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राकांपा ने कहा-एक आदर्श कानून और तीन नए कृषि कानूनों का फर्क समझें पीएम
Mon, 08 Feb 2021 11:07 PM IST
प्रियंका तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: प्रियंका तिवारी
Updated Mon, 08 Feb 2021 11:07 PM IST
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
- फोटो : ANI
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राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) ने सोमवार को तीन नए कृषि कानूनों पर प्रधानमंत्री मोदी के राज्यसभा में बयान पर प्रतिक्रिया दी है। राकांपा के प्रवक्ता और महाराष्ट्र के अल्पसंख्यक मामले मंत्री नवाब मलिक ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक आदर्श कानून और तीन नए कृषि कानूनों के बीच का फर्क समझना चाहिए।
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बता दें, राकांपा के प्रवक्ता के इस बयान से कुछ घंटे पूर्व ही प्रधानमंत्री मोदी ने राज्यसभा में विपक्ष के पलट जाने पर अपनी बात को सही साबित करने के लिए कृषि सुधारों के प्रति पूर्व केंद्रीय मंत्री शरद पवार के समर्थन का हवाला दिया था।
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जब पवार कृषि मंत्री थे तब उन्होंने कृषि सुधारों का समर्थन किया था। इसी समर्थन का का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने राज्यसभा में कहा, ‘‘जो पलट रहे हैं, वह शायद उनसे (पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह) से राजी होंगे। भले ही वह कर पाए या नहीं कर पाए, लेकिन सभी ने इस बात की वकालत की थी कि ऐसा किया जाना चाहिए।’’
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प्रधानमंत्री के इस कथन के बाद ही नवाब मलिक ने अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि शरद पवार की अगुवाई वाली पार्टी सुधारों के विरूद्ध नहीं है बल्कि उसने तीन विवादास्पद कृषि विपणन कानूनों को वापस लेने की मांग की है।
प्रधानमंत्री को जवाब देते हुए मलिक ने एक वीडियो बयान में कहा कि पवार ने (2004-14 के बीच कांग्रेस नीत संप्रग सरकार के दौरान) कृषि मंत्री रहने के समय आदर्श कानून पर सहमति बनाने का प्रयास किया था। मलिक ने आगे कहा कि वर्तमान की केंद्र सरकार कृषि के समवर्ती सूची में रहने के बावजूद तीन कृषि कानून ले आई।
उन्होंने यह आरोप भी लगाया, ‘‘आदर्श कानून (जिसे संप्रग सरकार ने लाने का प्रयास किया था) और वर्तमान कृषि कानूनों के बीच बड़ा फर्क है, या तो मोदी यह समझ नहीं रहे हैं या फिर वह लोगों को गुमराह कर रहे हैं।’’ उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री को नए कृषि कानूनों एवं आदर्श कानून के बीच फर्क समझना चाहिए।”
नवाब मलिक ने कहा, ‘‘राकांपा या कोई अन्य पार्टी सुधारों के खिलाफ नहीं है, लेकिन प्रधानमंत्री या केंद्र के लिए वर्तमान कानूनों के वास्ते दबाव बनाना सही नहीं है, जबकि उसे सर्वसम्मति से बनाने की जरूरत है। लोगों को विश्वास में लीजिए और वर्तमान कानूनों में बदलाव कीजिए।’’