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भाजपा के खिलाफ : आम चुनाव में गठबंधन का नेतृत्व कौन करेगा?, पवार बोले- जनता को राजनीतिक विकल्प चाहिए

Thu, 18 Nov 2021 01:24 AM IST
योगेश साहू पीटीआई, नागपुर।
पीटीआई, नागपुर। Published by: योगेश साहू Updated Thu, 18 Nov 2021 01:24 AM IST
सार

अस्सी वर्षीय शरद पवार देश के सबसे वरिष्ठ राजनेताओं में से एक हैं और देश के विभिन्न राजनीतिक दलों के साथ उनके अच्छे संबंध हैं। उनके प्रयासों के कारण ही वैचारिक रूप से विपरीत होने के बावजूद शिवसेना और कांग्रेस ने महाराष्ट्र में सरकार बनाने के लिए राकांपा के साथ हाथ मिलाया।

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NCP chief Sharad Pawar Said No issue of who will lead anti-BJP alliance, people need to be given political option
एनसीपी प्रमुख शरद पवार - फोटो : PTI

विस्तार

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रमुख शरद पवार ने बुधवार को कहा कि आम चुनावों में भाजपा के खिलाफ गठबंधन का नेतृत्व कौन करेगा यह कोई मुद्दा नहीं है। जनता को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता, उसे बस राजनीतिक विकल्प चाहिए। पवार ने अमरावती और महाराष्ट्र के कुछ अन्य स्थानों पर हाल में हुई हिंसा की घटनाओं को बहुत दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि सरकार को ऐसी नीति बनानी चाहिए कि जिसमें ऐसी घटनाओं के पीड़ित दुकानदारों और व्यापारियों को मुआवजा दिया जा सके।

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उन्होंने यह भी कहा कि महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री और राकांपा नेता अनिल देशमुख के साथ 'अन्याय' किया गया है। देशमुख मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद से न्यायिक हिरासत में जेल में है। पवार नागपुर विदर्भ चैंबर ऑफ कॉमर्स (एनवीसीसी) के प्रतिनिधियों से मिलने के बाद बोल रहे थे। इस दौरान उन्होंने महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में हिंसा की घटनाओं पर चिंता जताई और कहा कि निर्दोष दुकानदार और व्यापारी हिंसा का शिकार हो जाते हैं और उनकी कोई गलती नहीं होने के बावजूद उन्हें नुकसान होता है।
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इस दौरान एनसीपी सुप्रीमो से मीडिया कर्मियों ने भाजपा के खिलाफ गठबंधन को लेकर भी सवाल किए। क्या पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी गठबंधन वाले उस मोर्चे का नेतृत्व कर सकती हैं, इसके जवाब में पवार ने कहा कि गठबंधन के मुद्दे पर संसद के आगामी सत्र में चर्चा की जाएगी। उन्होंने कहा कि गठबंधन का नेता कौन होगा, यह कोई मुद्दा नहीं है। आज एक विकल्प देने की जरूरत है, जो लोग चाहते हैं और हम लोगों की इच्छा को पूरा करने के लिए विभिन्न दलों का समर्थन लेंगे।
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हिंसा की घटनाओं पर बोले- जो हुआ, वो ठीक नहीं
इस साल जून में पवार ने राष्ट्रीय राजधानी में अपने आवास पर टीएमसी, एसपी, आप, रालोद और वामपंथी दलों सहित आठ विपक्षी दलों के नेताओं की मेजबानी की थी और सत्तारूढ़ भाजपा के रहते देश के सामने आने वाले विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की थी। अस्सी वर्षीय पवार देश के सबसे वरिष्ठ राजनेताओं में से एक हैं और देश के विभिन्न राजनीतिक दलों के साथ उनके अच्छे संबंध हैं। उनके प्रयासों के कारण ही वैचारिक रूप से विपरीत होने के बावजूद शिवसेना और कांग्रेस ने महाराष्ट्र में सरकार बनाने के लिए राकांपा के साथ हाथ मिलाया।

त्रिपुरा में हुई सांप्रदायिक हिंसा का जिक्र करते हुए जिसका असर महाराष्ट्र में भी देखा गया, पवार ने कहा कि राज्य में जो कुछ नहीं हुआ है, उसके लिए कड़ी प्रतिक्रिया देना अच्छा नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार को एक नीति तैयार करने पर काम करने की आवश्यकता है ताकि हिंसा के पीड़ितों की मदद की जा सके। एक ऐसी नीति लाई जानी चाहिए जिसमें निर्दोष छोटे व्यापारियों को कराधान में बदलाव के रूप में या क्षतिपूर्ति के लिए प्रोत्साहन प्रदान करने के माध्यम से उनके नुकसान का मुआवजा दिया जा सके।

पूर्व केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा कि अमरावती में जो हुआ वह एक बहुत ही संवेदनशील मुद्दा था। उन्होंने कहा कि मैं समझ सकता हूं कि किसी राज्य विशेष में कुछ होता है और उस राज्य में कोई प्रतिक्रिया होती है। लेकिन त्रिपुरा में कुछ हुआ, और उसकी प्रतिक्रिया यहां हुई, यह अच्छा नहीं है। इसके अलावा कुछ लोगों ने कानून को अपने हाथ में लेने की कोशिश की... वहां जो हुआ वह सही नहीं है। सरकार को इस मुद्दे को बहुत सख्ती से देखना होगा।

यह अनिल देशमुख के साथ अन्याय है : पवार
अनिल देशमुख के बारे में पूछे जाने पर पवार ने कहा कि मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त (परमबीर सिंह), उनके खिलाफ आरोप लगाकर फरार हो गए हैं और उन्हें साबित करने के लिए आगे नहीं आ रहे हैं, यही वजह है कि पूर्व मंत्री जेल में हैं। पवार ने कहा कि यह अनिल देशमुख के साथ एक तरह का अन्याय है।

देवेंद्र फडणवीस की कथित टिप्पणी के बारे में पूछे जाने पर कि महाराष्ट्र में हालिया हिंसा मुसलमानों को खुश करने के लिए की गई थी, पवार ने कहा कि पिछले दो दिनों में भाजपा नेता द्वारा दिए गए बयान बहुत स्तरहीन थे और उनसे इसकी उम्मीद नहीं थी। उन्होंने कहा कि इससे सत्ता खोने के बाद उनकी बेचैनी दिखाई दी।

पवार ने कांग्रेस नेता नाना पटोले के उस बयान पर भी प्रतिक्रिया दी जिसमें पटोले ने एक सवाल के जवाब में कहा था कि विदर्भ में राकांपा की शायद ही कोई मौजूदगी है। इस पर पवार ने कहा कि राकांपा-कांग्रेस गांधीजी और (जवाहरलाल) नेहरू की विचारधारा पर मिलकर काम कर रही हैं। उन्होंने कहा कि हालांकि, एक व्यक्ति जो पहले भाजपा उम्मीदवार के रूप में लोकसभा और विधानसभा चुनाव जीत चुका था, उसकी सोच और वफादारी को समझा जा सकता है।


इससे पहले एनवीसीसी सदस्यों को संबोधित करते हुए पवार ने नाम लिए बिना पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर तंज कसते हुए कहा कि जो विदर्भ का है, वह सत्ता में रहते हुए उनके मुद्दों को हल कर सकता था। हालांकि पवार ने अपने भाषण में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी की प्रशंसा की कि उन्होंने यह देखे बिना कि वह व्यक्ति कौन है या किस पार्टी से है, राज्य की मदद की।

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