इस्राइल में नई सरकार की कवायद: पूर्व PM बेनेट की पार्टी ने आइजेनकोट को दिया समर्थन; नेतन्याहू की बढ़ी चुनौती
इस्राइल में नई सरकार के गठन को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। पूर्व प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट के नेतृत्व वाली बी'याचाद पार्टी ने गादी आइजेनकोट को सरकार बनाने के लिए समर्थन दिया है। राष्ट्रपति इसाक हर्जोग के साथ बैठक में पार्टी प्रतिनिधियों ने उनके नाम की सिफारिश की। फिलहाल इस्राइल की सत्ता की चाबी बहुमत जुटाने वाले गठबंधन के हाथ में होगी।
विस्तार
इस्राइल में नई सरकार के गठन को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। पूर्व प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट के नेतृत्व वाली बी'याचाद पार्टी ने गादी आइजेनकोट को अगली सरकार बनाने के लिए अपना समर्थन दे दिया है। गुरुवार को राष्ट्रपति इसाक हर्जोग के साथ हुई मुलाकात के दौरान पार्टी के प्रतिनिधियों ने आधिकारिक तौर पर आइजेनकोट के नाम की सिफारिश की।
क्या नेतन्याहू की कुर्सी जाएगी?
इस्राइल की 120 सदस्यीय संसद में सरकार बनाने के लिए 61 सांसदों का समर्थन जरूरी है। राजनीतिक गठबंधनों के आंकड़े बताते हैं कि सरकार गठन का रास्ता अभी आसान नहीं है। विपक्षी दलों के बीच भी कुछ मुद्दों पर मतभेद हैं, खासकर अरब दलों और अन्य धार्मिक दलों के साथ संभावित गठबंधन को लेकर। ऐसे में आइजेनकोट को समर्थन मिलने के बावजूद सरकार बनाने के लिए जरूरी राजनीतिक सहमति तैयार करना अहम चुनौती होगी।
रविवार को राष्ट्रपति करेंगे बड़ा फैसला
राष्ट्रपति इसाक हर्जोग ने 5 नवंबर को घोषणा की कि वह रविवार को किसी एक सांसद को सरकार बनाने का औपचारिक जिम्मा सौंपने का फैसला करेंगे। नियमानुसार, जिसे सरकार बनाने का मौका मिलेगा, उसे गठबंधन तैयार करने के लिए शुरुआती तौर पर 28 दिन का समय दिया जाएगा। जरूरत पड़ने पर 14 दिनों का अतिरिक्त समय भी मिल सकता है।
चुनाव परिणाम और गुटों की स्थिति क्या है?
अक्तूबर 27 को हुए चुनावों में 120 सदस्यीय सदन में नेतन्याहू के नेतृत्व वाले गुट ने 53 सीटें जीती थीं। नेतन्याहू विरोधी गुट, जिसे 'परिवर्तन गुट' भी कहा गया, को 48 सीटें मिलीं। शेष 19 सीटें अरब दलों के खाते में गईं, जिससे खंडित जनादेश सामने आया। नेतन्याहू गुट की यूनाइटेड तोराह जूडाइज्म पार्टी ने उन्हें सिफारिश नहीं दी, जिससे प्रधानमंत्री के लिए सिफारिशों की संख्या 46 हो गई। अरब दलों ने अनिच्छा से आइजेनकोट की सिफारिश की, जिसका उद्देश्य नेतन्याहू को सत्ता से बाहर करना था।
अरब दलों के साथ गठबंधन में क्या बाधा है?
दोनों गुटों ने अरब दलों के साथ गठबंधन करने से सामान्य तौर पर परहेज किया है। दोनों गुटों की अधिकांश पार्टियों ने, डेमोक्रेट्स को छोड़कर, अरब दलों के साथ सरकार में बैठने से मना किया है। अरब दलों को सत्तारूढ़ गठबंधन में लाने में मुख्य बाधा हमास को आतंकवादी संगठन घोषित करने की उनकी अनिच्छा है। 7 अक्तूबर, 2023 के घातक हमलों के बाद यह बात अधिकांश यहूदी आबादी को अस्वीकार्य है।