नगालैंड फायरिंग: पीड़ितों के परिवारों ने मुआवजा लेने से किया इनकार, लोगों ने कहा- हमें न्याय मिलना चाहिए
मृतकों के अंतिम संस्कार के बीच राज्य मंत्री एवं जिला उपायुक्त 18.30 लाख रुपये के मुआवजे की पहली किस्त लेकर पहुंचे थे, लेकिन पीड़ितों के परिवार ने पैसे लेने से इनकार कर दिया।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
नगालैंड के मोन जिले के ओटिंग में सुरक्षा बलों द्वारा की गई गोलीबारी में 14 लोग मारे गए। परिवारों ने न्याय की मांग करते हुए कहा कि हम तब तक किसी भी सरकारी मुआवजे को लेने से इनकार करते हैं, जब तक की गोलीबारी में शामिल लोगों को कटघरे में खड़ा नहीं किया जाता। ओटिंग ग्राम परिषद् ने एक बयान देते हुए कहा कि जब स्थानीय लोग मृतकों के अंतिम संस्कार एवं अन्य कार्यों में व्यस्त थे। तब राज्य मंत्री पी. पेवांग कोन्याक एवं जिला उपायुक्त 18.30 लाख की राशि लेकर आए थे। पहले तो लोगों ने इसे मंत्री के प्यार,सहानुभूति एंव उपहार का प्रतीक माना, लेकिन बादमें पता चला कि यह राज्य मंत्री द्वारा मृतकों एवं घायलों के परिवार को दिए जाने वाले मुआवजे की पहली किस्त थी।
इस पर प्रतिक्रिया जाहिर करते ओटिंग ग्राम परिषद् एवं ग्रामीणों ने बयान दिया गया कि ओटिंग ग्राम परिषद् और ग्रामीण जन इस मुआवजे को तब तक स्वीकार नहीं करेंगे जब तक कि भारतीय सशस्त्र बल के 21वें पैरा कमांडो को निरस्त करने से पहले नागरिक सहिंता एवं सशस्त्र बल विशेष अधिनियम (एएफएसपीए) के समक्ष न्याय हेतू कटघरे में खड़ा नहीं किया जाता।
रविवार को जारी इस बयान में ग्राम परिषद् के अध्यक्ष लोंगवांग कोन्याक, आंग (राजा) तहवांग, उपआंग चिंगवांग, एवं मोंगनेई और न्यानेई गांव बुराह (ग्राम सरदारों) द्वारा हस्ताक्षर किए गए। पुलिस के अनुसार, जिले में 4-5 दिसंबर को हुई उग्रवादी विरोधी हिंसा में लगभग 14 लोग और 1 सैनिक मारा गया। इस दौरान मृतकों के परिवारों नेकिसी भी प्रकार के मुआवजे के लिए तब तक इनकार किया है जब तक कि उन्हें इंसाफ नहीं मिल जाता हैं।