MP Politics: 46 निकाय के चुनावों में शिवराज ने झोंकी ताकत, क्या वापस आएगा चार साल पहले खोया जनाधार?
MP Politics: प्रदेश की सियासत में आदिवासी वर्ग की भूमिका को देखते हुए 46 निकाय चुनाव में क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल और प्रदेश संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा भी ग्रामीणों का मन टटोलने के लिए निकल गए हैं। 17 नगर पालिका और 29 नगर परिषदों में से अधिकांश आदिवासी बहुल क्षेत्रों के हैं। इन निकायों में जीत का परचम फहरा कर भाजपा मिशन 2023 को लेकर आश्वस्त होने की कवायद में जुटी है
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मध्यप्रदेश के आदिवासी बहुल जिलों में कमल खिलाने के लिए अब प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कमान अपने हाथों में ले ली है। गुरुवार को जहां प्रदेश के सीएम बालाघाट, छिंदवाड़ा जिले के आदिवासी इलाके में पहुंचे। वहीं शुक्रवार को वे डिंडोरी, मंडला और नरसिंहपुर में ग्रामीणों के बीच पहुंच रहे हैं। इधर, कांग्रेस की ओर से पूर्व सीएम कमलनाथ भी मैदान में डटे हुए हैं। प्रदेश के 18 जिलों के 46 निकाय में 27 सितंबर को मतदान होने हैं, इसमें 17 जिले आदिवासी बाहुल है। इन्हें साधने के लिए भाजपा के सत्ता और संगठन के अलावा मंत्रियों की भी तैनाती की गई है।
मध्यप्रदेश के राजनीतिक जानकारों का कहना है कि भाजपा के लिए 2023 फतह के लिए इन निकायों में जीत जरूरी है। भाजपा और कांग्रेस इस बात को अच्छी तरह से जानते कि अजजा वर्ग को साधे बिना सत्ता की सीढ़ी चढ़ने के लिए आदिवासी वोटर्स का सहारा बेहद जरूरी है। पिछले विधानसभा चुनाव 2018 के दौरान इस वर्ग से भाजपा का जनाधार खिसक गया था। यही वजह थी कि विधानसभा की 230 सीटों में से अजजा वर्ग के लिए आरक्षित 47 सीटों में से भाजपा के खाते में महज 16 सीटें आई थीं। जबकि 2013 में भाजपा ने 31 सीटों पर जीत हासिल की थी। 47 सीटों के अलावा करीब प्रदेश में तीन दर्जन ऐसी सीटें हैं, जहां अजजा वोटर निर्णायक भूमिका में होंगे।
सत्ता के साथ संगठन भी मैदान में
प्रदेश की सियासत में आदिवासी वर्ग की भूमिका को देखते हुए 46 निकाय चुनाव में क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल और प्रदेश संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा भी ग्रामीणों का मन टटोलने के लिए निकल गए हैं। 17 नगर पालिका और 29 नगर परिषदों में से अधिकांश आदिवासी बहुल क्षेत्रों के हैं। इन निकायों में जीत का परचम फहरा कर भाजपा मिशन 2023 को लेकर आश्वस्त होने की कवायद में जुटी है। प्रदेश में यह पहला मौका है जब राष्ट्रीय स्तर के पदाधिकारी भी निकाय चुनाव वाले आदिवासी जिलों में सीधे जमीनी फीडबैक हासिल करने जा रहे हैं। भाजपा के नए क्षेत्रीय संगठन महामंत्री जामवाल का कार्यभार संभालने के बाद मध्यप्रदेश में एक माह के बाद यह दूसरा प्रवास है।
हर क्षेत्र में सीएम कर रहे पेसा एक्ट की चर्चा
सीएम चौहान के अलावा प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा और संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा ने भी इन चुनावों में प्रचार तेज कर दिया है। खंडवा खरगोन के क्षेत्र में जहां वीडी शर्मा सक्रिय हैं, आदिवासी जिलों में प्रचार पर निकले सीएम पेसा एक्ट सहित उनके मुद्दों की चर्चा करते हुए नजर आ रहे हैं। इसके पहले सीएम मालवा अंचल के उज्जैन, रतलाम, झाबुआ में भी चुनावी सभाएं संबोधित कर चुके हैं। इसके अलावा महाकौशल में शहडोल संभाग के बाद बलाघाट और कमलनाथ के गढ़ छिंदवाड़ा में भी सरकार की योजनाओं को सराह चुके हैं।
मंत्रियों को भी लगाया काम पर
प्रदेश में कांग्रेस और भाजपा दोनों ही आदिवासियों को साधने के लिए कोशिशों में जुटे हुए हैं। प्रचार के दौरान दोनों ही एक दूसरे पर आदिवासी विरोधी होने का आरोप भी लगा रहे हैं। इधर, भाजपा ने 18 जिलों के प्रभारी मंत्रियों की तैनाती भी इन चुनाव में लगाई है। हाल ही में हुई विधायक दल की बैठक में भी मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पहली प्राथमिकता से निकाय चुनाव की चिंता करने की हिदायत दी थी।
प्रदेश में जिन 46 निकायों में मतदान होना है, उनमें झाबुआ, आलीराजपुर, शहडोल, सिंगरौली, मंडला-डिडौरी, बालाघाट, छिंदवाड़ा, बैतूल, रतलाम, रायसेन, खरगोन, खंडवा, अनूपुर, उमरिया, सिवनी, बुरहानपुर और सागर जिलों में पिछले विधानसभा चुनाव के नतीजे अनुकूल नहीं थे। यही कारण है कि भाजपा मिशन 2023 के पहले इन क्षेत्रों पर फोकस कर रही है।