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NCP-SCP: शरद पवार ने जारी किया घोषणा पत्र, नौकरी से लेकर महिला आरक्षण तक का किया एलान; जानें और क्या कुछ
Thu, 25 Apr 2024 11:16 AM IST
काव्या मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: काव्या मिश्रा
Updated Thu, 25 Apr 2024 11:16 AM IST
सार
एनसीपी-एससीपी नेता जयंत पाटिल ने कहा कि हम आज अपना घोषणापत्र जारी कर रहे हैं। घोषणापत्र में जो मुद्दे शामिल हैं, हमारे नेता इन मुद्दों को संसद में उठाएंगे। हमारा घोषणापत्र 'शपथ पत्र' है।
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एनसीपी-एससीपी ने अपना घोषणापत्र जारी
- फोटो : एएनआई
विस्तार
लोकसभा चुनाव के लिए राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी- शरद चंद्र पवार (एनसीपी-एससीपी ) ने गुरुवार को अपना घोषणापत्र जारी कर दिया। घोषणापत्र में महिला सुरक्षा के लिए काम करने का वादा किया गया है। साथ में घोषणापत्र में एलपीजी सिलेंडर की कीमत कम करने का भी वादा किया गया है। बता दें, पार्टी ने अपने घोषणापत्र का नाम एससीपीथ पत्र रखा है। इस बीच, शरद पवार ने अमित शाह के किसानों की आत्महत्या को लेकर दिए गए बयान पर पलटवार किया।
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#WATCH | Pune, Maharashtra: NCP-SCP chief Sharad Pawar releases party's manifesto, for Lok Sabha elections. https://t.co/AkUtVjm5qK pic.twitter.com/endlJcTRzt
— ANI (@ANI) April 25, 2024विज्ञापन
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के घोषणापत्र में जाति जनगणना के लिए समर्थन जताते हुए किसानों के कल्याण के लिए एक अलग आयोग के गठन, प्रशिक्षुता का अधिकार, नौकरियों में महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण का वादा किया गया। पार्टी का कहना है कि वह जम्मू एवं कश्मीर को पूर्ण राज्य के दर्जे का समर्थन करती है और ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ के विचार को खारिज करती है।
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‘शपथनामा’ शीर्षक वाले घोषणापत्र के अनुसार, एनसीपी (एससीपी) नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए), राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी), गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) और अन्य ऐसे कानूनों की समीक्षा करेगी और उनमें बदलाव का प्रस्ताव करेगी जो कि संवैधानिक सिंद्धातों के अनुरूप नहीं हैं। इसमें यह भी जिक्र किया गया है कि पार्टी राज्य और स्थानीय सरकारों को सशक्त बनाने, अधिकारों के वितरण की समीक्षा करने और संवैधानिक संशोधनों को लागू करने की वकालत करती है।
मुद्दों को संसद में उठाएंगे
घोषणापत्र को जारी करते हुए एनसीपी (एससीपी) की महाराष्ट्र इकाई के अध्यक्ष जयंत पाटिल ने कहा, 'हम आज अपना घोषणापत्र जारी कर रहे हैं। घोषणापत्र में जो मुद्दे शामिल हैं, हमारे नेता इन मुद्दों को संसद में उठाएंगे। हमारा घोषणापत्र 'शपथ पत्र' है। महंगाई बढ़ रही है, किसान परेशान हैं और बेरोजगारी चरम पर है।'
10 सालों में एजेंसियों का दुरुपयोग
उन्होंने आगे कहा कि पिछले 10 सालों में एजेंसियों का दुरुपयोग और निजीकरण जैसे मुद्दे बढ़े हैं। इन सभी मुद्दों पर हम अपना रुख पहले ही जाहिर कर चुके हैं। हम एलपीजी गैस की कीमत, पेट्रोल और डीजल की कीमत कम करेंगे। अगर हम सत्ता में आए तो सरकारी नौकरियों में खाली जगहों को भरेंगे। हम महिला आरक्षण पर भी काम करेंगे। महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सख्त कानून लाया जाएगा।'
एनसीपी (एससीपी) प्रमुख एवं पूर्व केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार की मौजूदगी में जारी घोषणापत्र में जाति जनगणना, अग्निपथ योजना को खत्म करने, महिलाओं के लिए सुरक्षा ऑडिट और उनसे संबंधित साइबर कानूनों को मजबूत करने का भी समर्थन किया गया है।कहा गया है कि पार्टी किसानों, युवाओं, महिलाओं, मजदूरों और जाति जनगणना से संबंधित मुद्दों पर कांग्रेस के घोषणापत्र में उल्लिखित पार्टी के पांच ‘न्याय’ (गारंटी) का समर्थन करती है।
पाटिल ने कहा कि अगर पार्टी को केंद्र की सत्ता में आने का मौका मिला तो वह वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) को ‘अधिक आसान’ बनाएगी। उन्होंने कहा कि एलपीजी सिलेंडर की कीमत 500 रुपये पर तय की जाएगी और यदि आवश्यक हुआ तो सरकार द्वारा सब्सिडी दी जाएगी। पेट्रोल, डीजल कर को नया रूप दिया जाएगा।
अमित शाह पर शरद पवार का पलटवार
दरअसल, अमित शाह के कहा था कि शरद पवार के कृषि मंत्री रहते हुए कई किसानों ने खुद की जान दे दी थी, जिसके लिए उन्हें माफी मांगनी चाहिए। इस पर शरद पवार ने कहा कि पिछले 10 वर्षों में किसानों की आत्महत्याएं बढ़ी हैं। अमित शाह को पहले बताना चाहिए कि उन्होंने पिछले कुछ सालों में आत्महत्या रोकने के लिए क्या किया है।
वहीं, पीएम मोदी के बयान पर शरद पवार ने कहा, 'लोग उम्मीद करते हैं कि देश का प्रधानमंत्री जाति, धर्म, भाषा आदि से परे सभी के लिए हो। एक भाषण में उन्होंने देश में अल्पसंख्यकों को लेकर अलग रुख अपनाने की कोशिश की। चुनाव प्रचार के दौरान हम उनके पक्ष को लोगों के बीच ले जाएंगे और लोगों को यह समझाने की कोशिश करेंगे कि उनके विचार से देश की एकता को ठेस पहुंच सकती है और इसकी निंदा की जानी चाहिए।'