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RT-PCR Kit: इस एक किट से इन सात मानसूनी बीमारियों की होगी जांच, दो घंटे मिल सकेगी रिपोर्ट

Fri, 15 Jul 2022 06:05 PM IST
Harendra Chaudhary डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Fri, 15 Jul 2022 06:05 PM IST
सार

जानकारी के अनुसार, कंपनी ने मानसून में होने वाली बीमारियों को ध्यान में रखते हुए यह किट तैयार की है। इस किट की मदद से मलेरिया, चिकनगुनिया, डेंगू और जीका सहित सात बीमारियों में अंतर का पता लगाया जा सकता है। मायलैब को ही पहला स्वदेशी कोविड आरटी-पीसीआर और फिर रैपिड एंटीजन टेस्ट किट बनाने का श्रेय भी जाता है...

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Mylab new RT-PCR test kit can detect Malaria, Chikungunya, Dengue, Zika, Leptospirosis, Salmonellosis bacterial species, Leishmaniasis parasite
कोरोना की जांच कराते लोग - फोटो : अमर उजाला (फाइल फोटो)

विस्तार

बरसात के मौसम में होने वाली बीमारियों की जांच के लिए पुणे स्थित माईलैब डिस्कवरी सॉल्युशंस ने ऐसी बीमारियों की जांच के लिए पहली संयुक्त आरटी-पीसीआर किट पेश की है। इस किट की खास बात यह है कि इससे सात बीमारियों का पता लगाया जा सकेगा। इसके अलावा कंपनी ने दावा किया है कि पूरी किट से सैंपल निकालने के बाद मलेरिया, चिकनगुनिया, डेंगू, जीका जैसी बीमारियों के नतीजे दो घंटे में आ जाते हैं, जिससे एक बड़ी आबादी की जांच आसानी से हो सकती है।

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जानकारी के अनुसार, कंपनी ने मानसून में होने वाली बीमारियों को ध्यान में रखते हुए यह किट तैयार की है। इस किट की मदद से मलेरिया, चिकनगुनिया, डेंगू और जीका सहित सात बीमारियों में अंतर का पता लगाया जा सकता है। मायलैब को ही पहला स्वदेशी कोविड आरटी-पीसीआर और फिर रैपिड एंटीजन टेस्ट किट बनाने का श्रेय भी जाता है।
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मानसून में मच्छर जनित रोग मलेरिया, डेंगू और चिकनगुनिया के मामलों में वृद्धि देखी जाती है। मायलैब ने एक बुखार पैनल विकसित किया है, जो सभी मानसून जनित रोगों की जांच के लिए आरटी-पीसीआर किट से उसकी जांच करेगा। कंपनी ने यह भी दावा है कि यह मलेरिया, चिकनगुनिया, डेंगू, जीका, लेप्टोपायरोसिस, सैलमोनेलोसिस बैक्टीरियाजनित बीमारियों का पता लगाता है और उसके अंतर के बारे में भी बताता है।
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इस पूरे किट से सैंपल निकालने के बाद दो घंटे में नतीजे आ जाते हैं, जिससे एक बड़ी आबादी की जांच आसानी से हो सकती है। सटीक और विश्वसनीय परीक्षण नहीं होने के कारण इनमें से कई बीमारियां चुनौती बनी हुई हैं। दुनियाभर में 17 फीसदी संक्रामक बीमारियां वेक्टर के कारण फैलती हैं और इनसे हर साल सात लाख लोगों की जानें जाती हैं।

भारत बायोटेक बनाएगी जीका वायरस का टीका

मच्छरों से फैलने वाले जीका वायरस संक्रमण का टीका अब जल्द ही उपलब्ध हो सकेगा। कोरोना वायरस की वैक्सीन बनाने वाली कंपनी भारत बायोटेक ने फिर से जीका के टीके को लेकर काम शुरु कर दिया है। कंपनी इस टीके का मनुष्यों पर दूसरे चरण का चिकित्सकीय परीक्षण शुरू करने जा रही है।



जीका वायरस का इंफेक्शन मच्छर के काटने से फैलता है। ये बीमारी एडीज मच्छर से फैलती है, जो दिन के समय ज्यादा एक्टिव रहते हैं। जीका वायरस से होने वाला संक्रमण इतना खतरनाक होता है कि कई बार इसमें अस्पताल में भर्ती होना पड़ जाता है। अगर किसी प्रेग्नेंट महिला को ये संक्रमण हो जाए तो इससे गर्भ में पल रहे शिशु के दिमाग पर भी बुरा असर पड़ता है।

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