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नांदेड़ में मरीजों की मौत का मामला: अस्पताल के डीन और डॉक्टरों के खिलाफ FIR दर्ज, NHRC ने जारी किया नोटिस
Thu, 05 Oct 2023 01:05 PM IST
श्वेता महतो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: श्वेता महतो
Updated Thu, 05 Oct 2023 01:05 PM IST
सार
महाराष्ट्र के चिकित्सा शिक्षा मंत्री हसन मुशरिफ ने बुधवार को बताया कि मामले की व्यापक जांच होगी और इस मामले की जांच के लिए डॉक्टरों की समिति भी गठित की जाएगी।
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Nanded Government Hospital
- फोटो : Social Media
विस्तार
महाराष्ट्र के नांदेड़ में दो दिन के भीतर कई मरीजों की मौत के बाद डॉ. शंकरराव चव्हाण मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के प्रसव विभाव के डॉक्टरों और डीन के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है। महाराष्ट्र पुलिस के अनुसार उनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 304 और 34 के तहत एफआईआर दर्ज किया गया है।
एफआईआर दर्ज होने के बाद अस्पताल के डीन श्यामराव वाकोडे ने कहा, 'मैंने भी मीडिया में देखा कि ऐसा मामला दर्ज हुआ है, लेकिन मेरे पास कोई आधिकारिक कागज उपलब्ध नहीं है।' दवाइयों की कमी के कारण करीब 31 मरीजों की मौत हो गई थी। अस्पताल में 30 सितंबर से एक अक्तूबर के बीच नवजात शिशुओं समेत करीब 24 मरीजों की मौत हुई थी। वहीं मंगलवार को सात अन्य मरीजों के भी मरने की खबर सामने आई है। इस घटना के बाद मरीजों के परिजनों ने अस्पताल में दवाइयों की कमी और लापरवाही का आरोप लगाया है।
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जांच के लिए होगा डॉक्टरों की समिति का गठन
महाराष्ट्र के चिकित्सा शिक्षा मंत्री हसन मुशरिफ ने बुधवार को बताया कि मामले की व्यापक जांच होगी और इस मामले की जांच के लिए डॉक्टरों की समिति भी गठित की जाएगी। हालांकि, अस्पताल ने लापरवाही के आरोपों का नकारते हुए यह दावा किया था कि मारे गए मरीज मधुमेह, यकृत और किडनी विफलता जैसी विभिन्न बीमारियों से जूझ रहे थे।
इस मामले पर जानकारी देते हुए नांदेड़ ASP अविनाश कुमार ने बताया, 'नांदेड़ में एक पीड़िता के नवजात शिशु की मृत्यु की FIR दर्ज की गई है। डीन और संबंधित विभाग के मुख्य मेडिकल अधिकारी के खिलाफ FIR की गई है। मेडिकल कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।'
अस्पताल के डीन श्यामराव वाकोडे ने कहा कि अस्पताल में दवाइयों की कोई कमी नहीं है। मरीजों का अच्छे से देखभाल किया जा रहा है, लेकिन उनका शरीर इलाज पर प्रतिक्रिया नहीं दे पा रहा था। कांग्रेस राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने इस घटना को बेहद दर्दनाक, गंभीर और चिंताजनक बताया है। उन्होंने इस मामले पर विस्तृत जांच की भी मांग की है। इस घटना के बाद बीआरएस एमएलसी सुप्रिया सुले मरने वाले मरीजों के परिजनों से मुलाकात करने पहुंची।
एनएचआरसी ने महाराष्ट्र सरकार को नोटिस दिया
एनएचआरसी ने 24 घंटे के भीतर नांदेड़ और छत्रपति संभाजीनगर जिलों के दो सरकारी अस्पतालों में बड़ी संख्या में मरीजों की मौतों का स्वत: संज्ञान लेते हुए चिंता जाहिर की है। साथ ही इस मामले में महाराष्ट्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। इतना ही नहीं, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने अपने विशेष प्रतिवेदक पीएन दीक्षित को दो अस्पतालों का दौरा करने के लिए कहा है।
एनएचआरसी ने चार अक्तूबर को आई एक मीडिया रिपोर्ट पर स्वत: संज्ञान लिया है। इस रिपोर्ट में कहा गया था कि महाराष्ट्र के नांदेड़ और छत्रपति संभाजी नगर जिलों में स्थित दो सरकारी अस्पतालों में चौबीस घंटों के भीतर बड़ी संख्या में मरीजों की मौत हो गई। इसमें यह भी बताया गया है कि मरीजों की मौत के पीछे कथित तौर पर चिकित्सा सहायता की कमी और आवश्यक दवाओं की कमी थी।
चार महीने में सकारात्मक बदलाव होंगे, सरकार हाईकोर्ट में दाखिल करेगी हलफनामा-मुश्रीफ
अस्पतालों में हुई मौतों को लेकर महाराष्ट्र के मंत्री हसन मुश्रीफ ने गुरुवार को बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि चार महीने के भीतर राज्य द्वारा संचालित अस्पतालों के कामकाज और चिकित्सा सुविधाओं में सकारात्मक बदलाव लाए जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार शुक्रवार को बॉम्बे हाई कोर्ट में एक हलफनामा दाखिल करेगी। इसमें सरकार द्वारा संचालित अस्पतालों में आने वाली कमियों और कठिनाइयों के साथ-साथ इन मुद्दों को सुधारने के लिए की गई कड़ी कार्रवाई का विवरण दिया जाएगा।
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एफआईआर दर्ज होने के बाद अस्पताल के डीन श्यामराव वाकोडे ने कहा, 'मैंने भी मीडिया में देखा कि ऐसा मामला दर्ज हुआ है, लेकिन मेरे पास कोई आधिकारिक कागज उपलब्ध नहीं है।' दवाइयों की कमी के कारण करीब 31 मरीजों की मौत हो गई थी। अस्पताल में 30 सितंबर से एक अक्तूबर के बीच नवजात शिशुओं समेत करीब 24 मरीजों की मौत हुई थी। वहीं मंगलवार को सात अन्य मरीजों के भी मरने की खबर सामने आई है। इस घटना के बाद मरीजों के परिजनों ने अस्पताल में दवाइयों की कमी और लापरवाही का आरोप लगाया है।
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जांच के लिए होगा डॉक्टरों की समिति का गठन
महाराष्ट्र के चिकित्सा शिक्षा मंत्री हसन मुशरिफ ने बुधवार को बताया कि मामले की व्यापक जांच होगी और इस मामले की जांच के लिए डॉक्टरों की समिति भी गठित की जाएगी। हालांकि, अस्पताल ने लापरवाही के आरोपों का नकारते हुए यह दावा किया था कि मारे गए मरीज मधुमेह, यकृत और किडनी विफलता जैसी विभिन्न बीमारियों से जूझ रहे थे।
इस मामले पर जानकारी देते हुए नांदेड़ ASP अविनाश कुमार ने बताया, 'नांदेड़ में एक पीड़िता के नवजात शिशु की मृत्यु की FIR दर्ज की गई है। डीन और संबंधित विभाग के मुख्य मेडिकल अधिकारी के खिलाफ FIR की गई है। मेडिकल कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।'
अस्पताल के डीन श्यामराव वाकोडे ने कहा कि अस्पताल में दवाइयों की कोई कमी नहीं है। मरीजों का अच्छे से देखभाल किया जा रहा है, लेकिन उनका शरीर इलाज पर प्रतिक्रिया नहीं दे पा रहा था। कांग्रेस राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने इस घटना को बेहद दर्दनाक, गंभीर और चिंताजनक बताया है। उन्होंने इस मामले पर विस्तृत जांच की भी मांग की है। इस घटना के बाद बीआरएस एमएलसी सुप्रिया सुले मरने वाले मरीजों के परिजनों से मुलाकात करने पहुंची।
एनएचआरसी ने महाराष्ट्र सरकार को नोटिस दिया
एनएचआरसी ने 24 घंटे के भीतर नांदेड़ और छत्रपति संभाजीनगर जिलों के दो सरकारी अस्पतालों में बड़ी संख्या में मरीजों की मौतों का स्वत: संज्ञान लेते हुए चिंता जाहिर की है। साथ ही इस मामले में महाराष्ट्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। इतना ही नहीं, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने अपने विशेष प्रतिवेदक पीएन दीक्षित को दो अस्पतालों का दौरा करने के लिए कहा है।
एनएचआरसी ने चार अक्तूबर को आई एक मीडिया रिपोर्ट पर स्वत: संज्ञान लिया है। इस रिपोर्ट में कहा गया था कि महाराष्ट्र के नांदेड़ और छत्रपति संभाजी नगर जिलों में स्थित दो सरकारी अस्पतालों में चौबीस घंटों के भीतर बड़ी संख्या में मरीजों की मौत हो गई। इसमें यह भी बताया गया है कि मरीजों की मौत के पीछे कथित तौर पर चिकित्सा सहायता की कमी और आवश्यक दवाओं की कमी थी।
चार महीने में सकारात्मक बदलाव होंगे, सरकार हाईकोर्ट में दाखिल करेगी हलफनामा-मुश्रीफ
अस्पतालों में हुई मौतों को लेकर महाराष्ट्र के मंत्री हसन मुश्रीफ ने गुरुवार को बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि चार महीने के भीतर राज्य द्वारा संचालित अस्पतालों के कामकाज और चिकित्सा सुविधाओं में सकारात्मक बदलाव लाए जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार शुक्रवार को बॉम्बे हाई कोर्ट में एक हलफनामा दाखिल करेगी। इसमें सरकार द्वारा संचालित अस्पतालों में आने वाली कमियों और कठिनाइयों के साथ-साथ इन मुद्दों को सुधारने के लिए की गई कड़ी कार्रवाई का विवरण दिया जाएगा।