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मेघालय : रिमोट चालित वाहनों से खदान में फंसे मजदूरों को बचाएगी नौसेना

Fri, 11 Jan 2019 05:12 PM IST
आसिम खान भाषा, नई दिल्ली
भाषा, नई दिल्ली Published by: आसिम खान Updated Fri, 11 Jan 2019 05:12 PM IST
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Navy will save the trafficked workers from remote-driven vehicles in the Meghalaya mine

मेघालय सरकार ने शुक्रवार को उच्चतम न्यायालय को सूचित किया कि पूर्वी जयंतिया हिल्स जिले में एक गैरकानूनी कोयला खदान में 13 दिसंबर से फंसे श्रमिकों को बचाने के लिये नौसेना ने पांच रिमोट चालित वाहनों को काम में लगाया है। न्यायमूर्ति ए के सीकरी और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर की पीठ को राज्य सरकार ने बताया कि इस गैरकानूनी खदान से अभी तक एक करोड़ लीटर पानी बाहर निकाला गया है परंतु पास की नदियों से इसमें हो रहा रिसाव बचाव अभियान में बाधायें पैदा कर रहा है। पीठ ने राज्य सरकार के वकील से जानना चाहा कि क्या इस तरह की गैरकानूनी खनन गतिविधियों में संलिप्त व्यक्तियों के खिलाफ कोई कार्रवाई की गयी है। 

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राज्य सरकार के वकील ने न्यायालय को बताया कि गैरकानूनी खदान चलाने वाले व्यक्ति को गिरफ्तार कर लिया गया है। केन्द्र की ओर से सालिसीटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ से कहा कि खदान में फंसे श्रमिकों को बचाने के लिये हरसंभव कदम उठाये जा रहे हैं और भारतीय वायु सेना ने जरूरी उपकरणों और व्यक्तियों को पहुंचाने के लिये विमान तथा हेलीकाप्टर तैनात किये हैं। पीठ ने संक्षिप्त सुनवाई के बाद इस मामले को 18 जनवरी के लिये सूचीबद्ध कर दिया। शीर्ष अदालत गैरकानूनी कोयला खदान में फंसे 15 श्रमिकों को बचाने के लिये सभी आवश्यक कदम उठाने हेतु आदित्य एन प्रसाद की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी।  
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इससे पहले, केन्द्र ने न्यायालय को सूचित किया था कि मजदूरों को बचाने के लिये सभी उचित कदम उठाये जा रहे हैं। सालिसीटर जनरल ने न्यायालय को बताया था कि बचाव और राहत कार्य में राष्ट्रीय आपदा मोचन बल के 71 सदस्यों के साथ ही राज्य आपदा मोचन बल के 20, नौसेना के 16 कार्मिक और ओडिशा अग्निशमन तथा कोल इंडिया लि सहित अन्य लोग दिन रात बचाव कार्य में लगे हुये हैं। मेघालय सरकार ने भी बचाव अभियान की प्रगति के बारे में एक रिपोर्ट न्यायालय में पेश की थी और कहा था कि दुर्घटनास्थल पर उचित सुविधाओं के अभाव और मुश्किल क्षेत्र की वजह से राहत के काम में परेशानियां आ रही है। 
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राज्य सरकार ने यह भी कहा था कि इस गैरकानूनी कोयला खदान का कोई खाका नहीं है क्योंकि इसमे अवैध तरीके से खनन हो रहा था और इसमें बचाव कार्य बहुत ही चुनौती भरा है। राज्य सरकारी का कहना था कि पास ही बहने वाली एक नदी का पानी इस खदान में घुस रहा है और यह कम से कम 20 दूसरी खदानों से परस्पर जुड़ी हुयी है। 

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