फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   National Council Secretary Shiv Gopal Mishra special conversation regarding UPS

UPS: 'सभी राज्यों को लागू करनी पड़ेगी यूपीएस'; राष्ट्रीय परिषद के सचिव शिव गोपाल ने कई सवालों के दिए जवाब

Sun, 25 Aug 2024 04:00 AM IST
शिव शुक्ला अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: शिव शुक्ला Updated Sun, 25 Aug 2024 04:00 AM IST
सार

पुरानी पेंशन योजना में सरकारी कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के समय मिल रहे वेतन की आधी रकम पेंशन के रूप में मिलती है। इसके लिए उन्हें कोई योगदान नहीं देना पड़ता है। पूरा भुगतान सरकार अपने खजाने से करती है। उन्हें 20 लाख रुपये तक ग्रैच्युटी मिलती है।

विज्ञापन
National Council Secretary Shiv Gopal Mishra special conversation regarding UPS
UPS - फोटो : Freepik

विस्तार

ऑल इंडिया रेलवेमैंस फेडरेशन के महासचिव और केंद्रीय कर्मियों की राष्ट्रीय परिषद के सचिव शिव गोपाल मिश्र का कहना है कि यूपीएस को सभी राज्यों को लागू करना पड़ेगा। यह मुद्दा देशभर के कर्मचारियों का है। जिन राज्यों ने पुरानी पेंशन लागू करने की घोषणा की थी, उन्हें भी यूपीएस लागू करनी होगी। मिश्र ने अमर उजाला से बातचीत में कई महत्वपूर्ण सवालों के जवाब दिए...

विज्ञापन


सवाल- एकीकृत पेंशन योजना पुरानी पेंशन से किस तरह अलग है?
जवाब-
पुरानी पेंशन में कर्मचारियों को किसी तरह का अंशदान नहीं करना पड़ता था। एकीकृत पेंशन योजना में नई पेंशन की तरह 10 प्रतिशत अंशदान जारी रहेगा। लेकिन, सरकार इस राशि के बदले तय फॉर्मूले पर एक एकमुश्त राशि का अलग से भी भुगतान करेगी। सरकार ने सुनिश्चित पेंशन के लिए अपना अंशदान भी 14 फीसदी से बढ़ाकर 18.5 प्रतिशत कर दिया है।
विज्ञापन


सवाल- क्या कर्मचारी अंशदान पूरा वापस नहीं होना चाहिए?
जवाब- हमारी मांग थी कि सरकार कर्मचारी अंशदान का पूरा पैसा वापस करे। लेकिन, सरकार तय फॉर्मूले पर एकमुश्त देने पर सहमत हुई।

सवाल-  पूर्ण पेंशन के लिए 25 साल की शर्त का क्या मतलब?
जवाब-
 पहले 35 साल की सेवा पर पूर्ण पेंशन मिलती थी। हमारे प्रयास से अब 25 वर्ष की सेवा पर ही पूर्ण पेंशन मिलेगी। यह बहुत बड़ा कदम है।

सवाल- न्यूनतम पेंशन का क्या फॉर्मूला है?
जवाब-
10 वर्ष की सेवा पर कर्मचारी न्यूनतम पेंशन के हकदार हो जाएंगे। यह 10 हजार रुपये न्यूनतम है। वास्तव में उसे 10 हजार रुपये के साथ महंगाई राहत मिलेगी। आज जो कर्मचारी रिटायर होंगे, उन्हें कम से कम 15 हजार मिलेगा। इसी तरह वर्ष के हिसाब से कितनी राशि मिलेगी, यह फॉर्मूले से निकाला जा सकता है।
विज्ञापन
विज्ञापन


सवाल- क्या कर्मचारियों के पेंशन से जुड़े सभी मसले इस स्कीम से हल हो गए?
जवाब-
निश्चित रूप से। नई पेंशन में कर्मचारी 2,000, 3,000, 4,000 रुपये पेंशन के साथ रिटायर हो रहे थे। एकीकृत पेंशन न सिर्फ न्यूनतम पेंशन सुनिश्चित कर रही है, बल्कि पहले से कम समय में पूर्ण पेंशन का रास्ता खोल रही है। खास बात यह है कि योजना नई पेंशन लागू होने के समय से लागू हो रही है। सेवानिवृत्त पेंशनर भी इसके लाभ के दायरे में हैं। ऐसा संवेदनशील प्रधानमंत्री के कारण संभव हुआ है। प्रधानमंत्री ने कर्मचारियों को बुलाकर सुना और मांगों पर कार्यवाही की।

पुरानी और नई पेंशन योजना पर यह था विवाद

  • पुरानी पेंशन योजना में सरकारी कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के समय मिल रहे वेतन की आधी रकम पेंशन के रूप में मिलती है। इसके लिए उन्हें कोई योगदान नहीं देना पड़ता है। पूरा भुगतान सरकार अपने खजाने से करती है। उन्हें 20 लाख रुपये तक ग्रैच्युटी मिलती है। इसमें जनरल प्रोविडेंट फंड का प्रावधान है। हर छह माह बाद महंगाई भत्ता बढ़ाने का प्रावधान है। 

     
  •  नई पेंशन योजना में कर्मचारियों की बेसिक सैलरी और डीए का 10 फीसदी हिस्सा कटता है। यह पेंशन योजना शेयर पर आधारित है, इसलिए कर्मचारी इसे अधिक सुरक्षित नहीं मानते। इसे महंगाई भत्ते से भी नहीं जोड़ा है। सेवानिवृत्ति के बाद निश्चित पेंशन की गारंटी नहीं है। सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन पाने के लिए एनपीएस का 40% हिस्सा एन्युटी में निवेश करना होगा। यही नहीं, एनपीएस टैक्स के दायरे में भी आता है। इसे लेकर कर्मचारी एनपीएस का विरोध करते रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed