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ENY: अर्न्स्ट एंड यंग की युवा सीए की काम के दबाव से मौत, कंपनी प्रमुख को चिट्ठी लिख मां ने लगाए गंभीर आरोप
Wed, 18 Sep 2024 04:34 AM IST
दीपक कुमार शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: दीपक कुमार शर्मा
Updated Wed, 18 Sep 2024 04:34 AM IST
सार
केरल की एना सेबेस्टियन पेरिइल ने सिर्फ चार महीने पहले पुणे स्थित ईएनवाई ऑफिस में काम शुरू किया था। आरोप है कि मैनेजर उसे काम के बोझ से लादे रहते थे। एना की मां अनिता ऑगस्टिन ने ईएनवाई के भारत प्रमुख राजीव मेमानी को पत्र लिखकर कंपनी की कार्यसंस्कृति पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
बहुराष्ट्रीय कंपनी अर्न्स्ट एंड यंग (ईएनवाई) की 26 साल की एक युवा चार्टर्ड एकाउंटेंड की कथित रूप से काम के दबाव के कारण हुई मौत सोशल मीडिया पर बड़ी बहस का कारण बन गई है। इसके कारण बड़ी पेशेवर कंपनियों में कार्य के दबाव को महिमामंडित करने और कर्मचारियों के स्वास्थ्य को नजरंदाज करने की संस्कृति सवालों के घेरे में है।
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केरल की एना सेबेस्टियन पेरिइल ने सिर्फ चार महीने पहले पुणे स्थित ईएनवाई ऑफिस में काम शुरू किया था। आरोप है कि मैनेजर उसे काम के बोझ से लादे रहते थे। एना की मां अनिता ऑगस्टिन ने ईएनवाई के भारत प्रमुख राजीव मेमानी को पत्र लिखकर कंपनी की कार्यसंस्कृति पर गंभीर आरोप लगाए हैं। अनिता ने लिखा, एना ने नवंबर 2023 में सीए की परीक्षा पास की, मार्च-2024 में ईएनवाई में काम करना शुरू किया। वह ऊर्जा और जीवन से भरपूर थी। इतनी प्रतिष्ठित कंपनी में काम करने से खुश थी। लेकिन सिर्फ चार माह बाद मेरी दुनिया उजड़ गई, जब एना की मौत की खबर मिली। सबसे दुखद यह कि उसके अंतिम संस्कार में कंपनी से कोई नहीं पहुंचा।
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पत्र में अनिता ने बताया कि किस तरह एना को लगातार काम के बोझ से दबाकर रखा जाता था। उसे ज्यादा काम करने के लिए यह कहकर प्रेरित किया जाता था कि इससे तरक्की की राह खुलेगी। यह कहकर ज्यादा काम करने को महिमामंडित किया जाता था कि सभी कर्मी ऐसा करते हैं। अक्सर वह रातभर कंपनी का काम करती थी और सो भी नहीं पाती थी। अक्सर उसे ऑफिस का वक्त खत्म होने के बाद काम दिया जाता था और चंद घंटे में पूरा करने के लिए कहा जाता था। इससे उसकी सेहत बिगड़ गई, जिससे उसकी मौत हो गई।
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कन्वोकेशन के लिए भी छुट्टी नहीं
अनिता ने लिखा कि वह और उनके पति छह जुलाई को एना के सीए कन्वोकेशन में हिस्सा लेने पुणे गए। वहां एना ने छाती में दर्द की शिकायत की, तो उसे डॉक्टर के पास लेकर गए। डॉक्टर ने बताया कि सिर्फ कम सोने व बेहद कम खाने के कारण उसे समस्या हो रही है। उस दिन भी एना आराम करने के बदले यह कहकर ऑफिस गई कि बहुत काम बचा हुआ है। अगले दिन कन्वोकेशन में भी काम के दबाव के कारण देर से पहुंची।
काम में झोंके रहने को उचित नहीं ठहरा सकते
अनिता ने लिखा, नए कर्मियों को दिन-रात, यहां तक कि रविवार को भी काम में झोंके रहने को कोई उचित नहीं ठहरा सकता। मेरी बेटी बेहद विनम्र थी, उसने कभी अपने मैनेजरों की शिकायत नहीं की, लेकिन मैं चुप नहीं रह सकती। यह पूरा मामला किसी एक व्यक्ति नहीं पूरी प्रणाली का दोष है। अवास्तविक उम्मीदें और उन्हें पूरा करने के लिए जीवन से भरपूर हमारे युवाओं की जान से खेलना हमेशा नहीं चल सकता।