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Manipur: म्यांमार से भारत आ रहे हथियार, मणिपुर में उग्रवादी संगठनों की बड़ी साजिश का खुलासा; UNLF-P पर आरोप
Sun, 06 Jul 2025 06:31 PM IST
पवन पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंफाल / नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंफाल / नई दिल्ली
Published by: पवन पांडेय
Updated Sun, 06 Jul 2025 06:31 PM IST
सार
सुरक्षा एजेंसियां इस नेटवर्क को गंभीर खतरा मान रही हैं, क्योंकि म्यांमार से विदेशी हथियारों का आना, देश के अलग-अलग हिस्सों में बेचना, फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल और शांति समझौते की आड़ में यह सब करना, देश की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा है। जांच अब अन्य राज्यों में फैल चुकी है और रिचर्ड से मिली जानकारी के आधार पर और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : X @manipur_police
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विस्तार
मणिपुर में सुरक्षा एजेंसियों ने म्यांमार से हथियारों की तस्करी से जुड़ी एक बड़ी साजिश का भंडाफोड़ किया है, जिसका असर पूरे देश में हो सकता है। जांच एक ऐसे मामले पर केंद्रित है जिसमें प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन यूनाइटेड नेशनल लिबरेशन फ्रंट (यूएनएलएफ-पी) के कुछ सदस्यों पर म्यांमार से हथियार मंगवाकर उन्हें देश के अलग-अलग हिस्सों में बेचने का आरोप है।
मुख्य आरोपी 'रिचर्ड' गिरफ्तार
इस मामले में पुलिस ने बीते जून के आखिरी हफ्ते में चार लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें सबसे अहम नाम सिनम सोमेन्द्रो मैतेई उर्फ 'रिचर्ड' का है, जो खुद को यूएनएलएफ-पी का लेफ्टिनेंट कर्नल और प्रोजेक्ट सेक्रेटरी बताता है। रिचर्ड की गिरफ्तारी इस संगठन की शांति प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े कर रही है।
यह भी पढ़ें - Odisha: 'माली में अगवा हुए भारतीयों के बदले फिरौती मांग रहे अलकायदा के आतंकी'; अपहृत युवक के रिश्तेदार का दावा
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शांति वार्ता के बावजूद हथियार नहीं जमा किए
यूएनएलएफ-पी ने नवंबर 2023 में सरकार से संघर्षविराम समझौता किया था। लेकिन इसके बाद से न तो संगठन ने अपने हथियार जमा किए हैं, न ही अपने सदस्यों की सूची दी है। इसके उलट कुछ सदस्य अब भी उगाही और अवैध गतिविधियों में लिप्त पाए जा रहे हैं।
हथियारों की तस्करी का खुलासा कैसे हुआ?
24 जून को इंफाल क्षेत्र में हथियारों की तस्करी से जुड़े एक गिरोह की जानकारी मिली। इसके आधार पर लोंचनबा नोंगथोंबम नामक गन हाउस के मालिक को हिरासत में लिया गया। उससे मिली जानकारी से रिचर्ड की भूमिका उजागर हुई।
कैसे हो रही थी तस्करी?
अधिकारियों के अनुसार, हथियार म्यांमार से भारत लाए जा रहे थे, खासकर मणिपुर की ढीली सीमा का फायदा उठाकर। फिर इन्हें फर्जी दस्तावेजों और कुछ रजिस्टर्ड गन हाउसों की मदद से भारत के अलग-अलग हिस्सों में बेचा जा रहा था। एक ऐसा मामला पंजाब में भी पकड़ा गया है। जांच देश के अन्य हिस्सों में भी की जा रही है। भारतीय शस्त्र अधिनियम की धारा 10 के तहत बिना अनुमति विदेशी हथियार लाना और बेचना एक गंभीर अपराध है। केवल अंतरराष्ट्रीय खेलों में भाग लेने वाले खिलाड़ियों को खास अनुमति से विदेशी हथियार लाने की छूट होती है।
यह भी पढ़ें - ONOE: 'एक साथ चुनाव कराना संविधान सम्मत', पूर्व मुख्य न्यायाधीशों ने EC को अत्यधिक शक्ति देने पर जताई चिंता
क्या-क्या बरामद हुआ?
रिचर्ड के घर छापेमारी में चार अमेरिकी हथियार, एक ऑस्ट्रियाई रिवॉल्वर, एक भारतीय पिस्तौल, कई गोलियां, वायरलेस सेट और महंगे मोबाइल फोन बरामद किए गए।
रिचर्ड का आपराधिक इतिहास
1995 में पहली बार यूएपीए (गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम) के तहत गिरफ्तार। 2005 और 2006 में उगाही और आतंकवाद के मामलों में फिर गिरफ्तार हुआ। 2006 में शिलांग में भी पकड़ा गया। 2003 में वह बांग्लादेश और गुवाहाटी के बीच उग्रवादियों को ले जाने और विदेशी मुद्रा के लेन-देन में शामिल था।
शांति समझौते की मंशा पर सवाल
यूएनएलएफ-पी ने 2023 में हथियार डालने और हिंसा छोड़ने का वादा किया था। लेकिन अब यह स्पष्ट हो रहा है कि कुछ सदस्य शांति प्रक्रिया का दुरुपयोग कर रहे हैं। सुरक्षा एजेंसियों ने पहले ही चेतावनी दी थी कि यह समझौता सिर्फ कार्रवाई से बचने की चाल हो सकती है। यूएनएलएफ-पी के कुछ सदस्य 2024 में भी हिंसक घटनाओं में शामिल पाए गए हैं और सुरक्षा बलों से हथियार तक लूटे गए हैं।
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मुख्य आरोपी 'रिचर्ड' गिरफ्तार
इस मामले में पुलिस ने बीते जून के आखिरी हफ्ते में चार लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें सबसे अहम नाम सिनम सोमेन्द्रो मैतेई उर्फ 'रिचर्ड' का है, जो खुद को यूएनएलएफ-पी का लेफ्टिनेंट कर्नल और प्रोजेक्ट सेक्रेटरी बताता है। रिचर्ड की गिरफ्तारी इस संगठन की शांति प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े कर रही है।
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शांति वार्ता के बावजूद हथियार नहीं जमा किए
यूएनएलएफ-पी ने नवंबर 2023 में सरकार से संघर्षविराम समझौता किया था। लेकिन इसके बाद से न तो संगठन ने अपने हथियार जमा किए हैं, न ही अपने सदस्यों की सूची दी है। इसके उलट कुछ सदस्य अब भी उगाही और अवैध गतिविधियों में लिप्त पाए जा रहे हैं।
हथियारों की तस्करी का खुलासा कैसे हुआ?
24 जून को इंफाल क्षेत्र में हथियारों की तस्करी से जुड़े एक गिरोह की जानकारी मिली। इसके आधार पर लोंचनबा नोंगथोंबम नामक गन हाउस के मालिक को हिरासत में लिया गया। उससे मिली जानकारी से रिचर्ड की भूमिका उजागर हुई।
कैसे हो रही थी तस्करी?
अधिकारियों के अनुसार, हथियार म्यांमार से भारत लाए जा रहे थे, खासकर मणिपुर की ढीली सीमा का फायदा उठाकर। फिर इन्हें फर्जी दस्तावेजों और कुछ रजिस्टर्ड गन हाउसों की मदद से भारत के अलग-अलग हिस्सों में बेचा जा रहा था। एक ऐसा मामला पंजाब में भी पकड़ा गया है। जांच देश के अन्य हिस्सों में भी की जा रही है। भारतीय शस्त्र अधिनियम की धारा 10 के तहत बिना अनुमति विदेशी हथियार लाना और बेचना एक गंभीर अपराध है। केवल अंतरराष्ट्रीय खेलों में भाग लेने वाले खिलाड़ियों को खास अनुमति से विदेशी हथियार लाने की छूट होती है।
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क्या-क्या बरामद हुआ?
रिचर्ड के घर छापेमारी में चार अमेरिकी हथियार, एक ऑस्ट्रियाई रिवॉल्वर, एक भारतीय पिस्तौल, कई गोलियां, वायरलेस सेट और महंगे मोबाइल फोन बरामद किए गए।
रिचर्ड का आपराधिक इतिहास
1995 में पहली बार यूएपीए (गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम) के तहत गिरफ्तार। 2005 और 2006 में उगाही और आतंकवाद के मामलों में फिर गिरफ्तार हुआ। 2006 में शिलांग में भी पकड़ा गया। 2003 में वह बांग्लादेश और गुवाहाटी के बीच उग्रवादियों को ले जाने और विदेशी मुद्रा के लेन-देन में शामिल था।
शांति समझौते की मंशा पर सवाल
यूएनएलएफ-पी ने 2023 में हथियार डालने और हिंसा छोड़ने का वादा किया था। लेकिन अब यह स्पष्ट हो रहा है कि कुछ सदस्य शांति प्रक्रिया का दुरुपयोग कर रहे हैं। सुरक्षा एजेंसियों ने पहले ही चेतावनी दी थी कि यह समझौता सिर्फ कार्रवाई से बचने की चाल हो सकती है। यूएनएलएफ-पी के कुछ सदस्य 2024 में भी हिंसक घटनाओं में शामिल पाए गए हैं और सुरक्षा बलों से हथियार तक लूटे गए हैं।
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