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Mumbai: विधायिका की चर्चाएं हंगामे में हो रहीं तब्दील, पीठासीन अधिकारी सम्मेलन में बोले धनखड़
Mon, 29 Jan 2024 07:02 AM IST
यशोधन शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: यशोधन शर्मा
Updated Mon, 29 Jan 2024 07:02 AM IST
सार
धनखड़ ने कहा कि पीठासीन अधिकारियों को सदन की कार्यवाही पर बारीक नजर रखनी चाहिए और मर्यादा सुनिश्चित करने के लिए अपने अधिकार का इस्तेमाल करना चाहिए। पीठासीन अधिकारी लोकतांत्रिक स्तंभों के संरक्षक हैं।
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जगदीप धनखड़।
- फोटो : एक्स/भारत के उपराष्ट्रपति
विस्तार
उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने रविवार को कहा कि चर्चा, जो लोकतंत्र की आधारशिला है, हंगामे में तब्दील हो गई है। विधायी निकायों के पीठासीन अधिकारियों को सदन की मर्यादा सुनिश्चित करने के लिए अपने अधिकार का इस्तेमाल करना चाहिए। धनखड़ ने 84वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारियों के सम्मेलन के समापन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि विधायी निकायों की कार्यवाही में व्यवधान एक दुखद परिदृश्य है।
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धनखड़ ने कहा, यह कोई रहस्य नहीं है कि गड़बड़ी और व्यवधान की योजना बनाई जाती है, जिसके लिए बैनर छापे जाते हैं और नारे गढ़े जाते हैं। ऐसी चीजों का हमारी प्रणाली में कोई स्थान नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रतिनिधि संस्थाओं और प्रतिनिधियों में जनता के विश्वास का कम होना समाज के लिए कैंसर है।
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अनुशासनहीनता, अशोभनीय व्यवहार की घटनाएं बढ़ रहीं
धनखड़ ने कहा कि पीठासीन अधिकारियों को सदन की कार्यवाही पर बारीक नजर रखनी चाहिए और मर्यादा सुनिश्चित करने के लिए अपने अधिकार का इस्तेमाल करना चाहिए। पीठासीन अधिकारी लोकतांत्रिक स्तंभों के संरक्षक हैं। उन्होंने अफसोस जताया कि सदन में अनुशासनहीनता और अशोभनीय व्यवहार की घटनाएं बढ़ रही हैं और व्यवधान डालने में गर्व महसूस किया जाता है। धनखड़ ने कहा, यह परेशान करने वाला परिदृश्य है और इससे बाहर निकलने का रास्ता खोजने के लिए आत्ममंथन की जरूरत है।
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दल-बदल विरोधी कानून की समीक्षा के लिए गठित समिति के अध्यक्ष होंगे नार्वेकर: बिरला
दल-बदल विरोधी कानून की समीक्षा के लिए एक समिति गठित की गई है, जिसकी अध्यक्षता महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर करेंगे। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सम्मेलन में यह घोषणा की। बिरला ने कहा कि दो दिवसीय सम्मेलन के दौरान पीठासीन अधिकारियों ने लोकतांत्रिक संस्थाओं को जनता से जोड़ने और उन्हें अधिक जवाबदेह और पारदर्शी बनाने की कार्ययोजना पर चर्चा की।
अगले बुधवार से शुरू हो रहे संसद के बजट सत्र के बरे में बिरला ने कहा कि सदस्यों की गरिमा को ध्यान में रखते हुए संसद परिसर की मजबूत और अचूक सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा, बजट सत्र से आगंतुकों और उनके सामान की तलाशी के लिए नए उपायों के तहत परिसर में 140 केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) कर्मियों की एक टुकड़ी तैनात की गई है।
सीमा के भीतर होनी चाहिए असहमति: हरिवंश
सम्मेलन में राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने कहा कि किसी न किसी रूप में असहमति हमेशा लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा रही है, लेकिन यह सीमा के भीतर होनी चाहिए। इस दौरान सदन के नियमों और प्रक्रियाओं का पालन करना चाहिए। हरिवंश ने कहा, इन दिनों सत्र के पहले दिन से ही व्यवधान शुरू हो जाते हैं और कई दिनों तक जारी रहते हैं। यह दर्शाता है कि ये व्यवधान योजनाबद्ध होते हैं।
इनका उद्देश्य विधायिका के प्राथमिक कार्य को बाधित करने के लिए होते हैं। उन्होंने कहा कि कई सदस्य विधायी कार्यवाही में बाधा नहीं डालना चाहते, लेकिन व्यवधान में भाग लेने के लिए पार्टियों से प्रभावित हो जाते हैं।
विधानमंडलों के सुचारू कामकाज में बेहतर पार्टी समन्वय और आम सहमति सुनिश्चित करने की आवश्यकता है। हरिवंश ने सुझाव दिया कि राज्य अपने नियमों और प्रक्रियाओं की समीक्षा करने पर विचार करें ताकि सुनिश्चित किया जा सके कि वे वर्तमान जरूरतों के अनुरूप हों और सदन के कामकाज के संचालन में बेहतर समय आवंटित किया जा सके।