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‘अंधेरी’ की तंग गली तक पहुंची कालेधन की जांच, मुंबई की कंपनी के स्विस बैंक में लाखों डॉलर
Fri, 27 Sep 2019 04:53 AM IST
संदीप भट्ट
न्यूज डेस्क, अमर उजाला,नई दिल्ली/बर्न
न्यूज डेस्क, अमर उजाला,नई दिल्ली/बर्न
Published by: संदीप भट्ट
Updated Fri, 27 Sep 2019 04:53 AM IST
सार
- विदेश में बनी कंपनियों के जरिए जमा करवाए लाखों डॉलर
- लीक सूची में सबसे ज्यादा भारतीय खाताधारकों के नाम
- फोन नंबर और ई-मेल नहीं कर रहे काम
- मोनाको की कंपनी से भी जुडे़ तार
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विस्तार
स्विस बैंकों में जमा कालेधन के खिलाफ भारत की जंग मुंबई के अंधेरी इलाके के एक गांव की तंग गली तक जा पहुंची है। यहां छिपकर गुपचुप तरीके से काम कर रही एक कंपनी मोटेक सॉफ्टवेयर प्राइवेट लिमिटेड ने विदेशों में बनी कंपनियों के जरिये स्विट्जरलैंड में लाखों डॉलर जमा करवाए।
दरअसल, जब स्विट्जरलैंड की संघीय कर प्रशासन ने इस कंपनी को नोटिस जारी किया तब भारतीय कर प्रशासन के कान खडे़ हुए। अब आयकर विभाग ने भी स्विस सरकार से इस कंपनी के खिलाफ जांच में मदद मांगी है।
बर्न में नए संघीय गजट में 24 सितंबर को प्रकाशित इस नोटिस में स्विस एजेंसी ने मोटेक सॉफ्टवेयर से 10 दिन में कंपनी की ओर से नामित व्यक्ति के बारे में जानकारी देने को कहा है, ताकि भारतीय कर प्रशासन के साथ सूचनाएं साझा करने के खिलाफ कंपनी अपील कर सके। हालांकि, सार्वजनिक तौर पर जो आधिकारिक दस्तावेज उपलब्ध हैं, उससे करीब दो दशक पुरानी कंपनी के मालिकों और कारोबारी करार के बारे में ज्यादा खुलासा नहीं हो पाया है। इसका नाम लीक हुई ‘एचएसबीसी की सूची’ में सामने आया है।
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दरअसल, जब स्विट्जरलैंड की संघीय कर प्रशासन ने इस कंपनी को नोटिस जारी किया तब भारतीय कर प्रशासन के कान खडे़ हुए। अब आयकर विभाग ने भी स्विस सरकार से इस कंपनी के खिलाफ जांच में मदद मांगी है।
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बर्न में नए संघीय गजट में 24 सितंबर को प्रकाशित इस नोटिस में स्विस एजेंसी ने मोटेक सॉफ्टवेयर से 10 दिन में कंपनी की ओर से नामित व्यक्ति के बारे में जानकारी देने को कहा है, ताकि भारतीय कर प्रशासन के साथ सूचनाएं साझा करने के खिलाफ कंपनी अपील कर सके। हालांकि, सार्वजनिक तौर पर जो आधिकारिक दस्तावेज उपलब्ध हैं, उससे करीब दो दशक पुरानी कंपनी के मालिकों और कारोबारी करार के बारे में ज्यादा खुलासा नहीं हो पाया है। इसका नाम लीक हुई ‘एचएसबीसी की सूची’ में सामने आया है।
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