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Justice JS Verma: NCDRC ने पूर्व CJI के परिजनों की शिकायत को किया खारिज, कहा- लापरवाही मौत की वजह नहीं

Wed, 14 Jun 2023 06:35 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: निर्मल कांत Updated Wed, 14 Jun 2023 06:35 PM IST
सार

एनसीडीआरसी पूर्व मुख्य न्यायाधीश की पत्नी और दो बेटियों की शिकायत पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें इलाज कर रहे डॉक्टरों और चिकित्सा संस्थानों से हर्जाना और दस करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग की गई थी। 

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NCDRC rejects claim medical negligence caused death of former CJI JS Verma
न्यायमूर्ति जेएस वर्मा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (एनसीडीआरसी) ने पूर्व मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) जेएस वर्मा के परिवार की उस शिकायत को खारिज कर दिया है जिसमें आरोप लगाया गया था कि इलाज के दौरान चिकित्सकीय लापरवाही के कारण उनकी मौत हुई। न्यायमूर्ति वर्मा देश के 27वें सीजेआई थे। इस पद पर 25 मार्च 1997 से 18 जनवरी 1998 तक सेवा देने के बाद वह सेवानिवृत्त हो गए थे। अप्रैल 2013 में उनका निधन हो गया था। 

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पूर्व मुख्य न्यायाधीश वर्मा ने की सरकार की नियुक्त समिति का नेतृत्व
उन्होंने दिसंबर 2012 की दिल्ली सामूहिक बलात्कार की घटना के मद्देनजर महिलाओं के खिलाफ अपराध से निपटने के लिए एक सख्त कानून बनाने के लिए सरकार द्वारा नियुक्त समिति का भी नेतृत्व किया था। इस सामूहिक दुष्कर्म को निर्भया मामले के रूप में जाना जाता है। इसमें एक युवती के साथ चलती बस में दुष्कर्म किया गया था और उसपर जानलेवा हमला किया गया था। इस समिति ने त्वरित सुनवाई के लिए आपराधिक कानून में संशोधन और महिलाओं पर यौन उत्पीड़न की घटनाओं के अपराधियों के लिए सजा बढ़ाने का सुझाव दिया था।
 

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परिजनों ने की थी दस करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग
एनसीडीआरसी पूर्व मुख्य न्यायाधीश की पत्नी और दो बेटियों की शिकायत पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें इलाज कर रहे डॉक्टरों और चिकित्सा संस्थानों से हर्जाना और दस करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग की गई थी। पीठासीन सदस्य एस एम कांतिकर की पीठ ने कहा कि डॉक्टरों ने मानक चिकित्सा प्रोटोकॉल का पालन किया और देखभाल के कर्तव्य में कोई कमी नहीं थी। पीठ में न्यायिक सदस्य न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) राम सूरत राम मौर्य और तकनीकी सदस्य इंदर जीत सिंह भी शामिल थे। उन्होंने कहा कि मरीज को सेरेब्रल स्ट्रोक से बचाने के लिए एंटीकोआगुलेंट दवा दी गई थी।
 

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एनसीडीआरसी ने कहा- कई बीमारियों से पीड़ित थे न्यायमूर्ति वर्मा
पीठ ने कहा कि न्यायमूर्ति वर्मा (80 वर्षीय) लीवर की बीमारी समेत कई अन्य बीमारियों से पीड़ित थे और इन सभी कारकों ने उनकी मौत में योगदान दिया। इसने आगे कहा, न्यायमूर्ति जेएस वर्मा की मौत के लिए विरोधी पक्षों के कृत्य को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। न्यायमूर्ति वर्मा की मौत से हमारी गहरी सहानुभूति है, लेकिन यह दायित्व का आधार नहीं हो सकता। शिकायत विफल हुई है, इसे खारिज किया जाता है।

पीठ ने सुप्रीम कोर्ट के 2021 के फैसले का दिया हवाला
एनसीडीआरसी ने सुप्रीम कोर्ट के 2021 के एक फैसले का हवाला दिया, जिसके मुताबिक एक चिकित्सक को केवल इसलिए उत्तरदायी नहीं ठहराया जाना चाहिए क्योंकि चीजें बदकिस्मती से गलत हो गईं। इस फैसले में कहा गया था कि चिकित्सा के अभ्यास में उपचार के लिए अलग-अलग दृष्टिकोण हो सकते हैं। चिकित्सा लापरवाही के 'चार डी' (ड्यूटी, डिरेलिक्शन, डायरेक्ट कॉज और डैमेजेज) को रेखांकित करते हुए  आयोग ने कहा, मौजूदा मामले में शिकायतकर्ता विपरीत पक्षों से देखभाल के दायित्व की लापरवाही साबित करने में विफल रहे हैं और यह मौत का अनुमानित कारण नहीं था।

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