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Hindi News ›   India News ›   Muslim Rashtriya Manch celebrated Holi and Shab E Barat Indresh Kumar asks for world peace news in Hindi

मुस्लिम राष्ट्रीय मंच: इंद्रेश कुमार बोले- जंग नहीं रुकी तो सब बर्बाद होंगे, विश्वशांति की अपील की

Fri, 18 Mar 2022 10:10 PM IST
गौरव पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: गौरव पाण्डेय Updated Fri, 18 Mar 2022 10:10 PM IST
सार

मंच के सदस्यों ने देश की जनता से आह्वान किया कि होली की खुशियों और शब-ए-बरात की आस्था के बीच अपने अड़ोस-पड़ोस और समाज में एकता की मिसाल कायम करें।

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Muslim Rashtriya Manch celebrated Holi and Shab E Barat Indresh Kumar asks for world peace news in Hindi
इंद्रेश कुमार - फोटो : फाइल

विस्तार

मुस्लिम राष्ट्रीय मंच (एमआरएम) ने शुक्रवार को पूरे देश में जोश, उमंग और उत्साह के साथ होली और शब-ए-बरात का जश्न मनाया। एमआरएम के मुख्य संरक्षक इंद्रेश कुमार ने होली और शब-ए-बरात की बधाई देते हुए कहा कि धर्मों, मजहबों, जातियों से ऊपर उठ कर भारत, भारतीय, भारतीयता को अपनाते हुए देश को विकास और खुशहाली के रास्ते पर ले जाना चाहिए और बेहतर भविष्य के निर्माण में योगदान देना चाहिए। । 

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कुमार ने कहा कि शब-ए-बरात की रात मांगी गई दुआएं खुदा कबूल करता है। आइए हम सब दुआ करें कि हम सबके बीच प्रेम, सद्भाव बढ़े और हमारे सम्मिलित प्रयास से देश निरंतर प्रगति की ऊंचाई पर बढ़ता रहे। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के नेता ने इस मौके पर विश्वशांति की भी अपील की। 
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उन्होंने साफ संदेश दिया कि दुनिया भर की सरकारों को शांति, एकता, सद्भावना के लिए आगे आना होगा। उन्होंने दुनिया भर के सभी बड़े नेताओं से अपील करते हुए कहा कि मानवता की रक्षा और खुशहाली के लिए विश्वशांति जरूरी है, इसलिए रूस और यूक्रेन की खींच रही जंग पर तत्काल विराम लगना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर यह युद्ध नहीं रुका तो इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ेगा।
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इसके साथ ही इस मौके पर मंच के मीडिया प्रभारी शाहिद सईद ने कहा कि एमआरएम के लिए होली का उत्साह और उमंग पंजाबी के प्रसिद्ध सू़फी कवि बाबा बुल्ले शाह की उस रचना की तरह है जिसमें होली का ज़िक्र कुछ इस अंदाज में किया गया था कि 'होरी खेलूंगी कहकर बिस्मिल्लाह, नाम नबी की रतन चढ़ी, बूंद पड़ी इल्लल्लाह, रंग-रंगीली उही खिलावे, जो सखी होवे फना फी अल्लाह, होरी खेलूंगी कहकर बिस्मिल्लाह...।' 

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