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सुप्रीम कोर्ट: कश्मीरी पंडितों के नरसंहार की सीबीआई या एनआईए जांच की मांग को लेकर याचिका, जानें पूरा मामला

Thu, 24 Mar 2022 07:33 PM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Thu, 24 Mar 2022 07:33 PM IST
सार

याचिका में अपील की गई है कि वर्ष 1989-90, 1997 और 1998 में कश्मीरी पंडितों की हत्या और अन्य संबद्ध अपराधों के मामलों की जांच सीबीआई या एनआईए जैसी स्वतंत्र जांच एजेंसी को स्थानांतरित कर दी जाए।

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Murder of Kashmiri Pandits: Curative petition in SC to reconsider order rejecting plea for probe
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : amar ujala

विस्तार

कश्मीर घाटी में 1989-90 में हुए कश्मीरी पंडितों के नरसंहार मामले की जांच सीबीआई या राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) से कराने की मांग को लेकर बृहस्पतिवार को सुप्रीम कोर्ट में सुधारात्मक (क्यूरेटिव) याचिका दायर की गई। कश्मीरी पंडितों के संगठन ‘रूट्स इन कश्मीर’ द्वारा दायर याचिका में वर्ष 2017 में पारित सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई है जिसमें नरसंहार की जांच की मांग वाली एक याचिका को खारिज कर दिया गया था। 

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सुप्रीम कोर्ट ने 27 अप्रैल 2017 को यह कहते हुए याचिका खारिज कर दी थी कि याचिका में जो उदाहरण दिए गए हैं, वे वर्ष 1989-90 से संबंधित हैं और तब से 27 साल से अधिक समय बीत चुका हैं। इसलिए कोई सार्थक उद्देश्य सामने नहीं आ पाएगा क्योंकि देरी की वजह से साक्ष्य उपलब्ध होने की संभावना नहीं है। सुधारात्मक याचिका में दावा किया गया है कि जम्मू-कश्मीर पुलिस आतंकवादियों के खिलाफ अपराधों की जांच करने और सैकड़ों प्राथमिकी में कोई प्रगति करने में विफल रही है, लिहाजा इन सभी की जांच सीबीआई या एनआईए को सौंपी जानी चाहिए। 
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याचिका में 1989-90, 1997 और 1998 के दौरान कश्मीरी पंडितों की हत्या के लिए यासीन मलिक और फारूक अहमद डार उर्फ बिट्टा कराटे, जावेद नालका और अन्य आतंकवादियों की जांच और अभियोजन की मांग की गई है। 26 वर्ष बाद भी इन मामलों की जम्मू-कश्मीर पुलिस द्वारा जांच नहीं की गई है।
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मामले जम्मू-कश्मीर से बाहर स्थानांतरित किए जाएं
याचिका में अपील की गई है कि वर्ष 1989-90, 1997 और 1998 में कश्मीरी पंडितों की हत्या और अन्य संबद्ध अपराधों के मामलों की जांच सीबीआई या एनआईए जैसी स्वतंत्र जांच एजेंसी को स्थानांतरित कर दी जाए। याचिका में यह भी मांग की गई है कि कश्मीरी पंडितों की हत्या से संबंधित सभी प्राथमिकी व मामलों को जम्मू-कश्मीर राज्य से किसी अन्य राज्य में स्थानांतरित किया जाना चाहिए। याचिकाकर्ता संगठन का कहना है कि मामलों को दिल्ली हस्तांतरित करना बेहतर होगा। संगठन का कहना है कि मामले हस्तांतरित होने से गवाहों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी, जिससे गवाह स्वतंत्र रूप से और निडर होकर जांच एजेंसियों और न्यायालयों के सामने आ सकेंगे।


यासीन मलिक के मुकदमे का ट्रायल पूरा करने की भी अपील
साथ ही याचिका में 25 जनवरी 1990 की सुबह वायुसेना के चार अधिकारियों की हत्या के मामले में यासीन मलिक के मुकदमे का ट्रायल पूरा करने की मांग की गई है। इसके अलावा 1989-90 और उसके बाद के वर्षों के दौरान कश्मीरी पंडितों की सामूहिक हत्याओं और नरसंहार की जांच के लिए एक स्वतंत्र समिति या आयोग की नियुक्ति की मांग की गई है। साथ ही कश्मीरी पंडितों की हत्याओं की प्राथमिकी के गैर-अभियोजन के कारणों की जांच की भी गुहार लगाई गई है। जांच अदालत की निगरानी में हो ताकि सैकड़ों एफआईआर बिना किसी और देरी के अपने तार्किक निष्कर्ष पर पहुंच सकें। सुधारात्मक याचिका शिकायतों के निवारण के लिए उपलब्ध अंतिम न्यायिक उपाय है और इस याचिका पर फैसला जजों द्वारा चैंबर में लिया जाता है।

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