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साइबर ठगों की नई चाल: पीड़ितों का पैसा गोल्ड लोन कंपनी के अकाउंट में ट्रांसफर करते, वजह जानकर रह जाएंगे हैरान
सार
पुलिस के मुताबिक, आरोपी पहले लोगों को फोन करते थे और खुद को महानगर गैस कंपनी से जुड़ा बताकर उन्हें भरोसे में लेते थे। कभी गैस मीटर की पेंडिंग रीडिंग ऑनलाइन अपलोड करने तो कभी मामूली बकाया गैस बिल भरने का झांसा दिया जाता था।
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Cyber scam
- फोटो : FREEPIK
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विस्तार
महानगर गैस की पेंडिंग रीडिंग अपलोड करने और मामूली बकाया बिल भरने के नाम पर मोबाइल में फर्जी 'एपीके' (APK) फाइल डाउनलोड करवाकर बैंक खाते साफ करने वाले तीन साइबर ठगों को मुंबई की कांदिवली पुलिस ने गुजरात से गिरफ्तार किया है। आरोपियों ने ठगी का पैसा अपने बैंक खातों में ट्रांसफर करने के बजाय एक अनूठी मोड्स ऑपरेंडी अपनाई। पुलिस जांच में सामने आया कि तीनों ने 'बजाज फिनसर्व' से अपने नाम पर गोल्ड लोन ले रखा था और वे ठगी के शिकार लोगों के बैंक खातों से पैसे सीधे बजाज फिनसर्व को ऑनलाइन ट्रांसफर कर अपने गोल्ड लोन की किस्त चुकाते थे। इसके बाद गिरवी रखा अपना सोना छुड़ाकर उसे निजी फायदे के लिए इस्तेमाल करते थे।
साइबर ठगों ने धांधली के लिए चली नई चाल
सीनियर इंस्पेक्टर करण सोनकवडे ने बताया कि पुलिस टीम ने आरोपियों को गुजरात के सूरत जिले के ओलपाड गांव से हिरासत में लिया। उनके पास से ठगी की पूरी रकम 6,24,518 रुपये भी जब्त की गई है। पकड़े गए आरोपियों की पहचान उर्विशकुमार राजेशभाई पटेल, जनिकुमार प्रदीपभाई पटेल और अंकितकुमार संजयभाई पटेल के रूप में हुई है। करण सोनकवडे ने बताया कि भारत सरकार ने अभी नया सिस्टम बनाया है कि साइबर ठगी की रकम जिस भी अकाउंट में ट्रांसफर हो, वह अकाउंट जल्दी से जल्दी ब्लॉक कर दो। लेकिन गोल्ड लोन ब्लॉक नहीं होते, इसलिए साइबर ठगों ने ठगी की यह नई मोड्स ऑपरेंडी अपनाई।
पुलिस के मुताबिक, आरोपी पहले लोगों को फोन करते थे और खुद को महानगर गैस कंपनी से जुड़ा बताकर उन्हें भरोसे में लेते थे। कभी गैस मीटर की पेंडिंग रीडिंग ऑनलाइन अपलोड करने तो कभी मामूली बकाया गैस बिल भरने का झांसा दिया जाता था। इसके बाद आरोपियों की ओर से पीड़ित के मोबाइल पर एमजीएनएल कंपनी की फर्जी एपीके फाइल भेजी जाती थी। आरोपी पीड़ितों को यह फाइल डाउनलोड और इंस्टॉल करने के लिए कहते थे। फाइल इंस्टॉल होते ही आरोपियों को मोबाइल तक पहुंच मिल जाती थी और वे बैंकिंग संबंधी जानकारी हासिल कर पीड़ितों के खातों से रकम निकाल लेते थे।
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जांच में हुआ चौंकाने वाला खुलासा
जांच में पुलिस को पता चला कि ठगी के बाद रकम को अपने खाते में ट्रांसफर करने के बजाय आरोपी सीधे बजाज फिनसर्व के खाते में ऑनलाइन भुगतान करते थे। दरअसल, तीनों ने बजाज फिनसर्व से अपने नाम पर गोल्ड लोन लिया हुआ था। पीड़ितों के बैंक खातों से निकाली गई रकम से वे अपना गोल्ड लोन चुकाते थे। लोन की रकम चुकाने के बाद वे कंपनी के पास गिरवी रखा सोना छुड़ा लेते थे। इस तरह पीड़ित के खाते से निकला पैसा आरोपियों के लिए सोने में बदल जाता था। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपियों ने इस तरीके से कितने लोगों को निशाना बनाया और कितनी रकम से अपने गोल्ड लोन चुकाए।
कांदिवली में इस मोडस ऑपरेंडी से जुड़ी दो अलग-अलग वारदातें सामने आई थीं। पहली घटना में शिकायतकर्ता बकुल कांतिलाल देसाई को फोन कर गैस की पेंडिंग रीडिंग अपलोड करने का झांसा दिया गया। इसके बाद उनके मोबाइल पर फर्जी एपीके फाइल भेजकर उसे डाउनलोड करवाया गया। मोबाइल हैक होने के बाद आरोपियों ने उनके एचडीएफसी बैंक खाते से 2,07,401 रुपये निकाल लिए। दूसरी घटना में शैलेश जयकिशन परमार को महज 12 रुपये का गैस बिल भरने का झांसा दिया गया। आरोपियों ने उन्हें भी फर्जी एपीके फाइल डाउनलोड करवाई और मोबाइल तक पहुंच हासिल कर ली। इसके बाद उनके बैंक खाते से 4,17,117 रुपये निकाल लिए गए। पुलिस के मुताबिक, दोनों मामलों में ठगी गई रकम का इस्तेमाल आरोपियों ने अपने गोल्ड लोन से जुड़ी देनदारी चुकाने में किया।
कांदिवली पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता की धाराओं और आईटी एक्ट के तहत मामले दर्ज किए गए थे। जांच के दौरान साइबर सेल की तकनीकी मदद से पुलिस ने आरोपियों के मोबाइल और ऑनलाइन लेनदेन से जुड़े सुराग जुटाए। इसी आधार पर पुलिस टीम गुजरात के ओलपाड गांव तक पहुंची और तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। सीनियर इंस्पेक्टर करण सोनकवडे ने यह भी बताया कि जब आरोपियों को रिमांड के लिए कोर्ट में पेश किया गया, तो मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट ने पुलिस से महानगर गैस कंपनी की भी जांच करने को कहा कि उनके यहां से ग्राहकों का डेटा साइबर ठगों तक अखिर कैसे लीक होता है।
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साइबर ठगों ने धांधली के लिए चली नई चाल
सीनियर इंस्पेक्टर करण सोनकवडे ने बताया कि पुलिस टीम ने आरोपियों को गुजरात के सूरत जिले के ओलपाड गांव से हिरासत में लिया। उनके पास से ठगी की पूरी रकम 6,24,518 रुपये भी जब्त की गई है। पकड़े गए आरोपियों की पहचान उर्विशकुमार राजेशभाई पटेल, जनिकुमार प्रदीपभाई पटेल और अंकितकुमार संजयभाई पटेल के रूप में हुई है। करण सोनकवडे ने बताया कि भारत सरकार ने अभी नया सिस्टम बनाया है कि साइबर ठगी की रकम जिस भी अकाउंट में ट्रांसफर हो, वह अकाउंट जल्दी से जल्दी ब्लॉक कर दो। लेकिन गोल्ड लोन ब्लॉक नहीं होते, इसलिए साइबर ठगों ने ठगी की यह नई मोड्स ऑपरेंडी अपनाई।
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पुलिस के मुताबिक, आरोपी पहले लोगों को फोन करते थे और खुद को महानगर गैस कंपनी से जुड़ा बताकर उन्हें भरोसे में लेते थे। कभी गैस मीटर की पेंडिंग रीडिंग ऑनलाइन अपलोड करने तो कभी मामूली बकाया गैस बिल भरने का झांसा दिया जाता था। इसके बाद आरोपियों की ओर से पीड़ित के मोबाइल पर एमजीएनएल कंपनी की फर्जी एपीके फाइल भेजी जाती थी। आरोपी पीड़ितों को यह फाइल डाउनलोड और इंस्टॉल करने के लिए कहते थे। फाइल इंस्टॉल होते ही आरोपियों को मोबाइल तक पहुंच मिल जाती थी और वे बैंकिंग संबंधी जानकारी हासिल कर पीड़ितों के खातों से रकम निकाल लेते थे।
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जांच में हुआ चौंकाने वाला खुलासा
जांच में पुलिस को पता चला कि ठगी के बाद रकम को अपने खाते में ट्रांसफर करने के बजाय आरोपी सीधे बजाज फिनसर्व के खाते में ऑनलाइन भुगतान करते थे। दरअसल, तीनों ने बजाज फिनसर्व से अपने नाम पर गोल्ड लोन लिया हुआ था। पीड़ितों के बैंक खातों से निकाली गई रकम से वे अपना गोल्ड लोन चुकाते थे। लोन की रकम चुकाने के बाद वे कंपनी के पास गिरवी रखा सोना छुड़ा लेते थे। इस तरह पीड़ित के खाते से निकला पैसा आरोपियों के लिए सोने में बदल जाता था। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपियों ने इस तरीके से कितने लोगों को निशाना बनाया और कितनी रकम से अपने गोल्ड लोन चुकाए।
कांदिवली में इस मोडस ऑपरेंडी से जुड़ी दो अलग-अलग वारदातें सामने आई थीं। पहली घटना में शिकायतकर्ता बकुल कांतिलाल देसाई को फोन कर गैस की पेंडिंग रीडिंग अपलोड करने का झांसा दिया गया। इसके बाद उनके मोबाइल पर फर्जी एपीके फाइल भेजकर उसे डाउनलोड करवाया गया। मोबाइल हैक होने के बाद आरोपियों ने उनके एचडीएफसी बैंक खाते से 2,07,401 रुपये निकाल लिए। दूसरी घटना में शैलेश जयकिशन परमार को महज 12 रुपये का गैस बिल भरने का झांसा दिया गया। आरोपियों ने उन्हें भी फर्जी एपीके फाइल डाउनलोड करवाई और मोबाइल तक पहुंच हासिल कर ली। इसके बाद उनके बैंक खाते से 4,17,117 रुपये निकाल लिए गए। पुलिस के मुताबिक, दोनों मामलों में ठगी गई रकम का इस्तेमाल आरोपियों ने अपने गोल्ड लोन से जुड़ी देनदारी चुकाने में किया।
कांदिवली पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता की धाराओं और आईटी एक्ट के तहत मामले दर्ज किए गए थे। जांच के दौरान साइबर सेल की तकनीकी मदद से पुलिस ने आरोपियों के मोबाइल और ऑनलाइन लेनदेन से जुड़े सुराग जुटाए। इसी आधार पर पुलिस टीम गुजरात के ओलपाड गांव तक पहुंची और तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। सीनियर इंस्पेक्टर करण सोनकवडे ने यह भी बताया कि जब आरोपियों को रिमांड के लिए कोर्ट में पेश किया गया, तो मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट ने पुलिस से महानगर गैस कंपनी की भी जांच करने को कहा कि उनके यहां से ग्राहकों का डेटा साइबर ठगों तक अखिर कैसे लीक होता है।