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Khabaron Ke Khiladi: हाईकोर्ट ने धार भोजशाला को माना मंदिर, विश्लेषकों ने बताए इसके मायने

Sat, 16 May 2026 05:14 PM IST
Rahul Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: Rahul Kumar Updated Sat, 16 May 2026 05:14 PM IST
सार

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने शुक्रवार को धार स्थित भोजशाला पर बड़ा फैसला सुनाते हुए परिसर को मंदिर करार दिया था। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने भोजशाला परिसर को मां वाग्देवी (सरस्वती) का प्राचीन मंदिर माना। इस हफ्ते खबरों के खिलाड़ी में इसी पर चर्चा हुई। पढ़ें विश्लेषकों की राय....
 

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MP High Court Recognizes Dhar Bhojshala as a Temple; Analysts Explain Its Implications
खबरों के खिलाड़ी - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद विवाद में इस शुक्रवार को हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया। कोर्ट ने परिसर को हिंदू मंदिर माना। वहीं, मुस्लिम समाज ने इस निर्णय का विरोध करते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख करने का एलान किया है। इसके अलावा एक हिंदू पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। उनकी मांग है इस मसले पर उनको सुना जाए। इस हफ्ते खबरों के खिलाड़ी में इसी पर चर्चा हुई। चर्चा के लिए वरिष्ठ पीयूष पंत, राकेश शुक्ल, पूर्णिमा त्रिपाठी, अनुराग वर्मा और श्रीनिवास मौजूद रहे।
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पीयूष पंत: इस तरह के जितने भी मामले उठ रहे हैं, उनमें धार्मिक एंगल है। ये धार्मिक एंगल इतना हमारी राजनीति के केंद्र में आ गया है, कि इस तरह के फैसले आते रहेंगे। अयोध्या का फैसला एक नजीर बन गया है। कुछ वैसा ही फैसला अब भोजशाला वाले मामले में भी आया है।  
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अनुराग वर्मा: जब कोर्ट ने ये माना कि वहां पर मंदिर था, वहां सरस्वती की पूजा होती थी और उस पर कब्जा किया गया। इसके बाद फिर जमीन क्यों दी जा रही है। क्या ये नजीर पेश करने की कोशिश हो रही है कि अवैध कब्जे हटाने के लिए भी लोगों को जमीन दी जाएगी। 
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श्रीनिवास: 1991 में प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट आया। उसमें कहा गया था कि 1947 के बाद जहां जिस तरह का धार्मिक स्ट्रक्चर है उसे वैसा ही बनाकर रखा जाएगा। सिर्फ अयोध्या के मामले को इससे अलग रखा गया। सुप्रीम कोर्ट ने जब अयोध्या का फैसला आया तबउसमें कहा गया था कि इस फैसले की रिजनिंग कहीं लागू नहीं होगी। अब ये मामला सुप्रीम कोर्ट आएगा।  

पूर्णिमा त्रिपाठी: भोजशाला के विवाद की बात जहां तक है तो उसमें बहुत डीटेल सर्वे की जरूरत नहीं है। जो भी वहां गया है वो देख सकता है कि ये मंदिर के स्ट्रक्चर है। हमारे देश की ये कड़वी सच्चाई है कि आंक्रांताओं ने बहुत से मंदिर तोड़े। मस्जिद बनाए गए। ये हमारे इतिहास का हिस्सा है। 1995 में दिग्विजय सिंह सरकार ने वहां पर नमाज पढ़ने की इजाजत दे दी। 2003 में मंगलवार और वसंत पंचमी को वहां पूजा होगी और शुक्रवार को नमाज होगी। तीन मौके ऐसे आए जब शुक्रवार को वसंत पंचमी पड़ी है। अगर हम बिना एक दूसरे का सिर फोड़ो सहअस्तित्व में रह सकते हैं तो क्यों एक को बाहर करना है। 


राकेश शुक्ल: ये जमीन का मामला है, धर्मस्थल का मामला नहीं है। अयोध्या को राम जन्मभूमि साबित करने में कितने साल लग गए। मथुरा में न जाने कितने साल लग जाएंगे। यदि कोर्ट में मुकदमा हुआ है तो हाईकोर्ट ने सर्वे में मिले साक्ष्य के लिए आधार पर फैसला दिया है। कोर्ट ने प्रमाणिक साक्ष्य को देखते हुए भोजशाला का फैसला सुनाया है। 
 
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