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लोकसभा चुनाव 2019: मुस्लिम-ईसाई बहुल वायनाड में रामायण से जुड़े हैं 30 स्थलों के नाम

Fri, 19 Apr 2019 04:30 AM IST
गौरव द्विवेदी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोझिकोड
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोझिकोड Published by: गौरव द्विवेदी Updated Fri, 19 Apr 2019 04:30 AM IST
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Muslim-Christian majority Wayanad is associated with Ramayana, 30 names of land
राहुल गांधी वायनाड से नामांकन भरते हुए - फोटो : Twitter Congress @INCIndia

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के केरल की वायनाड लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने की घोषणा के बाद से ही राजनीतिक गलियारों में यह बात तेजी से फैली, कि कांग्रेस के परंपरागत वोट बैंक रहे अल्पसंख्यकों की बड़ी आबादी के कारण ही वह यहां से चुनाव लड़ने उतरे। उनकी नामांकन रैली में मुस्लिम लीग के झंडे फहराए जाने के बाद यह बात और बलवती हो गई। इसके लिए राहुल को आलोचना भी झेलनी पड़ीं। 

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मुस्लिम बहुलता वाले संसदीय क्षेत्र के रूप में इसे निरूपित करने वाले शायद इस तथ्य से अनजान हैं कि वायनाड जिले में करीब 30 स्थान ऐसे हैं जिनका नाम रामायण पर आधारित है। खास तौर से जनजातीय समुदायों द्वारा मौखिक रूप से रामायण का जो भाषायी स्वरूप स्थापित हुआ है, उससे उपजे नामों पर। रामायण पर आधारित नाम वाले स्थानों में यहां पलपल्ली के निकट आश्रमम कोल्ली स्थित वाल्मीकि आश्रम, अंबुकुटी माला, सीता माउंट जडायट्टकावु, काबानी नदी की सहायक कन्नाराम पुझा, पोंकुझी, रामपल्ली इरुलाम आदि प्रमुख हैं।
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ताड़का युद्धस्थल और सीता माउंट भी यहां

अंबुकुटी माला वह जगह है, जहां राम-लक्ष्मण का ताड़का के साथ युद्ध हुआ था। सीता माउंट पर मान्यता है कि सीता इसी जगह धरती में समाईं थीं। भगवान राम ने उन्हें रोकना चाहा, लेकिन कहा जाता है कि उनके बाल राम के हाथ में रह गए। लोगों का यह भी मानना है कि पुझा नदी के किनारे बैठकर सीता रोईं थीं, जब उन्हें राम के आदेश पर लक्ष्मण वन में छोड़ आए थे। वहीं रामपल्ली में भगवान राम ने विश्राम किया था। 
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हर समुदाय ने गढ़ा रामायण का स्वरूप

विशेषज्ञ कहते हैं, चाहे स्थानों के नाम हों या लोककथाएं और लोकगीत, या फिर कला, मंदिर, नदियां व पहाड़, यहां हर जगह रामायण जिंदा है। ये सभी मौखिक रूप से प्रचलित परंपराओं पर आधारित हैं, जो आदि रामायण की तरह मुख्य धारा से थोड़े अलग स्वरूप में हैं। यहां हर जनजातीय समुदाय ने अपने हिसाब से रामायण को गढ़ा है। यह उनकी संस्कृति और यहां तक कि पर्यावरण में भी परिलक्षित होता है। वायनाड और रामायण के कनेक्शन को लेकर किताब भी लिखी गई है, और डॉक्यूमेंट्री भी बनी है।

पर्यटन विभाग तैयार कर रहा ‘रामायण शृंखला’ 

वायनाड के जनजातीय समुदायों में मौखिक रूप से कही-सुनी जाती रही कहानियां, जो समृद्ध परम्पराओं का रूप ले चुकी हैं, के अनुसार रामायण में उल्लेखित कई प्रसंग वायनाड के आसपास घटित हुए। अब केरल का पर्यटन विभाग इन स्थानों को परस्पर प्रासंगिक रूप से जोड़ते हुए ‘रामायण शृंखला’ स्थापित करने की तैयारी कर रहा है। अफसरों के अनुसार, इसका प्रोजेक्ट तैयार हो चुका है। जिस तरह से रामायण काल से जुड़े स्थानों के कारण श्रीलंका में पर्यटन को बढ़ावा मिला, वैसी संभावनाएं वायनाड में हैं।

वायनाड: एक नजर

8,17,420 आबादी है। (इनमें करीब 18% जनजातीय, जो राज्य में सबसे ज्यादा)

हिंदू     49.48%
मुस्लिम     28.65%
ईसाई     21.34%
सिख     0.01%
बौद्ध     0.04%
जैन     0.22%

पिछले चुनावों में स्थिति

वर्ष           विजय             दल     
2014    एमआई शानवास     कांग्रेस

73.75% वोटिंग,  अंतरः 20,870

2009     एमआई शानवास     कांग्रेस   
74.73% वोटिंग,  अंतर: 1,53,439
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