अभी तो ठगे से रह गए हैं महागठबंधन की आस लगाने वाले नेता
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समाजवादी पार्टी प्रमुख मुलायम सिंह यादव के एक स्ट्रोक से महागठबंधन की आस लगाने वाले तमाम नेता ठगे से रह गए हैं। जद(यू) के नाताओं को भी हैरान हैं और राष्ट्रीय लोकदल के चौधरी अजीत सिंह से भी न कुछ कहते बन रहा है और न ही सुनते। प्रो. रामगोपाल यादव की समाजवादी पार्टी में वापसी को भी इस बारे में मुलायम द्वारा संदेश देने के तौर पर देखा जा रहा है। इतना ही नहीं इससे कांग्रेस समेत उ.प्र. के तमाम राजनीतिक दलों के चुनाव प्रचार को भी करारा झटका लगा है।
जद(यू) के शरद यादव काफी समय से जनता दल परिवार की एकजुटता के लिए काम कर रहे हैं। बिहार चुनाव के समय भी उन्होंने लालू, नितीश को करीब लाने में अहम भूमिका निभाई थी। मुलायम को करीब ले आए थे। चौधरी अजीत सिंह के राष्ट्रीय लोकदल के साथ जद(यू) के उ.प्र. चुनाव में उतरने में भी उनकी राय पक्ष में थी। जद(यू) नेता केसी त्यागी भी इसमें कड़ी बने थे।
यहां तक कि समाजवादी पार्टी में अंदरुनी रार बढऩे के बाद चौधरी अजीत सिंह को रास्ता निकलने की आस दिखने लगी था, लेकिन अब कोई कुछ नहीं बोल रहा है। इस बारे में समाजवादी पार्टी के एक नेता का कहना है कि मुलायम नितीश कुमार के साथ हितों का टकराव नहीं चाहते। वहीं एक महासचिव के मुताबिक उ.प्र. में समाजवादी पार्टी को लेकर महागठबंधन नहीं बन सकता, क्योंकि मुलायम कांग्रेस के विरोध से राजनीति में खड़े हुए हैं और यह कांग्रेस का विरोध उनके डीएनए में है।
किसने शुरू की बात
जद(यू) के केसी त्यागी साफ कहते हैं कि किसने महागठबंधन की बात शुरू की। त्यागी का कहना है कि मुलायम का संदेश लेकर शिवपाल आए थे। वह शरद यादव से मिले और चौधरी अजीत सिंह से भी मिले थे। सभी नेता समाजवादी पार्टी की स्थापना के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर लखनऊ में कार्यक्रम में हिस्सा लेने पहुंचे थे।
लेकिन किसी ने भी वहां न तो महागठबंधन की बात की और न ही इसको लेकर कोई चर्चा हुई। जद(यू) नेता का कहना है कि महागठबंधन की चर्चा समाजवादी पार्टी के ही नेताओं ने शुरू की। जब मीडिया ने इस बारे में पूछा तो समाजवादी पार्टी प्रमुख ने कहा समाजवादी पार्टी कोई गठबंधन नहीं करेगी, विलय होगा।
जब बिहार चुनाव के समय विलय की बात हुई थी तो समाजवादी पार्टी ही पीछे हट गई थी।
पीके की रणनीति को झटका
कांग्रेस के नेता भी इस सदमे से नहीं ऊबर पा रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि प्रशांत किशोर(पीके) ने राहुल गांधी को विश्वास में लेकर महागठबंधन की योजना को आगे बढ़ाने की रणनीति पर काम शुरू किया। वह अचानक मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से मिल आए।
प्रशांत किशोर के अखिलेश से मुलाकात के बाद महागठबंधन की संभावना ने जोर पकड़ा और इससे कांग्रेस के चुनाव प्रचार को भारी कप्रशांत किशोर को लेकर काफी द्वंद की स्थिति पैदा हो गई है।
नये सिरे से प्रयास
महागठबंधन की कल्पना में शामिल होने वाले नेताओं ने नये सिरे से प्रयास करने की रणनीति बनानी शुरू कर दी है। राष्ट्रीय लोकदल, जद(यू) मिलकर छोटे दलों के साथ आगामी विधानसभा चुनाव में उतरने की रणनीति बना रहे हैं। वहीं, कांग्रेस अपनी दिशा को लेकर मंथन में जुटी है।
चुनाव प्रचार के बाबत सभी दलों को 500 और 1000 के नोट बंद होने ने भी करारा झटका दिया है। रणनीतिकारों के अनुसार इस तरह की बदली परिस्थितियों के कारण करीब दो-तीन सप्ताह बाद चुनाव प्रचार में गति आएगी।