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विधानसभा में गूंजा मुद्दा: मणिपुर-म्यांमार बॉर्डर पर 2028 तक पूरी होगी बाड़बंदी, संवेदनशील क्यों है इलाका?

Wed, 02 Sep 2026 10:41 PM IST
राकेश कुमार अमर उजाला ब्यूरो, इंफाल।
अमर उजाला ब्यूरो, इंफाल। Published by: राकेश कुमार Updated Wed, 02 Sep 2026 10:41 PM IST
सार

मणिपुर सरकार ने म्यांमार सीमा के 398 किमी लंबे दायरे में से 55 किमी पर बाड़ लगाने का काम पूरा कर लिया है और संपूर्ण फेंसिंग का लक्ष्य 2028 निर्धारित किया है। मोरेह क्षेत्र के सीमा स्तंभ 75 से 79 के बीच का हिस्सा अतिसंवेदनशील है, जहां से अवैध घुसपैठ, हथियारों और नशीले पदार्थों की तस्करी की मुख्य समस्या बनी हुई है। 

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manipur myanmar border fencing 2028 target moreh security issue explained
गोविंदास कोंथौजाम, गृह मंत्री मणिपुर - फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

मणिपुर की म्यांमार से लगने वाली अंतरराष्ट्रीय सीमा को सुरक्षित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है। राज्य सरकार ने 398 किलोमीटर लंबी सीमा पर बाड़ लगाने (फेंसिंग) का काम 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य तय किया है। अब तक इसमें से करीब 55 किलोमीटर हिस्से पर बाड़ का निर्माण पूरा कर लिया गया है। बुधवार को विधानसभा में गृह मंत्री गोविंदास कोंथौजाम ने सीमा सुरक्षा की इस महत्वपूर्ण परियोजना की प्रगति की जानकारी साझा की।
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सामग्री की सप्लाई में आ रही रुकावट बनी चुनौती
गृह मंत्री गोविंदास कोंथौजाम ने सदन को बताया कि सीमा स्तंभ संख्या 32 से लेकर 130 तक फैले इस 398 किलोमीटर के दायरे में तेजी से काम करने के प्रयास किए जा रहे हैं। हालांकि, सीमावर्ती और दुर्गम इलाकों तक बाड़ लगाने की निर्माण सामग्री (कंस्ट्रक्शन मटेरियल) को पहुंचाने में आ रही व्यावहारिक और तकनीकी कठिनाइयों की वजह से काम की रफ्तार थोड़ी प्रभावित हुई है। इसके बावजूद, सरकार पूरी सुरक्षा व्यवस्था को समयसीमा के भीतर मजबूत करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
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मोरेह का इलाका सुरक्षा के लिहाज से अतिसंवेदनशील
विधानसभा में चर्चा के दौरान गृह मंत्री गोविंदास कोंथौजाम ने मोरेह क्षेत्र के तहत आने वाले सीमा स्तंभ संख्या 75 से 79 के बीच के हिस्से को सबसे अधिक संवेदनशील बताया। उन्होंने कहा कि म्यांमार के साथ लगती बिना बाड़ वाली और खुली सीमा के कारण राज्य को लगातार कई तरह की गंभीर सुरक्षा चुनौतियों से जूझना पड़ रहा है। इस खुले बॉर्डर का फायदा उठाकर हथियार, नशीले पदार्थों (ड्रग्स) की तस्करी और अवैध घुसपैठ जैसी गतिविधियां आए दिन सामने आती रहती हैं।
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जमीन की अदला-बदली पर क्या बोली सरकार?
यह पूरी बहस कांग्रेस विधायक के. रंजीत सिंह द्वारा भारत और म्यांमार के बीच जमीन की कथित अदला-बदली के प्रस्ताव को लेकर लाए गए ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के बाद शुरू हुई। इस पर जवाब देते हुए गृह मंत्री ने स्थिति साफ की। उन्होंने कहा कि विदेश मंत्रालय की तरफ से राज्य सरकार को जमीन की किसी भी तरह की अदला-बदली के प्रस्ताव के बारे में कोई आधिकारिक सूचना नहीं मिली है। उन्होंने जोर देकर कहा कि मणिपुर की जनता अपने राज्य का एक इंच भी भूभाग खोने के खिलाफ है और राज्य सरकार जनभावनाओं एवं चिंताओं को मजबूती से केंद्र के समक्ष रखेगी।

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सवाल-जवाब में समझें पूरा मामला

सवाल: मणिपुर-म्यांमार बॉर्डर की कुल लंबाई कितनी है और अब तक कितना काम हुआ है?


उत्तर: मणिपुर की म्यांमार के साथ कुल 398 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा लगती है, जो सीमा स्तंभ 32 से 130 तक फैली हुई है। इसमें से अब तक केवल 55 किलोमीटर हिस्से पर ही बाड़ लगाई जा सकी है और बाकी बचे काम को साल 2028 तक पूरा करने की समयसीमा तय की गई है।

सवाल: फेंसिंग का काम पूरा होने में इतनी देरी क्यों हो रही है?

उत्तर: सीमावर्ती इलाके बेहद दुर्गम हैं, जहां सड़कें और बुनियादी ढांचा काफी कमजोर है। इस वजह से निर्माण सामग्री और भारी मशीनों को बॉर्डर के आखिरी छोर तक पहुंचाने में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, जिससे काम की गति धीमी पड़ जाती है।


सवाल: इस सीमा पर बाड़ लगाना सुरक्षा के लिहाज से इतना जरूरी क्यों है?

उत्तर: बॉर्डर का बड़ा हिस्सा खुला होने के कारण म्यांमार की तरफ से अवैध घुसपैठ, नशीले पदार्थों की तस्करी और हथियारों की अवैध आपूर्ति की घटनाएं लगातार होती रहती हैं। फेंसिंग होने से इन अवैध गतिविधियों पर स्थायी रोक लगाने में मदद मिलेगी।

सवाल: क्या भारत और म्यांमार के बीच जमीन की अदला-बदली की कोई योजना है?

उत्तर:
राज्य सरकार के अनुसार, विदेश मंत्रालय की ओर से जमीन की अदला-बदली को लेकर कोई आधिकारिक प्रस्ताव या सूचना प्राप्त नहीं हुई है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि मणिपुर का कोई भी हिस्सा किसी अन्य देश को देने का सवाल ही नहीं उठता और किसी भी फैसले से पहले स्थानीय लोगों को विश्वास में लिया जाएगा।
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