मुरादाबादी मीनारों से बुलंद हैं दुनियाभर की मस्जिदें
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पीतलनगरी मुरादाबाद की मीनारों से देश ही नहीं दुनियाभर की मस्जिदें बुलंद हो रही हैं। इसकी वजह यहां के कुशल दस्तकार हैं जो पीतल की मीनारों पर बेहतरीन नक्काशियां उकेरते हैं। इन मीनारों की मांग वैसे तो सभी इस्लामी देशों में है लेकिन खाड़ी देशों में इन्हें बेहद पसंद किया जा रहा है।
निर्यातकों के मुताबिक पीतल की मीनार पर नक्काशियां उकेरी जाती हैं, जिसके बाद की जाने वाली सोने की पॉलिश उसकी खूबसूरती में चार चांद लगा देती है। खाड़ी के देशों में इन मीनारों को प्रसिद्ध मस्जिदों में लगाने का चलन बढ़ा है। मुरादाबाद केपांच-छह निर्यातक इनके निर्माण से जुड़े हैं। देशों में निर्यात की जाने वाली मीनारें पांच से छह फीट की होती हैं। पोर्टेबिलिटी के मद्देनजर इनका निर्माण छोटे-छोटे हिस्सों में किया जाता है। बाद में इन टुकड़ों को जोड़ लिया जाता है।
इन देशों में होती आपूर्ति
मस्जिदों पर लगने वाली मीनार काफी वजनी होती है। एक मीनार का वजन साठ से अस्सी किलोग्राम होता है। पीतलनगरी में बनी मीनारों के अलावा कई तरह की लाइट्स भी हैं जो पसंद की जाती हैं। मीनारों के साथ इनकी भी खूब मांग है। हैंडीक्रॉफ्ट डेवलपमेंट सोसइटी के सचिव नोमान मंसूरी ने कहा कि मुरादाबादी मीनार पर की गई नक्काशियां मुस्लिम देशों में काफी पसंद की जाती हैं।
सऊदी अरब, सीरिया, जद्दा, रियाद, कतर, दुबई, अबूधाबी, शारजाह सहित अन्य खाड़ी देशों में मुरादाबादी मीनारों की सीधी आपूर्ति होती है। सबसे अधिक मांग सऊदी अरब में है, यह इनका सबसे बड़ा बाजार है। सऊदी अरब और आबू धाबी केबाजारों से यह यूरोप और अफ्रीका में भेजी जाती है।