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Namami Gange Project: यूएन से लेकर विश्व बैंक तक, जानें नमामि गंगे परियोजना को कहां-कहां प्रसिद्धि मिली
Mon, 04 Nov 2024 12:19 PM IST
संध्या
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
Published by: संध्या
Updated Mon, 04 Nov 2024 12:19 PM IST
सार
Namami Gange Project: केंद्र सरकार ने 10 जुलाई 2014 को संसद में पेश किए बजट में नमामि गंगे परियोजना शुरू करने की घोषणा की थी। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य गंगा नदी में प्रदूषण कम करने, नदी का संरक्षण और कायाकल्प करना था।
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नमामि गंगे मिशन।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
4 नवंबर को हरिद्वार के चंडी घाट पर गंगा उत्सव 2024 का भव्य आयोजन हो रहा है। यह कार्यक्रम राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) द्वारा आयोजित किया जा रहा है। हर साल गंगा उत्सवका आयोजन गंगा नदी को 'राष्ट्रीय नदी' घोषित किए जाने की वर्षगांठ के उपलक्ष्य में किया जाता है। कार्यक्रम में कई विषयों के बारे में चर्चा होगी साथ ही गंगा नदी को स्वच्छ बनाने के लिए लोगों को जागरूक भी किया जाएगा। देश की सबसे प्रमुख नदी की सफाई को लेकर केंद्र सरकार ने 2014 में नमामि गंगे कार्यक्रम शुरू किया था। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य गंगा नदी का संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण करके उसको स्वच्छ बनाना था। जहां इस कार्यक्रम से नदी की सेहत में व्यापक बदलाव आया है तो वहीं इस परियोजना ने देश और दुनिया में नाम कमाया है।
हम आपको बताते हैं कि नमामि गंगे परियोजना क्या है? इस परियोजना को किस-किस क्षेत्र में प्रसिद्धि मिली है?
नमामि गंगे परियोजना क्या है?
केंद्र सरकार ने 10 जुलाई 2014 को संसद में पेश किए बजट में नमामि गंगे परियोजना शुरू करने की घोषणा की थी। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य गंगा नदी में प्रदूषण कम करने, नदी का संरक्षण और कायाकल्प करना था। इस कार्यक्रम के तहत गंगा नदी की सफाई और पुनरुद्धार के लिए कई काम किए गए। इनमें अपशिष्ट जल उपचार, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, नदी तट प्रबंधन (घाट और श्मशान), जैव विविधता संरक्षण शामिल है।
नमामि गंगे परियोजना को कहां-कहां प्रसिद्धि मिली है?
नमामि गंगे मिशन को संयुक्त राष्ट्र दशक द्वारा शीर्ष दस बहाली फ्लैगशिप में से एक के रूप में मान्यता हासिल है। यह मान्यता 13 दिसंबर 2022 को मॉन्ट्रियल, कनाडा में संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन जैविक विविधता (COP 15) के दौरान मिली थी।
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2021-2030 को यूएनजीए द्वारा पारिस्थितिकी तंत्र बहाली का दशक घोषित किया गया। इसमें सतत विकास लक्ष्यों और राष्ट्रीय प्राथमिकताओं को प्राप्त करने के लिए पारिस्थितिकी तंत्र की बहाली को एक प्रमुख प्रकृति-आधारित समाधान के रूप में स्थान दिया गया।
संयुक्त राष्ट्र जल सम्मेलन -2023 में भागीदारी
नमामि गंगे संयुक्त राष्ट्र जल सम्मेलन के दौरान संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में एक साइड इवेंट आयोजित करने वाली एकमात्र भारतीय संस्था रही। 'नमामि गंगे - गंगा नदी और इसके पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण और कायाकल्प के लिए एक एकीकृत और समग्र दृष्टिकोण' में 13 देशों डेनमार्क, मिस्र, यूरोपीय संघ, फ्रांस, इस्राइल, वियतनाम, कनाडा, इंडोनेशिया, यूनाइटेड किंगडम, सिंगापुर, यूएई, जापान और बांग्लादेश के साथ द्विपक्षीय बैठकें आयोजित की गईं।
नेशनल जियोग्राफिक की तरफ से 'आसमान से गंगा-नदी' को सर्वश्रेष्ठ वृत्तचित्र, सर्वश्रेष्ठ समसामयिक प्रसंग और सर्वश्रेष्ठ प्राकृतिक इतिहास या वन्यजीव कार्यक्रम का सम्मान भी मिल चुका है।
आगरा में विश्व बैंक के कार्यकारी निदेशकों की बैठक
100 देशों का प्रतिनिधित्व करने वाले विश्व बैंक के 12 कार्यकारी निदेशकों (ईडी) की यात्रा के हिस्से के रूप में 5 अगस्त 2023 को आगरा में एक बैठक आयोजित की गई थी। यह प्रतिनिधिमंडल भारत की परिवर्तनकारी प्रगति और भारत में विश्व बैंक द्वारा वित्तपोषित कुछ परियोजनाओं को देखने के लिए आया था।
बैठक में राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) के महानिदेशक जी अशोक कुमार ने एक विस्तृत प्रस्तुति दी थी। इस अवसर पर विश्व बैंक, भारत के कंट्री डायरेक्टर ऑगस्टे कौमे भी उपस्थित थे।
आईडब्ल्यूए द्वारा जलवायु स्मार्ट उपयोगिता मान्यता
एनएमसीजी को अंतर्राष्ट्रीय जल संघ (आईडब्ल्यूए) द्वारा 'जलवायु स्मार्ट उपयोगिता' के रूप में मान्यता दी गई है। यह मान्यता 'आईडब्ल्यूए क्लाइमेट स्मार्ट यूटिलिटीज इनिशिएटिव - मान्यता कार्यक्रम' के तहत दी गई है।
रवांडा में 2023 में आयोजित की गई आईडब्ल्यूए जल एवं विकास कांग्रेस एवं प्रदर्शनी में एनएमसीजी को भाग लेने के लिए आमंत्रित किया गया था।
जिला गंगा योजना एवं पुस्तिका का शुभारंभ
जीआईजेड ने डीजीसी के साथ समन्वय में उधम सिंह नगर, उत्तराखंड और शाहजहांपुर, यूपी के लिए जिला गंगा योजना और जिला गंगा योजना पुस्तिका तैयार की। इस पुस्तिका का शुभारंभ 27 सितंबर 2023 को इंडो-जर्मनी द्विपक्षीय सहयोग परियोजना के तहत आयोजित एक कार्यक्रम में किया गया था। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ ने डीजीसी के साथ मिलकर मुरादाबाद और बरेली, यूपी के लिए जिला गंगा योजना तैयार की।
ग्लोबल रिवर सिटीज अलायंस (जीआरसीए) का शुभारंभ
ग्लोबल रिवर सिटीज अलायंस (जीआरसीए) का शुभारंभ दुबई में सीओपी-28 में भारत सहित नौ देशों के प्रतिनिधियों द्वारा 10 दिसंबर 2023 को किया गया।
एमआरटीसीआई के साथ साझा उद्देश्यों के ज्ञापन पर हस्ताक्षर
रिवर सिटीज अलायंस (आरसीए) की ओर से डीजी एनएमसीजी ने 6 दिसंबर 2023 को 124 सदस्य शहर/कस्बों वाले मिसिसिपी रिवर सिटीज एंड टाउन्स इनिशिएटिव (एमआरसीटीआई) के साथ एमओसीपी पर हस्ताक्षर किए थे।
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हम आपको बताते हैं कि नमामि गंगे परियोजना क्या है? इस परियोजना को किस-किस क्षेत्र में प्रसिद्धि मिली है?
नमामि गंगे परियोजना क्या है?
केंद्र सरकार ने 10 जुलाई 2014 को संसद में पेश किए बजट में नमामि गंगे परियोजना शुरू करने की घोषणा की थी। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य गंगा नदी में प्रदूषण कम करने, नदी का संरक्षण और कायाकल्प करना था। इस कार्यक्रम के तहत गंगा नदी की सफाई और पुनरुद्धार के लिए कई काम किए गए। इनमें अपशिष्ट जल उपचार, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, नदी तट प्रबंधन (घाट और श्मशान), जैव विविधता संरक्षण शामिल है।
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नमामि गंगे परियोजना को कहां-कहां प्रसिद्धि मिली है?
नमामि गंगे मिशन को संयुक्त राष्ट्र दशक द्वारा शीर्ष दस बहाली फ्लैगशिप में से एक के रूप में मान्यता हासिल है। यह मान्यता 13 दिसंबर 2022 को मॉन्ट्रियल, कनाडा में संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन जैविक विविधता (COP 15) के दौरान मिली थी।
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2021-2030 को यूएनजीए द्वारा पारिस्थितिकी तंत्र बहाली का दशक घोषित किया गया। इसमें सतत विकास लक्ष्यों और राष्ट्रीय प्राथमिकताओं को प्राप्त करने के लिए पारिस्थितिकी तंत्र की बहाली को एक प्रमुख प्रकृति-आधारित समाधान के रूप में स्थान दिया गया।
संयुक्त राष्ट्र जल सम्मेलन -2023 में भागीदारी
नमामि गंगे संयुक्त राष्ट्र जल सम्मेलन के दौरान संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में एक साइड इवेंट आयोजित करने वाली एकमात्र भारतीय संस्था रही। 'नमामि गंगे - गंगा नदी और इसके पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण और कायाकल्प के लिए एक एकीकृत और समग्र दृष्टिकोण' में 13 देशों डेनमार्क, मिस्र, यूरोपीय संघ, फ्रांस, इस्राइल, वियतनाम, कनाडा, इंडोनेशिया, यूनाइटेड किंगडम, सिंगापुर, यूएई, जापान और बांग्लादेश के साथ द्विपक्षीय बैठकें आयोजित की गईं।
नेशनल जियोग्राफिक की तरफ से 'आसमान से गंगा-नदी' को सर्वश्रेष्ठ वृत्तचित्र, सर्वश्रेष्ठ समसामयिक प्रसंग और सर्वश्रेष्ठ प्राकृतिक इतिहास या वन्यजीव कार्यक्रम का सम्मान भी मिल चुका है।
आगरा में विश्व बैंक के कार्यकारी निदेशकों की बैठक
100 देशों का प्रतिनिधित्व करने वाले विश्व बैंक के 12 कार्यकारी निदेशकों (ईडी) की यात्रा के हिस्से के रूप में 5 अगस्त 2023 को आगरा में एक बैठक आयोजित की गई थी। यह प्रतिनिधिमंडल भारत की परिवर्तनकारी प्रगति और भारत में विश्व बैंक द्वारा वित्तपोषित कुछ परियोजनाओं को देखने के लिए आया था।
बैठक में राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) के महानिदेशक जी अशोक कुमार ने एक विस्तृत प्रस्तुति दी थी। इस अवसर पर विश्व बैंक, भारत के कंट्री डायरेक्टर ऑगस्टे कौमे भी उपस्थित थे।
आईडब्ल्यूए द्वारा जलवायु स्मार्ट उपयोगिता मान्यता
एनएमसीजी को अंतर्राष्ट्रीय जल संघ (आईडब्ल्यूए) द्वारा 'जलवायु स्मार्ट उपयोगिता' के रूप में मान्यता दी गई है। यह मान्यता 'आईडब्ल्यूए क्लाइमेट स्मार्ट यूटिलिटीज इनिशिएटिव - मान्यता कार्यक्रम' के तहत दी गई है।
रवांडा में 2023 में आयोजित की गई आईडब्ल्यूए जल एवं विकास कांग्रेस एवं प्रदर्शनी में एनएमसीजी को भाग लेने के लिए आमंत्रित किया गया था।
जिला गंगा योजना एवं पुस्तिका का शुभारंभ
जीआईजेड ने डीजीसी के साथ समन्वय में उधम सिंह नगर, उत्तराखंड और शाहजहांपुर, यूपी के लिए जिला गंगा योजना और जिला गंगा योजना पुस्तिका तैयार की। इस पुस्तिका का शुभारंभ 27 सितंबर 2023 को इंडो-जर्मनी द्विपक्षीय सहयोग परियोजना के तहत आयोजित एक कार्यक्रम में किया गया था। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ ने डीजीसी के साथ मिलकर मुरादाबाद और बरेली, यूपी के लिए जिला गंगा योजना तैयार की।
ग्लोबल रिवर सिटीज अलायंस (जीआरसीए) का शुभारंभ
ग्लोबल रिवर सिटीज अलायंस (जीआरसीए) का शुभारंभ दुबई में सीओपी-28 में भारत सहित नौ देशों के प्रतिनिधियों द्वारा 10 दिसंबर 2023 को किया गया।
एमआरटीसीआई के साथ साझा उद्देश्यों के ज्ञापन पर हस्ताक्षर
रिवर सिटीज अलायंस (आरसीए) की ओर से डीजी एनएमसीजी ने 6 दिसंबर 2023 को 124 सदस्य शहर/कस्बों वाले मिसिसिपी रिवर सिटीज एंड टाउन्स इनिशिएटिव (एमआरसीटीआई) के साथ एमओसीपी पर हस्ताक्षर किए थे।