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नटराजन चंद्रशेखरन: टीसीएस में इंटर्न से टाटा समूह के चेयरमैन बनने वाले पहले गैर पारसी
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Fri, 13 Jan 2017 12:55 PM IST
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फाइलः नटराजन चंद्रशेखरन
- फोटो : Getty Images
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टाटा समूह की ताज टीसीएस में इंटर्न के तौर पर कैरियर की शुरुआत करने वाले नटराजन चंद्रशेखरन के समूह के शीर्ष पद पर पहुंचने की कहानी काफी मजेदार है। मैराथन दौड़ के शौकीन नटराजन की टीसीएस की मैराथन पारी ने उन्हें टाटा समूह के चेयरमैन पद का स्वाभाविक दावेदार बना दिया था।
वर्ष 1987 में त्रिची रीजनल इंजीनियरिंग कॉलेज से कंप्यूटर एप्लीकेशन में मास्टर की डिग्री हासिल करने वाले चंद्रशेखरन ने उसी साल सीधे टीसीएस में इंटर्न के तौर पर नौकरी शुरू की। अपने लोगों के बीच चंद्रा के नाम से पहचाने जाने वाले नटराजन ने फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। वह लगातार सफलता की सीढ़ियां चढ़ते गए।
वर्ष 2009 में उन्हें टीसीएस का प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी बना दिया गया। इस दौरान भारत दुनिया में एक सूचना प्रौद्योगिकी ताकत के रूप में उभर रहा था। फोटोग्राफी के शौकीन चंद्रा ने भविष्य की तस्वीर अपनी आंखों में कैद कर ली और टीसीएस को देश की शीर्ष सूचना प्रौद्योगिकी कंपनी बना दी।
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उन्होंने टीसीएस को उस वक्त शीर्ष पर पहुंचाया, जब टाटा समूह की मुख्य कंपनियां टाटा स्टील और टाटा मोटर्स कुछ खास नहीं कर पा रही थीं। लगता है कि चंद्रा की इसी प्रतिबद्धता ने उन्हें समूह के शीर्ष पर पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभाई।
मजेदार बात यह है कि चंद्रा विशुद्ध रूप से प्रोफेशनल हैं। उनकी टाटा समूह में कोई हिस्सेदारी नहीं है। वह बिना किसी हिस्सेदारी के समूह के चेयरमैन बनने वाले पहले व्यक्ति हैं। इतना ही नहीं सात लाख करोड़ रुपये से अधिक के कारोबारी समूह के चेयरमैन बनने वाले वह पहले गैर पारसी व्यक्ति हैं।
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वर्ष 1987 में त्रिची रीजनल इंजीनियरिंग कॉलेज से कंप्यूटर एप्लीकेशन में मास्टर की डिग्री हासिल करने वाले चंद्रशेखरन ने उसी साल सीधे टीसीएस में इंटर्न के तौर पर नौकरी शुरू की। अपने लोगों के बीच चंद्रा के नाम से पहचाने जाने वाले नटराजन ने फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। वह लगातार सफलता की सीढ़ियां चढ़ते गए।
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वर्ष 2009 में उन्हें टीसीएस का प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी बना दिया गया। इस दौरान भारत दुनिया में एक सूचना प्रौद्योगिकी ताकत के रूप में उभर रहा था। फोटोग्राफी के शौकीन चंद्रा ने भविष्य की तस्वीर अपनी आंखों में कैद कर ली और टीसीएस को देश की शीर्ष सूचना प्रौद्योगिकी कंपनी बना दी।
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उन्होंने टीसीएस को उस वक्त शीर्ष पर पहुंचाया, जब टाटा समूह की मुख्य कंपनियां टाटा स्टील और टाटा मोटर्स कुछ खास नहीं कर पा रही थीं। लगता है कि चंद्रा की इसी प्रतिबद्धता ने उन्हें समूह के शीर्ष पर पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभाई।
मजेदार बात यह है कि चंद्रा विशुद्ध रूप से प्रोफेशनल हैं। उनकी टाटा समूह में कोई हिस्सेदारी नहीं है। वह बिना किसी हिस्सेदारी के समूह के चेयरमैन बनने वाले पहले व्यक्ति हैं। इतना ही नहीं सात लाख करोड़ रुपये से अधिक के कारोबारी समूह के चेयरमैन बनने वाले वह पहले गैर पारसी व्यक्ति हैं।
नई तकनीक पर बड़ा दांव खेलने वाला शख्स
फाइलः नटराजन चंद्रशेखरन
- फोटो : Getty Images
चंद्रा की सबसे बड़ी खासियत तमाम उतार-चढ़ाव के बीच टीसीएस को शीर्ष कंपनी बनाना है। वर्तमान में टीसीएस इंफोसिस को पछाड़कर देश की सबसे बड़ी सॉफ्टवेयर कंपनी है जिसका बाजार मूल्य 50 खरब रुपये के आसपास है। यह टाटा समूह की सबसे अधिक कमाई करने वाली कंपनी है। टाटा समूह की कुल कमाई में टीसीएस का हिस्सा 80 फीसदी है।
वर्ष 1963 में तमिलनाडु में जन्मे चंद्रा पत्नी ललिता और बेटे प्रणव के साथ मुंबई में रहते हैं। उनको नई तकनीक पर बड़ा दांव खेलने वाला शख्स माना जाता है। उनके नेतृत्व में वर्ष 2015-16 में टीसीएस की सकल आय एक लाख करोड़ रुपये से अधिक थी।
टीसीएस रोजगार देने के मामले में निजी क्षेत्र की सबसे बड़ी कंपनी है। टीसीएस में 3.78 लाख लोग काम कर रहे हैं। उनके नेतृत्व में वर्ष 2015 में टीसीएस को सूचना प्रौद्योगिकी सेवा में दुनिया का सबसे बड़ा ब्रांड घोषित किया गया था।
इतना ही नहीं वह भारत-अमेरिका और भारत-ब्रिटेन सीईओ फोरम में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। वह कई देशों के साथ देश के कारोबारी टास्कफोर्स के सदस्य भी हैं।
वर्ष 1963 में तमिलनाडु में जन्मे चंद्रा पत्नी ललिता और बेटे प्रणव के साथ मुंबई में रहते हैं। उनको नई तकनीक पर बड़ा दांव खेलने वाला शख्स माना जाता है। उनके नेतृत्व में वर्ष 2015-16 में टीसीएस की सकल आय एक लाख करोड़ रुपये से अधिक थी।
टीसीएस रोजगार देने के मामले में निजी क्षेत्र की सबसे बड़ी कंपनी है। टीसीएस में 3.78 लाख लोग काम कर रहे हैं। उनके नेतृत्व में वर्ष 2015 में टीसीएस को सूचना प्रौद्योगिकी सेवा में दुनिया का सबसे बड़ा ब्रांड घोषित किया गया था।
इतना ही नहीं वह भारत-अमेरिका और भारत-ब्रिटेन सीईओ फोरम में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। वह कई देशों के साथ देश के कारोबारी टास्कफोर्स के सदस्य भी हैं।