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NCPCR: संबंध बनाने में सहमति की उम्र घटाने को आयोग ने बताया टाइम बम; डॉक्टर, मनोवैज्ञानिकों ने किया विरोध
Thu, 28 Aug 2025 11:13 PM IST
पवन पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: पवन पांडेय
Updated Thu, 28 Aug 2025 11:13 PM IST
सार
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्य प्रियांक कानूनगो ने संबंध बनाने के लिए सहमति की उम्र घटाने के प्रयास को टाइम बम बताया है। उन्होंने कहा, इस टाइम बम को निष्क्रिय करना जरूरी है। मैं पिछले एक दशक से बच्चों के साथ काम कर रहा हूं।
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प्रियांक कानूनगो, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्य
- फोटो : X @NCPCR_
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विस्तार
संबंध बनाने के लिए सहमति की उम्र 18 से घटाकर 16 करने के प्रयासों का कई डॉक्टर, मनोवैज्ञानिक, अधिकार कार्यकर्ताओं और वकीलों ने विरोध किया। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्य प्रियांक कानूनगो ने इस कदम को एक टाइम बम करार दिया। उन्होंने कहा कि अगर इसे निष्क्रिय नहीं किया गया, तो यह परिवारों में फट जाएगा। सभ्यता पर अतिक्रमण: सहमति की उम्र कम करना - इसके प्रभाव का विश्लेषण शीर्षक से आयोजित गोलमेज सम्मेलन में, प्रियांक कानूनगो ने सहमति की उम्र कम करने के प्रति आगाह किया। उन्होंने कहा, इस टाइम बम को निष्क्रिय करना जरूरी है। मैं पिछले एक दशक से बच्चों के साथ काम कर रहा हूं।
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'छात्रों के आत्महत्या का मामला देश के लिए चुनौती'
10वीं और 12वीं कक्षा के परीक्षा परिणाम वाले दिन छात्रों के आत्महत्या करने का मामला अभी भी देश के लिए एक चुनौती है। 10वीं कक्षा की परीक्षा देने वाले छात्र की उम्र लगभग 16 वर्ष है और 12वीं कक्षा की परीक्षा देने वाले छात्रों की उम्र 18 वर्ष से कम है। विशेषज्ञों का कहना है कि लोग ऐसे बच्चों से बात नहीं कर रहे हैं। बच्चे अवसाद में चले गए हैं, वे दबाव में हैं और आत्महत्या कर रहे हैं।
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'हमने आत्महत्या के कारण उन हजारों छात्रों को खो दिया'
प्रियांक कानूनगो ने कहा, बातचीत जरूरी है क्योंकि परिवार वाले बात करने को तैयार नहीं हैं। हमने आत्महत्या के कारण उन हजारों छात्रों को खो दिया, जो देश का भविष्य थे। उन्होंने कहा, ऐसे देश में हम युवाओं को 16 साल की उम्र में यौन संबंध बनाने की अनुमति कैसे दे सकते हैं। कई डॉक्टरों ने तर्क दिया कि 16 साल की उम्र में, मानव मस्तिष्क स्वस्थ यौन संबंधों से संबंधित निर्णय लेने या उसके मनोवैज्ञानिक प्रभावों का सामना करने के लिए पर्याप्त परिपक्व नहीं होता है। ऐसी लड़कियों के लिए किशोरावस्था में गर्भधारण और सहवर्ती स्वास्थ्य खतरों का भी खतरा होता है।
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वकील इंदिरा जयसिंह ने सुप्रीम कोर्ट से किया है उम्र घटाने का आग्रह
न्यायमित्र और वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह ने सुप्रीम कोर्ट से सहमति की वैधानिक उम्र 18 से घटाकर 16 वर्ष करने का आग्रह किया है। निपुण सक्सेना बनाम भारत सरकार मामले में शीर्ष अदालत की मदद कर रहीं इंदिरा जयसिंह ने हाल ही में लिखित दलीलें दायर कर 16 से 18 वर्ष की आयु के किशोरों के साथ यौन गतिविधियों को यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम (पॉक्सो) और भारतीय दंड संहिता की धारा 375 के तहत पूरी तरह से अपराध घोषित करने के फैसले को चुनौती दी है। उन्होंने तर्क दिया कि मौजूदा कानून किशोरों के बीच सहमति से बनाए गए रोमांटिक संबंधों को अपराध मानता है और उनके सांविधानिक अधिकारों का उल्लंघन करता है।
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'छात्रों के आत्महत्या का मामला देश के लिए चुनौती'
10वीं और 12वीं कक्षा के परीक्षा परिणाम वाले दिन छात्रों के आत्महत्या करने का मामला अभी भी देश के लिए एक चुनौती है। 10वीं कक्षा की परीक्षा देने वाले छात्र की उम्र लगभग 16 वर्ष है और 12वीं कक्षा की परीक्षा देने वाले छात्रों की उम्र 18 वर्ष से कम है। विशेषज्ञों का कहना है कि लोग ऐसे बच्चों से बात नहीं कर रहे हैं। बच्चे अवसाद में चले गए हैं, वे दबाव में हैं और आत्महत्या कर रहे हैं।
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'हमने आत्महत्या के कारण उन हजारों छात्रों को खो दिया'
प्रियांक कानूनगो ने कहा, बातचीत जरूरी है क्योंकि परिवार वाले बात करने को तैयार नहीं हैं। हमने आत्महत्या के कारण उन हजारों छात्रों को खो दिया, जो देश का भविष्य थे। उन्होंने कहा, ऐसे देश में हम युवाओं को 16 साल की उम्र में यौन संबंध बनाने की अनुमति कैसे दे सकते हैं। कई डॉक्टरों ने तर्क दिया कि 16 साल की उम्र में, मानव मस्तिष्क स्वस्थ यौन संबंधों से संबंधित निर्णय लेने या उसके मनोवैज्ञानिक प्रभावों का सामना करने के लिए पर्याप्त परिपक्व नहीं होता है। ऐसी लड़कियों के लिए किशोरावस्था में गर्भधारण और सहवर्ती स्वास्थ्य खतरों का भी खतरा होता है।
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वकील इंदिरा जयसिंह ने सुप्रीम कोर्ट से किया है उम्र घटाने का आग्रह
न्यायमित्र और वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह ने सुप्रीम कोर्ट से सहमति की वैधानिक उम्र 18 से घटाकर 16 वर्ष करने का आग्रह किया है। निपुण सक्सेना बनाम भारत सरकार मामले में शीर्ष अदालत की मदद कर रहीं इंदिरा जयसिंह ने हाल ही में लिखित दलीलें दायर कर 16 से 18 वर्ष की आयु के किशोरों के साथ यौन गतिविधियों को यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम (पॉक्सो) और भारतीय दंड संहिता की धारा 375 के तहत पूरी तरह से अपराध घोषित करने के फैसले को चुनौती दी है। उन्होंने तर्क दिया कि मौजूदा कानून किशोरों के बीच सहमति से बनाए गए रोमांटिक संबंधों को अपराध मानता है और उनके सांविधानिक अधिकारों का उल्लंघन करता है।