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BIS: विदेशी पूंजी से संचालित ई-कॉमर्स कंपनियां कर रहीं कानूनों का उल्लंघन, बीआईएस की कार्रवाई की सराहना

Sun, 16 Mar 2025 06:51 PM IST
शिव शुक्ला डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिव शुक्ला Updated Sun, 16 Mar 2025 06:51 PM IST
सार

खंडेलवाल के मुताबिक, ये कंपनियां बार-बार भारतीय कानूनों का उल्लंघन कर रही हैं। उन्होंने क्विक कॉमर्स कंपनियों पर भी नियमों के उल्लंघन और देशभर के छोटे व्यापारियों को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया है। इनके खिलाफ भी सरकार से कड़ी कार्रवाई की मांग है।

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MP Praveen Khandelwal said e-commerce companies run by foreign capital are violating Indian laws
प्रवीण खंडेलवाल - फोटो : एएनआई

विस्तार

कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के राष्ट्रीय महामंत्री और चांदनी चौक के सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने कहा, विदेशी पूंजी से संचालित ई-कॉमर्स कंपनियां भारतीय कानूनों का उल्लंघन कर रही हैं। उन्होंने भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) की कार्रवाई की सराहना की है। खंडेलवाल ने रविवार को जारी अपने बयान में कहा, भारतीय मानक ब्यूरो द्वारा अमेजन, फ्लिपकार्ट और बिगबास्केट जैसे प्रमुख ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ गैर-अनुपालन वाले उत्पादों की बिक्री पर की गई सख्त कार्रवाई को जायज बताया है। उन्होंने ई-कॉमर्स कंपनियों की आलोचना की है। 

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खंडेलवाल के मुताबिक, ये कंपनियां बार-बार भारतीय कानूनों का उल्लंघन कर रही हैं। उन्होंने क्विक कॉमर्स कंपनियों पर भी नियमों के उल्लंघन और देशभर के छोटे व्यापारियों को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया है। इनके खिलाफ भी सरकार से कड़ी कार्रवाई की मांग है। खंडेलवाल ने घोषणा की है कि वे जल्द ही केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और उपभोक्ता मामलों के मंत्री प्रह्लाद जोशी से मुलाकात करेंगे। वह सरकार से ई-कॉमर्स और क्विक-कॉमर्स दोनों के लिए ठोस नीतियों और सख्त नियमों को लागू करने की मांग करेंगे। इससे भारतीय कानूनों का पूरी तरह से अनुपालन सुनिश्चित हो सकेगा। 
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उन्होंने उपभोक्ता सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए कहा कि जो भी कंपनी अनिवार्य बीआईएस मानकों की अवहेलना करती है, उसे कठोर दंड मिलना चाहिए। हाल ही में हुई छापेमारी और जब्ती कार्रवाई इस बात का प्रमाण है कि ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स के लिए बीआईएस प्रमाणन आवश्यकताओं का पालन करना अनिवार्य बनाया जाए। प्रमुख उद्योग जगत के नेताओं ने भी खंडेलवाल की चिंताओं का समर्थन करते हुए तत्काल विनियामक सुधारों की मांग की है। बीसी भरतिया, अध्यक्ष, कैट, ई-कॉमर्स सेक्टर पर मजबूत नियंत्रण की मांग करते हुए चेतावनी दी है कि विदेशी कंपनियां उपभोक्ता सुरक्षा के बजाय अपने मुनाफे को प्राथमिकता देती हैं। 
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कैलाश लख्याणी, अध्यक्ष, ऑल इंडिया मोबाइल रिटेलर्स एसोसिएशन ने कहा, ई-कॉमर्स कंपनियों पर भारत के व्यापार कानूनों के लगातार उल्लंघन, गैर-प्रतिस्पर्धी गतिविधियों, अनुचित मूल्य निर्धारण और गैर-बीआईएस प्रमाणित उत्पादों की बिक्री के आरोप लग रहे हैं। धैर्यशील पाटिल, अध्यक्ष, ऑल इंडिया कंज्यूमर प्रोडक्ट्स डिस्ट्रीब्यूटर्स फेडरेशन ने चेताया कि क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स भी भ्रामक व्यापारिक गतिविधियों में शामिल हो सकते हैं। उन्होंने सरकार से इन कंपनियों की गहन जांच कराने की अपील की। सुमित अग्रवाल, संयुक्त महासचिव, कैट, ने भारतीय कानूनों का उल्लंघन करने वाले विदेशी ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर सख्त कार्रवाई की मांग की। उन्होंने सरकार से नकली और असुरक्षित उत्पादों की बिक्री रोकने के लिए कठोर नीतियां लागू करने का आग्रह किया है। 


उपभोक्ता संरक्षण को लेकर अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए, खंडेलवाल ने बीआईएस से कड़ी प्रवर्तन कार्रवाई जारी रखने और कानून का उल्लंघन करने वालों पर कठोर कानूनी कार्रवाई करने की अपील की है। उन्होंने उपभोक्ताओं से बीआईएस केयर ऐप के माध्यम से नकली या गैर-प्रमाणित उत्पादों की शिकायत करने का आग्रह किया है। इससे भारत में एक अधिक सुरक्षित और पारदर्शी ई-कॉमर्स प्रणाली सुनिश्चित की जा सकेगी। 

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