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महाराष्ट्र: बेटी का यौन शोषण करने वाले पिता को पांच साल की सजा, कोर्ट ने कहा- ...यह तथ्य हैरान करने वाला
Mon, 18 Apr 2022 02:58 PM IST
प्रांजुल श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: प्रांजुल श्रीवास्तव
Updated Mon, 18 Apr 2022 02:58 PM IST
सार
कोर्ट ने कहा कि एक पिता अपनी बेटी का संरक्षक व विश्वासपात्र होता है, ऐसे में यह अपराध और भी ज्यादा गंभीर हो जाता है। ऐसे में दया याचिका ही गलत है और यह न्याय का उपहास होगा।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : amar ujala
विस्तार
तीन साल पुराने मामले में मुंबई कोर्ट ने अपनी पांच साल की बेटी के साथ यौन शोषण करने वाले पिता को पांच साल की सजा सुनाई है। कोर्ट ने कहा है कि एक पिता अपनी बेटी का संरक्षण और विश्वासपात्र होता है, ऐसे में यह मामला और भी गंभीर हो जाता है। कोर्ट ने 40 वर्षीय पिता को मामले में पॉक्सो एक्ट के तहत दोषी करार दिया है। इसके साथ ही कोर्ट ने बचाव पक्ष की उस दलील को खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि कोई "त्वचा से त्वचा" का स्पर्श नहीं था।
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आरोपी की दलीलें हैरान करने वाली
विशेष न्यायाधीश एचसी शेंदे ने कहा कि आरोपी की ओर से पेश की गई दलीलें हैरान करने वाली हैं। दलील में कहा गया कि पीड़िता ने कभी नहीं कहा कि उनके पिता ने अपनी उंगली से उसके गुप्तांग को छुआ था। न्यायाधीश ने कहा कि इस तरह के तर्क हैरान करने वाले हैं। क्योंकि, पॉक्सो एक्ट में यौन उत्पीड़न के प्रावधान या परिभाषा में भी यह उल्लेख नहीं है कि हमलावर को पीड़ित के निजी अंग को कैसे छूना चाहिए और अगर पीड़ित पर हमलावर द्वारा हमला किया जाता है तो यह कितना अपराध है।
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दया याचिका, न्याय का उपहार होगा
कोर्ट ने कहा कि वर्तमान मामले में आरेापी पीड़िता का पिता ही है, ऐसे में दया याचिका ही गलत है और यह न्याय का उपहास होगा। कोर्ट ने कहा कि एक पिता अपनी बेटी का संरक्षक व विश्वासपात्र होता है, ऐसे में यह अपराध और भी ज्यादा गंभीर हो जाता है।
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पीड़ित की मां ने दर्ज कराया था मामला
2019 में पीड़िता की मां की ओर से अपने ही पति के खिलाफ मामला दर्ज कराया गया था। पीड़िता की मां ने बताया कि 2019 में बच्ची के शिक्षक ने उसे उसके अजीब व्यवहार के बारे में बताया था। जब बेटी से पूछताछ की तो खुलासा हुआ कि पिता उसके गुप्त अंगों को छूता था।