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म्यांमार संकट: मणिपुर में शरणार्थियों को नहीं घुसने दें, हाथ जोड़कर वापस भेजने के निर्देश
Mon, 29 Mar 2021 06:08 PM IST
सुरेंद्र जोशी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंफाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंफाल
Published by: सुरेंद्र जोशी
Updated Mon, 29 Mar 2021 06:08 PM IST
सार
- म्यांमार में तख्तापलट के बाद से हिंसा जारी
- ऐसे में वहां से विस्थापन का खतरा पैदा हो गया
- भारत में शरणार्थियों के घुसने की आशंका
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भारत-म्यामांर सीमा
- फोटो : पीटीआई
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विस्तार
म्यांमार में जारी सियासी व सैन्य संकट के चलते एक बार पुन: वहां के नागरिक भारत में शरणार्थी बनकर घुसने का प्रयास कर सकते हैं। ऐसे में मणिपुर सरकार ने अपने सीमावर्ती जिलों को निर्देश दिया है कि वह उन्हें देश में न घुसने दे। शरणार्थियों के लिए न राहत शिविर बनाएं न खाने-पीने के इंतजाम करें। वे शरण मांगने आएं तो उन्हें हाथ जोड़कर वापस भेजें।
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1643 किलोमीटर लंबी है भारत से लगी सीमा
म्यांमार से लगी भारत की करीब 1643 किलोमीटर लंबी सीमा है। फरवरी में हुए तख्तापलट के बाद से वहां सैन्य शासन व जनता के बीच लगातार टकराव चल रहा है। 400 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। सेना के दमनकारी रवैये के कारण बड़े पैमाने पर लोगों के देश छोड़ने व शरणार्थी बन दूसरे देशों में घुसने की आशंका है।
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इन जिलों को दिए निर्देश
मणिपुर से मीडिया रिपोर्ट मिली है कि राज्य के गृह विभाग ने सीमावर्ती जिलों चंदेल, तेंगनोपाल, कामजोंग, उकरूल, चूड़ाचंद्रपुर के प्रशासन से कहा है कि वह राज्य में म्यांमार के लोगों के अवैध प्रवेश पर नजर रखे और उन्हें रोकने के उचित कदम उठाए। इस बात का ध्यान रखें कि स्वैच्छिक संगठन व प्रशासन की ओर से कोई शरणार्थी कैंप न बनाया जाए। शरणार्थियों के लिए खाने पीने के इंतजाम भी नहीं किए जाएं। सिर्फ कोई घायल आए तो उसे मानवीय आधार पर मदद दी जाए।
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सेना कर रही लगातार दमन
म्यांमार में रविवार को भी हजारों प्रदर्शनकारियों ने लोकतंत्र वापसी की मांग करते हुए सड़कों पर उतरकर सैन्य तानाशाही का विरोध जताया, जबकि महज एक दिन पहले सुरक्षा बलों ने 100 से ज्यादा प्रदर्शनकारियों को अपनी गोलियों का निशाना बनाया था। पिछले महीने सैन्य तख्तापलट के बाद इस सबसे बड़े नरसंहार के बावजूद प्रदर्शनकारियों का विरोध नहीं थमना बेहद अहम माना जा रहा है।ऑनलाइन न्यूज सर्विस म्यांमार नाऊ के मुताबिक, शनिवार को सुरक्षा बलों के हाथों कम से कम 114 प्रदर्शनकारियों की मौत हुई, जिनमें बहुत सारे 16 साल के कम उम्र के बच्चे थे।