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70 Years Of BMS: मोहन भागवत बोले- नई तकनीकों का समाज और मजदूरों पर क्या असर पड़ेगा, इसका मूल्यांकन जरूरी
Wed, 23 Jul 2025 09:32 PM IST
पवन पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: पवन पांडेय
Updated Wed, 23 Jul 2025 09:32 PM IST
सार
आरएसएस चीफ मोहन भागवत ने तकनीक से रोजगार पर पड़ने वाले असर को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने कहा, तकनीक को रोका नहीं जा सकता लेकिन उसका सही उपयोग जरूरी है।इसके साथ उन्होंने असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को शोषण से बचाने पर जोर दिया। वहीं बीएमस की 70वीं वर्षगांठ पर उन्होंने कहा- यह एक आंदोलन है, केवल संगठन नहीं।
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मोहन भागवत भारतीय मजदूर संघ की स्थापना की 70वीं वर्षगांठ के समापन समारोह में शामिल
- फोटो : ANI
विस्तार
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने बुधवार को कहा कि उभरती हुई तकनीकों का समाज और मजदूर बाजार पर क्या असर होगा, इसका मूल्यांकन किया जाना चाहिए ताकि ये नई तकनीकें रोजगार के अवसरों को नुकसान न पहुंचाएं। वे दिल्ली में भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) की स्थापना के 70 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में बोल रहे थे। इस कार्यक्रम में केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया समेत कई मजदूर संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए। तकनीक को ठुकराया नहीं जा सकता, लेकिन उसका असर देखना जरूरी
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'तकनीक को ठुकराया नहीं जा सकता'
मोहन भागवत ने कहा, 'नई तकनीकें आ रही हैं… और जब नई तकनीक आती है, तो कई नए सवाल खड़े होते हैं। क्या इससे बेरोजगारी कम होगी या बढ़ेगी?' उन्होंने स्पष्ट रूप से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) जैसी तकनीकों को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि तकनीक इंसान के स्वभाव को थोड़ा कठोर बना देती है और इससे श्रम के प्रति सम्मान भी कुछ हद तक कम होता है। आरएसएस प्रमुख ने कहा, 'तकनीक को ठुकराया नहीं जा सकता। नई तकनीक तो आएगी ही। लेकिन हमें यह देखना होगा कि उसका मजदूरों पर बुरा असर न पड़े।'
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'सुख लाने वाली हो तकनीक, समस्या नहीं'
मोहन भागवत ने कहा कि तकनीकों का इस्तेमाल ऐसा होना चाहिए जिससे समाज में सुख और संतुलन आए, न कि नई समस्याएं पैदा हों। उन्होंने कहा, इस पर हमें सोचने और काम करने की जरूरत है।
असंगठित क्षेत्र को प्राथमिकता देने की मांग
मोहन भागवत ने यह भी कहा कि असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले मजदूरों को भी ध्यान में रखना चाहिए ताकि वे अपने नियोक्ताओं से किसी तरह का शोषण न झेलें। उन्होंने कहा, 'असंगठित क्षेत्र बहुत विशाल है और संगठित क्षेत्र के भीतर भी कई लोग अब भी असंगठित हैं… सभी क्षेत्रों में मज़दूरों को न्याय और सम्मान दिलाने के लिए काम करना होगा।'
बीएमएस की यात्रा को बताया प्रेरणादायक
मोहन भागवत ने भारतीय मजदूर संघ की 70 साल की यात्रा को प्रेरणादायक बताया। उन्होंने कहा, 'जब दत्तोपंत ठेंगड़ी जी ने 1955 में बीएमसी की स्थापना की थी, तब यह बहुत छोटा संगठन था और कई लोग इसका मजाक उड़ाते थे। लेकिन आज यह दुनिया का सबसे बड़ा मजदूर संगठन बन चुका है।' उन्होंने कहा कि बीएमएस के कार्यकर्ताओं की मेहनत और सिद्धांतों की वजह से ही आज यह संगठन इस मुकाम पर पहुंचा है।
यह भी पढ़ें - ED: घर खरीदारों से धोखाधड़ी और जालसाजी कर एकत्रित किए थे 1000 करोड़, सात साल बाद गिरफ्त में आए तीनों भगोड़े
'हम धर्म की बात करते हैं, न कि मजहब की'
मोहन भागवत ने कहा, 'हम धर्म की बात करते हैं, मजहब की नहीं। धर्म वह है जो समाज को जोड़ता है, ऊपर उठाता है और सबको हर समय सुख देता है।' उन्होंने कहा कि बीएमएस का यह 70वां वर्ष सिर्फ उत्सव का नहीं, बल्कि आत्ममंथन का भी समय है- कि संगठन ने कैसे शुरुआत की, क्या हासिल किया और आगे क्या करना है।
मजदूर ही देश की तरक्की की रीढ़- मंडाविया
कार्यक्रम में मौजूद केंद्रीय मंत्री मनसुख मंडाविया ने कहा कि हर ट्रेड यूनियन की कार्यशैली उसकी विचारधारा के अनुरूप होती है, लेकिन बीएमएस ने भारतीय जीवनशैली के आधार पर अपनी कार्य संस्कृति बनाई है, जो सरकार के साथ श्रमिकों के मुद्दों पर चर्चा में दिखती है। उन्होंने कहा, 'देश की सड़कों, पुलों और दूसरी बुनियादी संरचनाओं को बनाने वाले यही मजदूर हैं। यही शक्ति देश की प्रगति और आर्थिक विकास को चला रही है।'
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'तकनीक को ठुकराया नहीं जा सकता'
मोहन भागवत ने कहा, 'नई तकनीकें आ रही हैं… और जब नई तकनीक आती है, तो कई नए सवाल खड़े होते हैं। क्या इससे बेरोजगारी कम होगी या बढ़ेगी?' उन्होंने स्पष्ट रूप से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) जैसी तकनीकों को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि तकनीक इंसान के स्वभाव को थोड़ा कठोर बना देती है और इससे श्रम के प्रति सम्मान भी कुछ हद तक कम होता है। आरएसएस प्रमुख ने कहा, 'तकनीक को ठुकराया नहीं जा सकता। नई तकनीक तो आएगी ही। लेकिन हमें यह देखना होगा कि उसका मजदूरों पर बुरा असर न पड़े।'
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'सुख लाने वाली हो तकनीक, समस्या नहीं'
मोहन भागवत ने कहा कि तकनीकों का इस्तेमाल ऐसा होना चाहिए जिससे समाज में सुख और संतुलन आए, न कि नई समस्याएं पैदा हों। उन्होंने कहा, इस पर हमें सोचने और काम करने की जरूरत है।
असंगठित क्षेत्र को प्राथमिकता देने की मांग
मोहन भागवत ने यह भी कहा कि असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले मजदूरों को भी ध्यान में रखना चाहिए ताकि वे अपने नियोक्ताओं से किसी तरह का शोषण न झेलें। उन्होंने कहा, 'असंगठित क्षेत्र बहुत विशाल है और संगठित क्षेत्र के भीतर भी कई लोग अब भी असंगठित हैं… सभी क्षेत्रों में मज़दूरों को न्याय और सम्मान दिलाने के लिए काम करना होगा।'
बीएमएस की यात्रा को बताया प्रेरणादायक
मोहन भागवत ने भारतीय मजदूर संघ की 70 साल की यात्रा को प्रेरणादायक बताया। उन्होंने कहा, 'जब दत्तोपंत ठेंगड़ी जी ने 1955 में बीएमसी की स्थापना की थी, तब यह बहुत छोटा संगठन था और कई लोग इसका मजाक उड़ाते थे। लेकिन आज यह दुनिया का सबसे बड़ा मजदूर संगठन बन चुका है।' उन्होंने कहा कि बीएमएस के कार्यकर्ताओं की मेहनत और सिद्धांतों की वजह से ही आज यह संगठन इस मुकाम पर पहुंचा है।
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'हम धर्म की बात करते हैं, न कि मजहब की'
मोहन भागवत ने कहा, 'हम धर्म की बात करते हैं, मजहब की नहीं। धर्म वह है जो समाज को जोड़ता है, ऊपर उठाता है और सबको हर समय सुख देता है।' उन्होंने कहा कि बीएमएस का यह 70वां वर्ष सिर्फ उत्सव का नहीं, बल्कि आत्ममंथन का भी समय है- कि संगठन ने कैसे शुरुआत की, क्या हासिल किया और आगे क्या करना है।
मजदूर ही देश की तरक्की की रीढ़- मंडाविया
कार्यक्रम में मौजूद केंद्रीय मंत्री मनसुख मंडाविया ने कहा कि हर ट्रेड यूनियन की कार्यशैली उसकी विचारधारा के अनुरूप होती है, लेकिन बीएमएस ने भारतीय जीवनशैली के आधार पर अपनी कार्य संस्कृति बनाई है, जो सरकार के साथ श्रमिकों के मुद्दों पर चर्चा में दिखती है। उन्होंने कहा, 'देश की सड़कों, पुलों और दूसरी बुनियादी संरचनाओं को बनाने वाले यही मजदूर हैं। यही शक्ति देश की प्रगति और आर्थिक विकास को चला रही है।'