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महाराष्ट्र: पीएम मोदी पर टिप्पणी मामले में राहुल गांधी को हाईकोर्ट से झटका, 2019 का समन रद्द करने से इनकार
Tue, 08 Sep 2026 01:22 PM IST
पवन पांडेय
पीटीआई, मुंबई
पीटीआई, मुंबई
Published by: पवन पांडेय
Updated Tue, 08 Sep 2026 01:22 PM IST
सार
राफेल सौदे को लेकर 2018 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर टिप्पणी के मामले में राहुल गांधी को बॉम्बे हाईकोर्ट से झटका लगा है। कोर्ट ने 2019 में मजिस्ट्रेट द्वारा जारी समन को रद्द करने से इनकार कर दिया। न्यायमूर्ति एन आर बोरकर ने कहा कि मजिस्ट्रेट के आदेश में कोई कानूनी गलती या अनियमितता नहीं है। हालांकि, 2021 के आदेश के तहत मानहानि मामले की सुनवाई छह सप्ताह तक टली रहेगी, ताकि राहुल गांधी सुप्रीम कोर्ट में अपील कर सकें।
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राहुल गांधी को हाईकोर्ट से झटका
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ 2018 में की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणी से जुड़े मानहानि मामले में कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को बॉम्बे हाईकोर्ट से झटका लगा है। हाईकोर्ट ने 2019 में मजिस्ट्रेट अदालत की ओर से राहुल गांधी के खिलाफ जारी किए गए समन को रद्द करने से इनकार कर दिया है। न्यायमूर्ति एन आर बोरकर की एकल पीठ ने राहुल गांधी की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने गिरगांव मजिस्ट्रेट की ओर से 28 अगस्त 2019 को जारी आदेश को चुनौती दी थी। इस आदेश के तहत उनके खिलाफ मानहानि की शिकायत पर कानूनी प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए गए थे।
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कोर्ट को आदेश में नहीं मिली कोई खामी
हाईकोर्ट ने कहा कि उसे मजिस्ट्रेट की ओर से दिए गए आदेश में ऐसी कोई ‘कानूनी गलती या विकृति’ नहीं मिली, जिसके आधार पर अदालत को हस्तक्षेप करना चाहिए। न्यायमूर्ति बोरकर ने कहा कि आदेश में कोई खामी नहीं है और इसलिए राहुल गांधी की याचिका खारिज की जाती है। हालांकि, हाईकोर्ट ने अपने नवंबर 2021 के उस आदेश को जारी रखा, जिसमें मजिस्ट्रेट अदालत को मानहानि की शिकायत पर सुनवाई छह सप्ताह के लिए टालने का निर्देश दिया गया था। इस दौरान राहुल गांधी को मामले में राहत के लिए सुप्रीम कोर्ट जाने का रास्ता खुला रहेगा।
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क्या है पूरा मामला?
यह मानहानि का मामला 2018 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ राहुल गांधी की एक टिप्पणी से जुड़ा है। राहुल गांधी ने राफेल लड़ाकू विमान सौदे को लेकर पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए उन्हें ‘कमांडर-इन-थीफ’ यानी ‘चोरों का सरदार’ कहा था। शिकायतकर्ता एम एच श्रीश्रीमल ने राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि की शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायतकर्ता ने खुद को सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का सदस्य बताया था। शिकायत के मुताबिक, राहुल गांधी ने सितंबर 2018 में राजस्थान में एक सार्वजनिक सभा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ यह टिप्पणी की थी। आरोप है कि उन्होंने बाद में अपने निजी एक्स (पूर्व में ट्विटर) अकाउंट पर एक वीडियो भी पोस्ट किया, जिसमें प्रधानमंत्री के लिए इसी तरह के शब्दों का इस्तेमाल किया गया था।
शिकायतकर्ता ने क्या आरोप लगाया?
श्रीश्रीमल का कहना था कि राहुल गांधी की टिप्पणियां सिर्फ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक सीमित नहीं थीं, बल्कि इससे भाजपा के सदस्यों और प्रधानमंत्री से जुड़े भारतीय नागरिकों की भी बदनामी हुई। उन्होंने राहुल गांधी के बयान को सीधे तौर पर चोरी का आरोप लगाने वाला बताया था। शिकायतकर्ता ने हाईकोर्ट में राहुल गांधी की याचिका का विरोध भी किया।
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राहुल गांधी की ओर से क्या दलील दी गई?
राहुल गांधी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सुदीप पसबोला और अधिवक्ता कुशल मोर ने अदालत में दलील दी कि यह शिकायत निराधार और तुच्छ है। उनका कहना था कि शिकायतकर्ता खुद इस कथित टिप्पणी से सीधे तौर पर प्रभावित या पीड़ित व्यक्ति नहीं हैं। राहुल गांधी के वकीलों ने यह भी तर्क दिया कि शिकायतकर्ता के पास इस तरह की मानहानि की शिकायत दाखिल करने का वैधानिक आधार नहीं है। हालांकि, हाईकोर्ट ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया और मजिस्ट्रेट के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए राहुल गांधी की याचिका खारिज कर दी।
मामले में अब आगे क्या होगा?
हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद 2019 में जारी समन फिलहाल बरकरार रहेगा। हालांकि, 2021 में दिए गए हाईकोर्ट के आदेश के कारण मजिस्ट्रेट अदालत में शिकायत की सुनवाई छह सप्ताह तक स्थगित रहेगी, ताकि राहुल गांधी इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख कर सकें।
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कोर्ट को आदेश में नहीं मिली कोई खामी
हाईकोर्ट ने कहा कि उसे मजिस्ट्रेट की ओर से दिए गए आदेश में ऐसी कोई ‘कानूनी गलती या विकृति’ नहीं मिली, जिसके आधार पर अदालत को हस्तक्षेप करना चाहिए। न्यायमूर्ति बोरकर ने कहा कि आदेश में कोई खामी नहीं है और इसलिए राहुल गांधी की याचिका खारिज की जाती है। हालांकि, हाईकोर्ट ने अपने नवंबर 2021 के उस आदेश को जारी रखा, जिसमें मजिस्ट्रेट अदालत को मानहानि की शिकायत पर सुनवाई छह सप्ताह के लिए टालने का निर्देश दिया गया था। इस दौरान राहुल गांधी को मामले में राहत के लिए सुप्रीम कोर्ट जाने का रास्ता खुला रहेगा।
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क्या है पूरा मामला?
यह मानहानि का मामला 2018 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ राहुल गांधी की एक टिप्पणी से जुड़ा है। राहुल गांधी ने राफेल लड़ाकू विमान सौदे को लेकर पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए उन्हें ‘कमांडर-इन-थीफ’ यानी ‘चोरों का सरदार’ कहा था। शिकायतकर्ता एम एच श्रीश्रीमल ने राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि की शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायतकर्ता ने खुद को सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का सदस्य बताया था। शिकायत के मुताबिक, राहुल गांधी ने सितंबर 2018 में राजस्थान में एक सार्वजनिक सभा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ यह टिप्पणी की थी। आरोप है कि उन्होंने बाद में अपने निजी एक्स (पूर्व में ट्विटर) अकाउंट पर एक वीडियो भी पोस्ट किया, जिसमें प्रधानमंत्री के लिए इसी तरह के शब्दों का इस्तेमाल किया गया था।
शिकायतकर्ता ने क्या आरोप लगाया?
श्रीश्रीमल का कहना था कि राहुल गांधी की टिप्पणियां सिर्फ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक सीमित नहीं थीं, बल्कि इससे भाजपा के सदस्यों और प्रधानमंत्री से जुड़े भारतीय नागरिकों की भी बदनामी हुई। उन्होंने राहुल गांधी के बयान को सीधे तौर पर चोरी का आरोप लगाने वाला बताया था। शिकायतकर्ता ने हाईकोर्ट में राहुल गांधी की याचिका का विरोध भी किया।
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राहुल गांधी की ओर से क्या दलील दी गई?
राहुल गांधी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सुदीप पसबोला और अधिवक्ता कुशल मोर ने अदालत में दलील दी कि यह शिकायत निराधार और तुच्छ है। उनका कहना था कि शिकायतकर्ता खुद इस कथित टिप्पणी से सीधे तौर पर प्रभावित या पीड़ित व्यक्ति नहीं हैं। राहुल गांधी के वकीलों ने यह भी तर्क दिया कि शिकायतकर्ता के पास इस तरह की मानहानि की शिकायत दाखिल करने का वैधानिक आधार नहीं है। हालांकि, हाईकोर्ट ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया और मजिस्ट्रेट के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए राहुल गांधी की याचिका खारिज कर दी।
मामले में अब आगे क्या होगा?
हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद 2019 में जारी समन फिलहाल बरकरार रहेगा। हालांकि, 2021 में दिए गए हाईकोर्ट के आदेश के कारण मजिस्ट्रेट अदालत में शिकायत की सुनवाई छह सप्ताह तक स्थगित रहेगी, ताकि राहुल गांधी इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख कर सकें।