MP Politics: भाजपा के गढ़ में इस प्लान से कांग्रेस लगाएगी सेंध, सिंधिया के इलाके और आदिवासियों पर है नजर
MP Politics: राजनीतिक जानकारों का कहना है कि कांग्रेस की रणनीति है कि सिंधिया के गढ़ में सेंध लगाई जाए। क्योंकि ग्वालियर-चंबल संभाग में इस समय भाजपा चार खेमों में विभाजित हो गई है। जिसमें एक खेमा सिंधिया का, दूसरा खेमा संगठन का और तीसरा खेमा शिवराज और चौथा खेमा तोमर का है। अब इसी का लाभ कांग्रेस उठाना चाहती है...
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मध्यप्रदेश में भारतीय जनता पार्टी के नेताओं के दौरे शुरू होने के बाद अब राज्य में कांग्रेस पार्टी की रैलियों का सिलसिला भी शुरू हो गया है। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी 21 जुलाई को ग्वालियर-चंबल संभाग के दौरे पर आ रही हैं। वे केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के गढ़ ग्वालियर में एक जनसभा को संबोधित करेंगी। जबकि प्रियंका के बाद राहुल गांधी का भी मध्यप्रदेश आने का प्लान तैयार हो गया है। पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी 8 अगस्त को विंध्य से कांग्रेस का चुनावी शंखनाद करेंगे। इसके अलावा शहडोल जिले में आमसभा को संबोधित करेंगे। इससे पहले एक जुलाई को पीएम मोदी भी शहडोल जिले के पकरिया गांव पहुंचे। उन्होंने भी विंध्य महाकौशल के सहारे पूरे प्रदेश के जनजातीय समुदाय को साधने की कोशिश की थी।
इसलिए प्रियंका जा रही हैं ग्वालियर
प्रियंका गांधी के दौरे और रैली को सफल बनाने के लिए कांग्रेस संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारी बैठक कर रहे हैं और रूपरेखा बनाने में जुटे हुए हैं। कांग्रेस के जिला अध्यक्ष ग्रामीण, विजय सिंह चौहान ने अमर उजाला को बताया कि प्रियंका गांधी के दौरे को लेकर कांग्रेसी उत्साह से लबरेज हैं। प्रियंका का यह दौरा मध्यप्रदेश में सत्ता परिवर्तन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। प्रत्येक विधानसभा में कार्यकर्ताओं को इस सभा को लेकर जिम्मेदारी सौंपी गई है। हर विधानसभा से बड़ी संख्या में कार्यकर्ता ग्वालियर रैली में जाएंगे और अपनी भागीदारी निभाएंगे।
दरअसल, ज्योतिरादित्य सिंधिया के कांग्रेस छोड़ने के बाद ये पहला मौका होगा, जब गांधी परिवार का कोई सदस्य ग्वालियर चंबल में बड़ी सभा करेगा। ग्वालियर को सिंधिया का गढ़ कहा जाता है। 2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को ग्वालियर चंबल में जबरदस्त सफलता मिली थी, लेकिन सिंधिया के भाजपा में जाने के बाद यहां के सियासी समीकरण पूरी तरह से बदल गए हैं। ऐसे में कांग्रेस प्रियंका गांधी के सहारे अपने वोट बैंक को एक बार फिर से मजबूत बनाए रखना चाहती है। इसलिए पार्टी इस क्षेत्र में पूरी ताकत लगाए हुए है। प्रियंका ने जब जबलपुर में रैली की थी, उस वक्त भी उन्होंने सिंधिया पर निशाना साधते हुए लोगों से अपील की थी कि इस बार गद्दारों को हराकर सबक सिखाएं। इससे पहले कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी कह चुके हैं कि जो कांग्रेस को छोड़कर गए थे, लेकिन आज भी कांग्रेस की विचारधारा में भरोसा करते हैं तो उनके लिए पार्टी के दरवाजे खुले हैं।
प्रदेश के राजनीतिक जानकारों का कहना है कि कांग्रेस की रणनीति है कि सिंधिया के गढ़ में सेंध लगाई जाए। क्योंकि ग्वालियर-चंबल संभाग में इस समय भाजपा चार खेमों में विभाजित हो गई है। जिसमें एक खेमा सिंधिया का, दूसरा खेमा संगठन का और तीसरा खेमा शिवराज और चौथा खेमा तोमर का है। अब इसी का लाभ कांग्रेस उठाना चाहती है। पार्टी भाजपा की आपसी गुटबाजी को भुनाने की कोशिशों में लगी हुई है। पिछले दिनों कई असंतुष्ट सिंधिया समर्थकों ने पार्टी छोड़ी है और कांग्रेस का दामन थामा है। अब प्रियंका गांधी के दौरे को देखते हुए कांग्रेस में उत्साह का एक नया वातावरण देखा जा रहा है, जिसका लाभ आगामी चुनाव में पार्टी को हो सकता है।
इससे पहले कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने 12 जून को जबलपुर पहुंचीं थी। जहां उन्होंने मां नर्मदा की पूजा-अर्चना कर विधानसभा चुनाव का शंखनाद किया था। अपने जबलपुर दौरे से प्रियंका ने पूरे महाकौशल की 38 सीटों को कवर किया था। महाकौशल के बाद अब कांग्रेस का फोकस ग्वालियर-चंबल पर है। इस क्षेत्र में 34 विधानसभा सीटें हैं, पार्टी इन सीटों को भी कवर करेगी। पिछले चुनाव में कांग्रेस को यहां अच्छी सफलता मिली थी।
हनुमान जी के दर्शन कर राहुल करेंगे शुरुआत
जल्द ही कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी भी मध्यप्रदेश का दौरा करेंगे। आगामी 8 अगस्त को कांग्रेस नेता राहुल गांधी का मध्यप्रदेश दौरा तय किया गया है। भारत जोड़ो यात्रा के बाद राहुल गांधी पहली बार मध्यप्रदेश पहुंचेंगे और सीधे चुनावी शंखनाद करेंगे। राहुल विंध्य शहडोल जिले में एक रैली को संबोधित करेंगे। इससे पहले पीएम मोदी भी 1 जुलाई को शहडोल के पकरिया पहुंचे थे। उन्होंने विंध्य महाकौशल के सहारे पूरे प्रदेश के जनजातीय समुदाय को साधने की कोशिश की थी। राहुल गांधी भी उसी शहडोल जिले का दौरा करने वाले हैं। राहुल यहां पहली रैली कर मध्यप्रदेश में चुनावी बिगुल फूंकेगे। मोदी शहडोल जिले के लालपुर और पकरिया पहुंचे थे, तो राहुल गांधी दूसरी छोर में स्थित ब्यौहारी पहुंच रहे है। कांग्रेस पार्टी ने रैली के लिए ब्यौहारी का चयन इसलिए किया है क्योंकि यहां से रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, पन्ना, कटनी, जबलपुर समेत अन्य स्थानों से आने वालों को सुविधा होगी।
कांग्रेस के सूत्रों ने बताया कि राहुल गांधी शहडोल के ब्यौहारी में सबसे पहले बजरंगबली का दर्शन करेंगे। स्थानीय मंदिर में पूजा अर्चना कर चुनावी आम सभा को संबोधित करने ब्यौहारी सभा स्थल पहुचेंगे। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि राहुल भी मध्यप्रदेश का रण जीतने के लिए जनजातीय समुदाय को साधने मध्यप्रदेश के शहडोल आ रहे हैं। विंध्य महाकौशल के सहारे जनजातीय समुदाय के प्रभाव वाली सीट जीतने का फार्मूला दोनों पार्टियां तलाश रहीं हैं। पीएम मोदी भी जनजातीय समुदाय के साथ संवाद करने के बाद भोजन कर चुके हैं। अभी राहुल गांधी के कार्यक्रम में सिर्फ जनजातीय समुदाय के प्रमुख लोगों से संवाद करने की बात सामने आ रही है।
इसलिए अहम है शहडोल
शहडोल जिला आदिवासी बाहुल्य जिला है। यहां आठ विधानसभा सीटें हैं, जिनमें से सात विधानसभा सीट आदिवासियों के लिए आरक्षित हैं, जबकि एकमात्र अनूपपुर जिले की कोतमा विधानसभा सीट सामान्य वर्ग के लिए है। इसलिए आदिवासी बहुल क्षेत्र में सभी पार्टियों की नजर है। राहुल गांधी शहडोल के जिस ब्यौहारी में राहुल गांधी जनसभा करने जा रहे हैं, वहां से रीवा, सीधी, सिंगरौली भी नजदीक है। इसके अलावा शहडोल के बाजू से डिंडोरी और मंडला, जो कि आदिवासी बहुल इलाका है, यह भी करीब है, ऐसे में इस सभा का दूर तलक तक असर हो सकता है, जिसकी वजह से सभी पार्टियां शहडोल पर केंद्रित हो रही हैं और बड़ी-बड़ी जनसभाएं कर रही हैं और वोटर्स को लुभाने की कोशिश कर रही हैं।