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Nashik Conversion Case: कैसे एक शिकायत से उत्पीड़न-धर्मांतरण के कथित रैकेट का हुआ खुलासा, पढ़ें टाइमलाइन
Sat, 18 Apr 2026 04:29 PM IST
Kirtivardhan Mishra
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
Published by: Kirtivardhan Mishra
Updated Sat, 18 Apr 2026 04:29 PM IST
सार
महाराष्ट्र के नासिक में निजी कंपनी टीसीएस में हाल ही में कुछ कर्मचारियों ने अपने वरिष्ठ सहकर्मियों के खिलाफ यौन उत्पीड़न और जबरन धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाने का आरोप लगाते हुए केस दर्ज कराया। बताया जाता है कि इस पूरे रैकेट का भंडाफोड़ टीसीएस की एक महिला कर्मी की शिकायत के बाद हुआ। इस शिकायत की जांच के दौरान जब पुलिस ने महिला कर्मियों से आगे आकर अपने साथ हुई घटनाओं के बारे में बताने को कहा, तो एक के बाद एक कई कर्मियों ने मामले से जुड़े खुलासे किए।
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नासिक में यौन उत्पीड़न-धर्मांतरण के केस।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
महाराष्ट्र का नासिक बीते कुछ दिनों से चर्चा में है। यहां एक निजी कंपनी में कथित तौर पर यौन उत्पीड़न और धर्म परिवर्तन की कोशिशों से जुड़ी घटनाओं का खुलासा हुआ है। इन खुलासों के बाद से ही महाराष्ट्र से लेकर पूरे देश में आक्रोश का माहौल है। फिलहाल पुलिस ने इस मामले की जांच तेज कर दी है और कुछ आरोपियों को गिरफ्तार भी किया है। इतना ही नहीं, इस घटना की हर कड़ी की गहराई से जांच की जा रही है।
ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर नासिक का यह पूरा मामला क्या है? इस घटना की पूरी टाइमलाइन क्या रही है? पुलिस की जांच में अब तक क्या-क्या सामने आया है और मामले में क्या खुलासे हुए हैं? आइये जानते हैं...
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ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर नासिक का यह पूरा मामला क्या है? इस घटना की पूरी टाइमलाइन क्या रही है? पुलिस की जांच में अब तक क्या-क्या सामने आया है और मामले में क्या खुलासे हुए हैं? आइये जानते हैं...
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पहले जानें- क्या है नासिक का मामला?
नासिक में जो मामला इस वक्त चर्चा में है, वह निजी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) से जुड़ा है। आरोप हैं कि नासिक में टीसीएस की एक बीपीओ यूनिट में बीते कुछ वर्षों से यौन उत्पीड़न और जबरन धर्मांतरण के प्रयास चल रहे थे। यह घटनाक्रम 2022 से मार्च 2026 के बीच का बताया गया है। इस मामले में कंपनी के नौ कर्मचारियों (आठ महिलाएं और एक पुरुष) ने अपने वरिष्ठ सहकर्मियों के खिलाफ नौ अलग-अलग एफआईआर दर्ज कराई हैं।बताया जाता है कि इस पूरे केस की परतें 23 वर्षीय महिला कर्मचारी के आगे आकर नासिक के एक पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराने के बाद खुलीं। इस पीड़िता ने अपने एक सहकर्मी पर यौन शोषण और प्रेम के झूठे जाल में फंसाने का आरोप लगाया, और साथ ही अन्य सहकर्मियों पर 2022 से धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का आरोप भी लगाया। इसके बाद पुलिस ने तुरंत जांच तेज कर दी और कंपनी के अन्य कर्मचारियों को भी अपनी शिकायतें लेकर सामने आने के लिए प्रोत्साहित किया। इस पहली शिकायत से अन्य पीड़ितों को भी हौसला मिला और अगले ही कुछ दिनों में (4 अप्रैल तक) मुंबई नाका पुलिस स्टेशन में आठ और शिकायतें दर्ज की गईं।
क्या हैं मुख्य आरोप?
1. यौन उत्पीड़न और मानसिक प्रताड़ना
टीसीएस की आठ महिला कर्मचारियों ने अपने सीनियर सहकर्मियों पर यौन उत्पीड़न और मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है। शुरुआती जांच और शिकायतों में दुष्कर्म के आरोपों को भी शामिल किया गया। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि पीड़िताओं ने यौन उत्पीड़न के साथ-साथ साथी कर्मचारियों पर इस्लाम धर्म अपनाने और उसकी प्रथाओं का पालन करने का भारी दबाव डालने का भी आरोप लगाया है। इसके अलावा कथित तौर पर हिंदू देवी-देवताओं के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी किए जाने के भी आरोप हैं।2. जबरन धर्मांतरण (धर्म परिवर्तन)
महिला कर्मचारियों का आरोप है कि सुपरवाइजर भूमिकाओं में मौजूद कुछ व्यक्तियों ने उनका जबरन धर्मांतरण कराने का प्रयास किया। बाद में एक पुरुष कर्मचारी ने भी कार्यस्थल पर उत्पीड़न और धर्मांतरण के प्रयास की शिकायत दर्ज कराई है।3. संगठित गिरोह के रूप में काम करना
पुलिस जांच से संकेत मिलता है कि सात पुरुष आरोपियों ने महिला सहकर्मियों को निशाना बनाने के लिए एक संगठित गिरोह की तरह काम किया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, आरोपी एक सुनियोजित तरीके से ऐसे कर्मचारियों को अपना टारगेट बनाते थे, जो आर्थिक या पारिवारिक समस्याओं के कारण मानसिक रूप से कमजोर थे। आरोपियों ने व्हाट्सएप ग्रुप बना रखे थे जहां वे इन टारगेट्स, अपनी आंतरिक राजनीति और कट्टरपंथी धार्मिक विषयों पर चर्चा करते थे। जब पीड़ित परेशान होते थे, तो प्रोसेस एसोसिएट उनका भरोसा जीतती थी और फिर धीरे-धीरे उन पर अपनी जीवनशैली और पहनावा बदलने का दबाव डाला जाता था।ये भी पढ़ें: TCS Nasik Row: गर्भवती है निदा खान? अग्रिम जमानत के लिए कोर्ट पहुंची, सीएम फडणवीस ने बताया 'सुनियोजित माड्यूल'
4. एचआर विभाग की लापरवाही
पीड़ितों का दावा है कि मानव संसाधन (एचआर) विभाग ने उनकी शिकायतों को नजरअंदाज किया। एक महिला ऑपरेशंस मैनेजर पर आरोप है कि उसने यह कहकर पीड़िता को शिकायत दर्ज करने से हतोत्साहित किया कि 'ऐसी चीजें होती रहती हैं' और आरोपियों का पक्ष लिया। हालांकि, बाद में टीसीएस ने स्पष्ट किया कि एक महिला आरोपी कोई एचआर मैनेजर नहीं, बल्कि एक प्रोसेस एसोसिएट थी।मामले में अब तक क्या कार्रवाई हुई?
पुलिस और एसआईटी जांच: पुलिस ने एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है और कुल नौ एफआईआर दर्ज की गई हैं। अब तक सात पुरुषों और एक महिला समेत आठ कर्मचारियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि एक महिला आरोपी अभी फरार है, जिसकी पुलिस सरगर्मी से तलाश कर रही है। पुलिस संभावित आतंकी या बाहरी फंडिंग के लिंक की जांच के लिए आरोपियों के बैंक खातों की भी छानबीन कर रही है और एसआईडी, एंटी-टेररिज्म स्क्वाड (एटीएस) और नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए) जैसी एजेंसियों से संपर्क किया गया है।टीसीएस का रुख और आंतरिक कार्रवाई: टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने इन आरोपों को बेहद चिंताजनक और दुखद बताया है। कंपनी ने अपनी जीरो-टॉलरेंस नीति के तहत आरोपी कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है। टीसीएस ने अपने चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर (सीओओ) आरती सुब्रमण्यम के नेतृत्व में एक आंतरिक जांच शुरू की है और इसमें डेलॉय और ट्राइलीगल जैसी बाहरी एजेंसियों की मदद भी ली है। हालांकि, टीसीएस ने स्पष्ट कहा है कि उन्हें अपने आंतरिक चैनलों (जैसे- पॉश) के माध्यम से ऐसी कोई शिकायत प्राप्त नहीं हुई थी।
आयोग और न्यायालय का दखल: इस गंभीर मामले का संज्ञान लेते हुए राष्ट्रीय महिला आयोग ने जांच के लिए एक तथ्य-अन्वेषण समिति का गठन किया है। इसके अलावा इस घटना के बाद सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है, जिसमें जबरन और धोखे से किए गए धर्मांतरण को आतंकवादी कृत्य घोषित करने की मांग की गई है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी इस पूरे मॉड्यूल का पर्दाफाश करने और दोषियों को न बख्शने की बात कही है।
क्या है नासिक यौन उत्पीड़न-धर्मांतरण मामले की पूरी टाइमलाइन?
शुरुआती घटनाक्रम (अप्रैल के दूसरे हफ्ते तक)
टीसीएस की आठ महिला कर्मचारियों और एक पुरुष कर्मचारी ने अपने सीनियर सहकर्मियों पर यौन उत्पीड़न, मानसिक प्रताड़ना और जबरन धर्मांतरण के आरोप लगाए। इसके आधार पर पुलिस ने कुल नौ एफआईआर दर्ज कीं और मामले की जांच के लिए एक विशेष जांच दल एसआईटी का गठन किया। पुलिस ने सात पुरुष और एक महिला कर्मचारी को गिरफ्तार किया, जबकि एक अन्य महिला आरोपी फरार हो गई।
12 अप्रैल 2026
मामले के संज्ञान में आते ही टीसीएस ने अपनी जीरो-टॉलरेंस नीति का हवाला देते हुए आरोपी कर्मचारियों को निलंबित कर दिया।
13 अप्रैल 2026
14 अप्रैल 2026
पुलिस सूत्रों ने बताया कि अवैध गतिविधियों (जैसे धर्मांतरण) के लिए बाहरी फंडिंग की जांच करने के लिए आरोपियों के बैंक खातों की छानबीन शुरू की गई है।
15 अप्रैल 2026
- टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने इन आरोपों को बेहद चिंताजनक और दुखद बताया। उन्होंने टीसीएस की चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर (सीओओ) आरती सुब्रमण्यम के नेतृत्व में एक आंतरिक जांच की घोषणा की।
- इस बीच, स्थानीय अदालत ने गिरफ्तार महिला ऑपरेशंस मैनेजर की पुलिस हिरासत 15 अप्रैल तक बढ़ा दी। दूसरी तरफ महाराष्ट्र विधान परिषद की उपसभापति नीलम गोर्हे ने नासिक पुलिस कमिश्नर से इस मामले में सख्त कार्रवाई की मांग की।
14 अप्रैल 2026
पुलिस सूत्रों ने बताया कि अवैध गतिविधियों (जैसे धर्मांतरण) के लिए बाहरी फंडिंग की जांच करने के लिए आरोपियों के बैंक खातों की छानबीन शुरू की गई है।
15 अप्रैल 2026
- राष्ट्रीय महिला आयोग ने मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए जांच के लिए एक तथ्य-अन्वेषण समिति का गठन किया।
- नासिक कोर्ट ने महिला ऑपरेशंस मैनेजर को 28 अप्रैल तक न्यायिक हिरासत में भेजा। पुलिस कमिश्नर ने बताया कि इस महिला अधिकारी ने पीड़िताओं को शिकायत करने से रोका था।
- न्यायिक हिरासत में मौजूद दो आरोपियों (रजा रफीक मेमन और शफी भीकन शेख) को पुलिस ने एक नए मामले में फिर से गिरफ्तार किया।
16 अप्रैल 2026
17 अप्रैल 2026
- वरिष्ठ अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की, जिसमें इस घटना का हवाला देते हुए जबरन धर्मांतरण को आतंकवादी कृत्य घोषित करने की मांग की गई।
- पुलिस जांच में सामने आया कि सात पुरुष आरोपियों ने महिला सहकर्मियों को निशाना बनाने के लिए एक संगठित गिरोह की तरह काम किया। उधर पुलिस ने मीडिया और सोशल मीडिया हैंडल्स को पीड़िताओं की पहचान उजागर करने के खिलाफ चेतावनी जारी की।
17 अप्रैल 2026
- महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भरोसा दिलाया कि उनकी सरकार इस पूरे मॉड्यूल का पर्दाफाश करेगी और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
- नासिक क्राइम ब्रांच की टीम फरार महिला आरोपी की तलाश में ठाणे के मुंब्रा पहुंची और वहां उसके पति से पूछताछ की।
- टीसीएस ने स्पष्ट किया कि उन्हें अपने पॉश जैसे आंतरिक चैनलों से ऐसी कोई शिकायत नहीं मिली थी।
- कंपनी ने अपनी आंतरिक जांच की समीक्षा के लिए स्वतंत्र निदेशक केकी मिस्त्री की अध्यक्षता में एक निगरानी समिति बनाई और बाहरी एजेंसियों को भी समिति में शामिल किया।
- इस पूरे विवाद में कथित तौर पर मास्टरमाइंड बताई जा रही प्रोसेस एसोसिएट निदा खान के वकील ने दावा किया कि उनकी मुवक्किल पर जबरन धार्मिक धर्मांतरण या उत्पीड़न का कोई सीधा आरोप नहीं है। उनका नाम केवल नौ में से एक एफआईआर में शामिल है और उन पर सिर्फ धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का आरोप है।
- एडवोकेट ने घोषणा की कि वे सत्र न्यायालय में निदा खान की अग्रिम जमानत के लिए अर्जी दाखिल कर रहे हैं। कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया है कि निदा गर्भवती हैं और इसी आधार पर अदालत से अग्रिम जमानत मांगेंगी।
18 अप्रैल 2026
राष्ट्रीय महिला आयोग की तरफ से गठित तथ्य-अन्वेषण समिति का इस दिन नासिक स्थित टीसीएस फैसिलिटी का दौरा कर पीड़िताओं, पुलिस और प्रबंधन से पूछताछ करना तय किया गया है।
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