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राम मंदिर निर्माण के लिए मध्यस्थता करेगा राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग

Wed, 14 Nov 2018 05:56 PM IST
डिजिटल ब्यूरो, नई दिल्ली 
डिजिटल ब्यूरो, नई दिल्ली  Updated Wed, 14 Nov 2018 05:56 PM IST
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National minority commission to mediate for construction of Ram temple  
ram mandir - फोटो : amar ujala
राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग अब राम मंदिर निर्माण के लिए जल्द ही मध्यस्थता शुरू करेगा। आयोग का कहना है कि वह शीर्ष अदालत के अंतिम फैसले के पक्ष में है, लेकिन अगर अदालत से बाहर ही समझौता हो जाता है, तो देश में अमन-चैन कायम रहेगा। इससे पहले आयोग ने सर्वोच्च न्यायलय में राम मंदिर निर्माण को लेकर जल्द सुनवाई के लिए याचिका दायर करने का फैसला किया था।  
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राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के चैयरपर्सन गैरुल हसन रिजवी ने अमर उजाला से विशेष बातचीत में बताया कि बुधवार को आयोग के सभी सदस्यों के साथ हुई बैठक में यह फैसला लिया गया कि संविधान के तीनों स्तभों विधानमंडल, कार्यपालिका और न्यायपालिका को इस मामले के जल्द निपटारे के लिए शांतिपूर्वक प्रयास करने चाहिए। चूंकि मामला सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है, अतः सभी को अंतिम फैसले का इंतजार करना चाहिए।
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रिजवी ने बताया कि आयोग के सभी सदस्यों के साथ बैठक में उन्हें यह अधिकार दिया गया कि राम मंदिर मामले में सभी पक्षकारों से बातचीत करें और मध्यस्थता की भूमिका निभाएं। रिजवी के मुताबिक वे जल्द ही राम मंदिर के शीघ्र और शांति पूर्वक निर्माण को लेकर सर्वोच्च न्यायालय में इस विवाद में शामिल सभी प्रमुख पक्षकारों मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड, सुन्नी सेन्ट्रल वक्फ बोर्ड और विश्व हिन्दू परिषद से बातचीत करेंगे।
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आयोग के अध्यक्ष के मुताबिक उनका निजी तौर पर मानना है कि वहां मंदिर है, वहां पूजा रही है और वहां भव्य मंदिर का निर्माण होना चाहिए। उन्होंने बातचीत के दौरान कहा कि मंदिर-मस्जिद विवाद के चलते देश का मुसलमान घबराया और सहमा हुआ है, वह मंदिर—मस्जिद के नाम पर और दंगा-फसाद नहीं चाहता। 

इस मामले के पक्षकारों को इस हकीकत से रूबरू होना चाहिए कि अगर सर्वोच्च न्यायालय का फैसला मुस्लिमों के पक्ष में आता है, तो क्या 100 करोड़ हिंदू वहां बाबरी मस्जिद बनने देंगे? साथ ही, वहीं हालात इसके ठीक विपरित होते हैं, तो क्या होगा। ऐसे में अदालत के बाहर शांति पूर्वक बातचीत के जरिए वहां मंदिर बनाने के लिए सभी पक्षकारों को मनाया जाए। 

उन्होंने बताया कि देश के कई शहरों से मुस्लिम संगठनों एवं व्यक्तिगत स्तर पर शिकायतें मिल रही हैं कि मस्जिद निर्माण और मीनारें बनाने में बाधाएं डाली जा रही हैं, यहां तक कि कई जगहों पर मुस्लिम समाज के लोगों को नमाज अता करने से भी रोका जा रहा है। उनका कहना है कि इससे मुल्क की फिजा खराब होने का खतरा है।


इससे पहले आयोग ने प्रस्ताव दिया था कि राम मंदिर निर्माण को लेकर जल्द सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दायर करेंगे, लेकिन सोमवार को सर्वोच्च अदालत ने हिन्दूमहासभा की जल्द सुनवाई की अर्जी को यह कहते हुए खारिज कर दिया था, रोज सुनवाई की तारीखें जनवरी में तय की जाएंगी।
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