ये टिप्पणी करते हुए पीठ ने लंबे समय से जेल में बंद दो आरोपियों को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया। आरोपियों की ओर से पेश वकील दुष्यंत पराशर ने पीठ को बताया कि उनके मुवक्किल 16 वर्षों से जेल में है और इलाहाबाद हाईकोर्ट में दायर अपील के निपटारे का इंतजार कर रहे हैं। अमाइकस क्यूरी ने बताया कि इलाहाबाद हाईकोर्ट से दूसरी रिपोर्ट आनी बाकी है। जिसके बाद पीठ ने सुनवाई चार हफ्ते के लिए टाल दी।

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